Maharashtra: भाजपा गृह मंत्रालय पर नहीं करेगी समझौता, एकनाथ शिंदे को राजस्व, शहरी विकास और PWD का विकल्प
Maharashtra News: महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल गठन ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी है। भाजपा ने अपने सहयोगी दलों को अहम विभाग सौंपते हुए महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है। हाल ही में मुंबई में हुए शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में महाराष्ट्र के सीएम और डिप्टी सीएम का शपथग्रहण समारोह हुआ।
भाजपा ने गृह मंत्रालय अपने पास रखा
भाजपा ने गृह मंत्रालय को अपने पास रखने का फैसला किया है। जिसे महाराष्ट्र के सुरक्षा तंत्र पर मजबूत पकड़ बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह विभाग शिंदे की शिवसेना को नहीं दिया गया। जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को राजस्व, शहरी विकास और सार्वजनिक कार्य जैसे अहम विभाग आवंटित किए गए। एनसीपी के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त और योजना विभाग सौंपा गया है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गृह मंत्रालय को अपने पास रखने का फैसला राष्ट्रीय समन्वय और पार्टी की केंद्रीय नीति के तहत लिया गया है। फडणवीस के पिछले कार्यकाल में गृह मंत्रालय के प्रभावी प्रबंधन और पुलिस सुधारों ने इस मंत्रालय को उनके नेतृत्व में एक मजबूत उदाहरण बनाया है।
कैबिनेट में 30 से 35 मंत्री हो सकते शामिल
गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा ने अपने सहयोगियों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखा है। महायुति गठबंधन के तहत भाजपा के पास 18-20 मंत्री, शिवसेना के पास 12-14 मंत्री और एनसीपी के पास 9-11 मंत्रियों की हिस्सेदारी तय हो सकती है। कैबिनेट में कुल 30-35 मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
हालांकि भाजपा के पास 132 सीटों की मजबूत जीत के कारण अधिकांश महत्वपूर्ण मंत्रालय रहने की संभावना है। वहीं शिवसेना और एनसीपी को उनके कद के अनुरूप विभाग दिए गए हैं।
पोस्टफोलियो आवंटन में प्राथमिकताएं
भाजपा ने ऊर्जा, जल संसाधन और आदिवासी कल्याण जैसे प्रमुख विभाग अपने पास रखे हैं। दूसरी ओर शिवसेना को शिक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य और अन्य विभाग सौंपे जा सकते हैं। जो राज्य के विकास के प्रमुख क्षेत्रों में पार्टी की भूमिका को परिभाषित करेंगे।
एनसीपी ने वित्त, सहकारिता और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों को बनाए रखने की इच्छा जताई है। हालांकि एनसीपी ने आवास विभाग की भी मांग की है। जिससे गठबंधन सहयोगियों के बीच गहन बातचीत की संभावना बनी हुई है।
शीतकालीन सत्र से पहले विस्तार की तैयारी
नागपुर में शीतकालीन सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां चल रही हैं। शिवसेना गृह मंत्रालय के लिए दबाव बना रही है। जो शिंदे के डिप्टी सीएम बनने के बाद से विवाद का मुद्दा है। बावजूद इसके भाजपा का चुनावी प्रदर्शन और मजबूत स्थिति उसे मुख्यमंत्री पद और गृह मंत्रालय पर दावा मजबूत करने में मदद कर रही है।
राजनीतिक समीकरण और भविष्य का रोडमैप
भाजपा की रणनीति गठबंधन राजनीति के जटिल क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई दे रही है। यह व्यवस्था सत्ता में संतुलन और प्रभावी शासन का मिश्रण पेश करती है। शिवसेना और एनसीपी की इच्छाओं को समायोजित करने के साथ-साथ भाजपा ने अपने राजनीतिक एजेंडे को भी मजबूती से आगे बढ़ाया है।
महाराष्ट्र में आगामी मंत्रिमंडल विस्तार गठबंधन की आंतरिक गतिशीलता और विभागों के आवंटन को दर्शाते हुए राज्य के राजनीतिक भविष्य के लिए मंच तैयार करेगा। भाजपा की रणनीतिक चाल और शिवसेना-एनसीपी की महत्वाकांक्षाएं इस कार्यकाल में राज्य के प्रशासनिक एजेंडे को आकार देंगी।












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