NCP में असली 'खेल' अभी बाकी है! शरद पवार के मन में क्या चल रहा है?
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी की टूट का 'द एंड' हो चुका है, ऐसा लगता नहीं है। पिछले महीने जब से अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से राजनीतिक तौर पर अलग हुए हैं, उसके कुछ दिनों बाद से चल रही सुलह की गतिविधियां पूरी तरह से सामान्य नहीं हैं।
एनसीपी के अंदर के लोगों की मानें तो कहानी में अभी और भी ट्विस्ट बाकी हैं। अगर ऐसे लोगों की बातों को पार्टी संस्थापक शरद पवार की ओर से कही गई बातों से मिलाएं तो उनका अनुमान गलत नहीं कहा जा सकता।

बीजेपी पर गरम, भतीजे पर नरम!
रविवार को अपने भाषण में बुजुर्ग पवार बीजेपी पर तो बरस रहे थे, लेकिन भतीजे अजित पवार और उनके साथ गए पार्टी विधायकों के प्रति उनका रवैया काफी नरम था। उन्होंने वही दलील दी, जो इन दिनों एक सियासी परंपरा सी नजर आने लगी है। पवार ने कहा कि जो एमएलए बीजेपी के साथ गए हैं, वे 'प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांचों से डरे हुए हैं।'
पहले ईडी पर निशाना साधने से बच रहे थे पवार
यहां गौर करने वाली बात है कि पिछले कुछ वर्षों से बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों के निशाने पर ईडी समेत तमाम जांच एजेंसियां रही हैं। सीबीआई के खिलाफ तो विपक्ष शासित राज्य सरकारों ने एक अभियान ही चला रखा है। लेकिन, करीब पौने दो महीने पहले जब अजित पवार ने चाचा का साथ छोड़ा था, तब शुरुआत में बुजुर्ग पवार बागी विधायकों और अपने भतीजे पर नाराज लग रहे थे। यही नहीं, हाल तक वे ईडी को भी सीधे निशाना बनाने से बच रहे थे।
चाचा ने भतीजे के लिए छोड़ा बहाने का मौका!
यानी अचानक अपने बागी विधायकों और भतीजे के प्रति शरद पवार की नरमी से यही लगता है कि जो कुछ अभी तक हुआ है, वह इस राजनीतिक उठा-पटक का अंत नहीं है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक विश्लेषक रविकिरण देशमुख का कहना है, 'शरद पवार ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में यह सुनिश्चित कर दिया है कि अजित और उनके साथ गए लोग यह दावा करते हुए वापसी कर सकते हैं कि वे प्रवर्तन निदेशालय की धमकियों के चलते बीजेपी गठबंधन में शामिल हो गए थे।'
यही नहीं उनका कहना है कि 'सदन के अंदर भी विधेयकों पर वोटिंग के दौरान शरद पवार वोटों के विभाजन के लिए कह सकते थे और अजित पवार गुट के एमएलए को अयोग्यता के खतरे में डालने के लिए व्हिप जारी किया जा सकता था। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया.... क्योंकि शायद उन्हें लगता है कि मौजूदा व्यवस्था संसदीय चुनावों तक के लिए है।'
ठाकरे वाली सख्ती से बना ली है दूरी!
शरद पवार और उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले का अब कहना है कि उनकी विचारधारा अलग जरूर है, लेकिन अजित पवार और बाकी विधायक अभी भी 'परिवार' का हिस्सा हैं। इस तरह से शरद पवार गुट वाली एनसीपी की रणनीति बागी विधायकों के मसले पर उद्धव ठाकरे, शिवसेना और एकनाथ शिंदे वाले मामले से बिल्कुल उलट है।
शरद पवार के सहयोगी का अलग दिख रहा है स्टैंड
ठाकरे गुट ने शिंदे गुट के प्रत्येक विधायकों को बीजेपी की ओर से 50 करोड़ रुपए दिए जाने के दावे के साथ-साथ घोटालों तक के आरोपों की बौछार लगा दी थी। उनके लिए 'गद्दार' जैसे तीखे शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया था। ठाकरे की सहयोगी एनसीपी और कांग्रेस तक ने भी शिंदे कैंप पर आरोप लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
लेकिन, अजित पवार अपने चाचा के भतीजे हैं, यह बात स्पष्ट रूप और बार-बार सामने आ रही है। न तो शरद गुट और न ही उनके सहयोगी उन्हें उस तरह से निशाना बना रहे हैं। जबकि, अजित पवार ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। वह इसी कार्यकाल में दो-दो बार ऐसा कर चुके हैं।
जब, 2019 में अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ शपथ ली थी, तो सुप्रिया सुले ने अपने 'दादा' के लिए बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया सार्वजनिक तौर पर दी थी। लेकिन, फिर भी उद्धव ठाकरे सरकार में अजित पवार को चाचा के आशीर्वाद से पूरा प्रसाद मिला था। इसलिए, एनसीपी में अभी सबकुछ खत्म हो चुका है, यह कहना बड़ी जल्दबाजी है!
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