अनिल देशमुख केस: सीबीआई और सरकार आमने-सामने, बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश की दलील

मुंबई, 17 अगस्त: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को सीबीआई की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उसने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ बोम्बे हाईकोर्ट में दर्ज की गई 21 अप्रैल की भ्रष्टाचार पर एफआईआर से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए राज्य को निर्देश देने की मांग की थी। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र पुलिस 22 जुलाई के हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हुए दस्तावेज नहीं सौंप रही हैं। वहीं कोर्ट का सरकार ने बताया कि सीबीआई बिना अधिकार के गैर-प्रासंगिक सामग्री मांग रही है।

Anil Deshmukh

जवाब में राज्य सरकार ने जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की खंडपीठ को एक हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई द्वारा पूरा आवेदन 'स्पष्ट रूप से चुप' था। राज्य ने कहा कि सीबीआई दस्तावेज की मांग करने और अदालत के विभिन्न आदेशों का दुरुपयोग करने में अपने अधिकार और अधिकार क्षेत्र से आगे निकल रही हैं। सीबीआई की याचिका में कहा गया है कि 23 जुलाई को उसने राज्य के खुफिया विभाग (एसआईडी) को पत्र लिखकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के पत्र/रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपियां और पुलिस अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी मांगी थी।

हालांकि, एसआईडी ने 27 जुलाई को एक पत्र के माध्यम से एचसी के आदेश की "पूरी तरह से अवज्ञा" में दस्तावेजों को सौंपने से इनकार कर दिया। सीबीआई की याचिका में यह भी कहा गया है कि मुंबई के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन को रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति सौंपने के लिए कहा गया था, लेकिन 26 जुलाई को एक पत्र के माध्यम से इसे अस्वीकार कर दिया गया था। सीबीआई ने शुक्ला द्वारा तत्कालीन महानिदेशक को संबोधित संचार भी मांगा था। पुलिस (DGP) के स्थानांतरण और पोस्टिंग में भ्रष्टाचार को उजागर करना, जो अभी तक प्रदान नहीं किया गया है।

वहीं राज्य के गृह विभाग के संयुक्त सचिव कैलाश गायकवाड़ के माध्यम से दायर एक हलफनामे में कहा गया है कि सरकार और उसके अधिकारी सीबीआई द्वारा शुरू की गई जांच में सहयोग करने के लिए 'कर्तव्यबद्ध' हैं। राज्य का एचसी के आदेशों की अवहेलना करने का कोई "दुर्भावनापूर्ण इरादा" नहीं है। सरकार ने कहा कि सीबीआई द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का देशमुख और उनके सहयोगियों या उनके खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप के साथ कोई संबंध नहीं है, इसलिए केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता नहीं है। वहीं खंडपीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की। जस्टिस शिंदे ने कहा कि हम राज्य सरकार के रुख पर विचार करेंगे, लेकिन राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं।

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