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BMC Elections: चुनाव में MNS प्रमुख राज ठाकरे के साथ आने से क्‍या उद्धव ठाकरे को होगा फायदा? समझे पूरा गणित

BMC elections: निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा परिवर्तन होने वाला है। ठाकरे बंधुओं की बार-बार मुलाकात के बात ये तय माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां साथ चुनाव लड़ेगी। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे एक सप्‍ताह में लगातार दूसरी बार अपनी मां के साथ उद्धव ठाकरे के निवास 'मातोश्री' पहुंचे। तीन महीने में यह उनकी छठी मुलाकात थी।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने हाल ही में राज ठाकरे की मनसे के साथ समझौते की संभावनाओं पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। पिछली मुलाकात के बाद, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने स्पष्ट किया था कि यह एक राजनीतिक बैठक थी और बातचीत अंतिम चरण में है। ठाकरे बंधुओं का राजनीतिक गठबंधन का ऐलान अब कभी भी हो सकता है। आइए जानते हैं ठाकरे बंधुओं के साथ आने से उद्धव ठाकरे को बीएमसी चुनाव में क्‍या लाभ होगा।

BMC elections

विधानसभा या लोकसभा चुनावों में राज ठाकरे की मनसे भले ही विफल रही है लेकिन मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में उनकी पार्टी की स्थिति मजबूत है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के 227 वार्डों में से 67 वार्डों में मनसे को जीत के अंतर से अधिक वोट मिले थे।

क्‍या मनसे के साथ आने से उद्धव ठाकरे को होगा लाभ?

2024 के विधानसभा चुनाव परिणाम पर नजर डाले तो महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को 39 वार्डों में बढ़त मिली थी, जबकि बीजेपी-शिंदे गठबंधन (महायुति) 28 वार्डों में आगे था। ऐसे में, यदि उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे को अपने साथ जोड़ लेते हैं, तो एमवीए की स्थिति न केवल मजबूत होगी, बल्कि बीजेपी गठबंधन से कुछ वार्डों में बाजी पलटने की संभावना भी बन सकती है।

MNS 123 वार्डों को प्रभावित करती है?

मनसे का प्रभाव विशेष रूप से वर्ली, दादर, माहिम, घाटकोपर, विक्रोली और मलाड जैसे मराठी बहुल क्षेत्रों में देखा जाता है। इन इलाकों में मनसे को कई बार एमवीए उम्मीदवारों के वोटों के बराबर या उससे अधिक वोट मिले हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि मनसे 123 वार्डों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

ठाकरे बंधुओं के साथ आने से भाजपा का होगा नुकसान

राज ठाकरे की हिंदुत्ववादी अपील और उद्धव ठाकरे के पारंपरिक मराठी वोटबैंक का एक साथ आना बीजेपी की रणनीति पर दबाव बढ़ाएगा। विशेषज्ञों की माने तो अगर दोनों भाई साथ आते हैं तो मराठी वोटों को प्रभावित करेंगे, जिससे सीधे भाजपा को नुकसान पहुंचेगा।

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