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BMC Elections 2026: BMC चुनाव से पहले महायुति में दरार? अजित पवार-फडणवीस के बीच जुबानी जंग हुई तेज

BMC Elections 2026: महाराष्ट्र की सियासत में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच शासन, फ्रीबीज़ और भ्रष्टाचार को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है।

यह टकराव ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब राज्य में बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) समेत कई अहम नगर निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जिन्हें बेहद हाई-स्टेक माना जा रहा है।

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पीसीएमसी चुनाव बना ताजा विवाद का केंद्र

ताजा टकराव रविवार को सामने आया, जब अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (PCMC) चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए फडणवीस के बयान पर पलटवार किया। पिंपरी में एक प्रेस ब्रीफिंग में, जहां उन्होंने अपनी एनसीपी और शरद पवार गुट (NCP-SP) के संयुक्त चुनावी घोषणापत्र का अनावरण किया, अजित पवार ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को व्यक्तिगत हमला समझना गलत है।

उन्होंने कहा मैं बीजेपी की आलोचना नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ पीसीएमसी में हुई गलतियों की ओर इशारा कर रहा हूं। गलतियां बताना आलोचना नहीं होती। अजित पवार ने यह भी कहा कि नगर निकाय चुनाव करीब 9 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे हैं, इसलिए मुद्दों पर उनकी भाषा स्वाभाविक रूप से तीखी है।

फडणवीस का तंज: 'कुछ नेता चुनाव आते ही बोलने लगते हैं'

इसके एक दिन पहले, देवेंद्र फडणवीस ने एक चुनावी सभा में बिना नाम लिए अजित पवार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि कुछ नेता सिर्फ चुनाव के समय ही अचानक बहुत मुखर हो जाते हैं। इसी बयान पर पलटवार करे हुए अजित पवार ने 2017 से 2022 के बीच पीसीएमसी में बीजेपी के शासन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने 27 चुनावी वादों में से एक भी पूरा नहीं किया।

उन्होंने कहा कि बीजेपी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और कुप्रशासन हावी रहा। उन्होंने खास तौर पर स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के रवेत और भोसरी जैसे इलाकों में चल रहे प्रोजेक्ट्स में कथित अनियमितताओं,और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) से किसे फायदा मिला इसकी जांच की मांग की। अजित पवार ने एक पुल परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि, जिस परियोजना की लागत ₹70 लाख थी, वह बढ़कर ₹7 करोड़ तक पहुंच गई।

BMC चुनावी अखाड़े में वादों की झड़ी

घोषणापत्र जारी करते हुए अजित पवार ने कई बड़े वादे किए, जिनमें शामिल हैं-

  • 500 वर्गफुट तक के मकानों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफी (1 अप्रैल 2026 से),
  • ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान को रद्द करना,
  • 24 घंटे पानी की आपूर्ति,
  • फ्री बस और मेट्रो यात्रा,
  • बेहतर सड़कें और प्रदूषण नियंत्रण,
  • आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं,
  • मॉडल स्कूल और छात्रों को फ्री टैबलेट,
  • स्किल ट्रेनिंग पूरी करने वाली महिलाओं को ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण।

फडणवीस का पलटवार: 'अजित दादा बोलते हैं, मैं काम करता हूं'

अजित पवार के आरोपों पर देवेंद्र फडणवीस ने पुणे से तीखा जवाब दिया। मराठी अभिनेत्री गिरीजा ओक के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा अजित दादा बोलते हैं, मैं काम करता हूं। फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार बयानबाज़ी नहीं, प्रदर्शन में विश्वास रखती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बीजेपी और अजित पवार गुट की एनसीपी ने यह तय किया था कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के चुनाव 'फ्रेंडली फाइट' होंगे और व्यक्तिगत हमले नहीं किए जाएंगे। फडणवीस ने कहा, मैंने संयम रखा है, लेकिन लगता है कि दूसरी तरफ धैर्य खत्म हो गया है

फ्री मेट्रो यात्रा पर सवाल

फडणवीस ने एनसीपी गठबंधन के फ्री मेट्रो यात्रा के वादे को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि मेट्रो किराया किसी सरकार की मर्जी से तय नहीं होता, बल्कि यह एक वैधानिक फेयर फिक्सेशन कमेटी तय करती है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों शामिल होते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसे ही वादे करने हैं तो मैं पुणे की महिलाओं के लिए फ्री हवाई यात्रा का भी ऐलान कर दूं। उनका कहना था कि पुणे के लोग फ्रीबीज़ नहीं, भरोसेमंद और समय पर मिलने वाली सेवाएं चाहते हैं।

इस दौरान फडणवीस ने अजित पवार की पार्टी पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोग चुनाव जीत भी गए, तो उनकी जगह नगर निगम दफ्तर में नहीं, जेल में होगी। इसे पुणे में कथित आपराधिक छवि वाले नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने पर सीधा हमला माना जा रहा है।

हाई-स्टेक सिविक चुनाव

यह जुबानी जंग ऐसे वक्त पर हो रही है, जब महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 28 नगर निगमों के चुनाव होने जा रहे हैं। बता दें कि, 2,869 सीटों पर 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। खासकर बीएमसी चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद पहला बीएमसी चुनाव होगा और देश के सबसे अमीर नगर निकाय की सत्ता तय करेगा।

चुनावी मैदान में उतरते ही महायुति के भीतर तनाव और बयानबाज़ी बढ़ती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की जुबानी जंग और तीखी हो सकती है, जिसका सीधा असर बीएमसी समेत पूरे महाराष्ट्र के सिविक चुनावों पर पड़ेगा।

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