BMC चुनाव: महायुति ने घोषणापत्र में मुंबईकरों से किए वादे, घबराई कांग्रेस ने फडणवीस को बताया सपनों का सौदागर

BMC Elections: मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC) से पहले महायुति' गठबंधन ने वर्ष 2026 के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की उपस्थिति में यह जारी हुआ। गठबंधन का दावा है कि इसे घोषणा पत्र तैयार करने से पहले दो लाख मुंबईवासियों के सुझावों का स्‍टडी किया गया है।

घोषणापत्र में मुंबई को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाने का संकल्प है, जिसके तहत 20 से 35 लाख नए आवास बनाए जाएंगे। धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) के अंतर्गत, धारावी के निवासियों को 350 वर्ग फुट तक के घर वहीं उपलब्ध कराए जाएंगे।

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नागरिकों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए अगले पांच वर्षों तक पानी के शुल्क में कोई वृद्धि नहीं होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में बालासाहेब ठाकरे चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित होगा। लाडली बहनों को बेस्ट (BEST) बसों में 50 प्रतिशत किराये की छूट भी मिलेगी।

कांग्रेस ने घोषणा पत्र को बताया 'जुमलानामा'

महायुति द्वारा घोषणापत्र जारी होते ही कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने ट्वीट में निशाना साधते हुए कहा कि दो महीने "हिंदू-मुस्लिम" मुद्दे उठाने के बाद, प्रचार समाप्त होने से दो दिन पहले महायुति ने अपना "जुमलानामा" जारी किया।

सावंत ने मुख्यमंत्री के "अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड" के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर रिकॉर्ड अच्छा है, तो उन्हें 2017 का भाजपा घोषणापत्र देखना चाहिए।" सावंत ने पूछा कि चार साल तक प्रशासक के माध्यम से सीधे सत्ता में रहते हुए उन्होंने क्या किया। "यह हमारा सीधा प्रश्न है।"

कांग्रेस ने 2017 के अधूरे वादे याद दिलाए

कांग्रेस नेता ने 2017 के कुछ अधूरे वादों की याद दिलाई। उन्होंने पूछा, "2017 के 11 लाख घरों के वादे का क्या हुआ? छत्रपति शिवाजी महाराज और बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारकों का क्या हुआ?" सावंत ने जोड़ा कि भाजपा की कुछ और "हाइलाइट्स" का खुलासा वे जल्द ही करेंगे।

सीएम फडणवीस को बताया सपनों का सौदागार

मुख्यमंत्री को "सपनों का सौदागर" बताते हुए सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि वे हमेशा सुनहरे भविष्य की बात करते हैं, वर्तमान की कड़वी सच्चाइयों पर चुप रहते हैं। मुख्यमंत्री भविष्य की परिकल्पनाएं बताते हैं, पर अब तक किए गए वादों का हिसाब नहीं देते।

ईस्टर्न फ्री-वे को ठाणे से जोड़ने का वादा याद दिलाया

सावंत ने कुछ पुराने वादों का उदाहरण दिया "2017 में ईस्टर्न फ्री-वे को ठाणे से जोड़ने का वादा था। मुंबई को 2017 में बाढ़-मुक्त बनाने का वादा भी आज भी अधूरी है।" उन्होंने कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री ने "तारीख पर तारीख" का डायलॉग शायद खुद ही इजाद किया है, क्योंकि उनकी दी गई तारीखें कभी पूरी नहीं होतीं।

उन्होंने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य पर प्रश्न उठाए, जिसके लिए मुख्यमंत्री 2019 से कई तारीखें दे चुके हैं, पर लक्ष्य से काफी दूर हैं। उन्होंने एलिवेटेड सड़कों की प्रगति पर भी सवाल किए। अंत में, सावंत ने मुख्यमंत्री के 'सबसे अधिक बांग्लादेशी-रोहिंग्या शरणार्थियों को ढूंढ निकालने' के दावे पर आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की।

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