Maharashtra Election: विधानसभा चुनावों में RSS के सामने सरेंडर कर गई BJP! क्यों है फायदे की उम्मीद?

Maharashtra Chunav 2024: लोकसभा चुनावों में बीजेपी को यूपी के बाद सबसे ज्यादा निराशा महाराष्ट्र में ही हुई थी। अगर राज्य में पार्टी का प्रदर्शन खराब नहीं हुआ होता तो तीसरी बार भी केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपने दम पर काफी मजबूत स्थिति में होती। महाराष्ट्र के वोटर विधानसभा में उसी तरह से जनादेश न दे दें, इसके लिए लगता है कि आखिरकार भाजपा को अपने वैचारिक संगठन आरएसएस के सामने नतमस्तक होना ही पड़ा है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने टाइम्स ऑफ इंडिया में दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में जो कुछ कहा है, उससे साफ लगता है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को आरएसएस के सामने सरेंडर करना पड़ गया है।

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'अराजकतावादियों और वोट जिहादियों के खिलाफ संघ से मांगी मदद'
फडणवीस ने कहा है कि 'मैं लगातार स्वयंसेवकों के संपर्क में हूं। याद दखिए, आरएसएस किसी भी राजनीतिक दल के लिए खुलकर काम नहीं करता है। लेकिन, हमने अराजकतावादी ताकतों और वोट जिहादियों के खिलाफ संघ परिवार से मदद मांगी है, जिन्होंने इस साल लोकसभा चुनावों को बाधित करने का काम किया था।'

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आरएसएस से मिल रही है मदद- देवेंद्र फडणवीस
उनका कहना है कि, 'हम कांग्रेस से नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि इस पुरानी पार्टी की मशीनरी में घुसे हुए अराजकतावादी और राष्ट्रविरोधी ताकतों से लड़ रहे हैं; और संघ से जुड़े लोग अराजकतावादी विचारों का मुकाबला करने में हमारी मदद कर रहे हैं।'

लोकसभा चुनावों में नड्डा की टिप्पणी ने बिगाड़ दिया खेल!
इस साल लोकसभा चुनावों के दौरान ही मई में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था, 'शुरुआत में हम उतने सक्षम नहीं होते थे, दायरा बड़ा नहीं था और आरएसएस की जरूरत थी। आज हम बढ़ चुके हैं और हम सक्षम हो चुके हैं। बीजेपी खुद से चलती है।' एक इंटरव्यू में नड्डा की इन टिप्पणियों का यह अर्थ निकला कि भाजपा और संघ के बीच में सबकुछ सही नहीं चल रहा है।

माना जाता है कि इससे जमीनी स्तर पर बीजेपी के लिए आधार तैयार करने वाले संघ के स्वयंसेवकों को भी काफी निराशा हाथ लगी, जिससे मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने वाली अपनी अहम भूमिका में वे ढीले पड़ गए, जिससे पार्टी को यूपी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में काफी नुकसान हो गया।

लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई के लिए संघ से मिल रही है मदद!
फडणवीस ने खुद कबूल किया है कि अब संघ के साथ सबकुछ ठीक-ठाक है। उनकी संघ के पदाधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई है। उन्होंने यह भी कहा है कि 'वोट जिहाद' की वजह से बीजेपी या महायुति गठबंधन को लोकसभा की 10 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा।

अल्पसंख्यकों नहीं, तुष्टिकरण के खिलाफ- बीजेपी नेता
उनके मुताबिक, 'नतीजों के बाद संघ से जुड़े संगठन, विश्व हिंदू परिषद को महसूस हुआ कि अगर वोट जिहाद के माध्यम से चुनाव जीते जाते हैं, तब अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण और बढ़ जाएगा। इसलिए उन्होंने हमारी मदद का फैसला लिया। हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन तुष्टिकरण के खिलाफ हैं।'

बीजेपी को लग रहा है कि संघ और उससे जुड़े संगठनों की सक्रिय सहायता से उसे विधानसभा चुनावों में 'वोट जिहाद' के खिलाफ अपने पक्ष में वोटों के 'ध्रुवीकरण' में सहायता मिल सकती है।

'भारत जोड़ो यात्रा में 180 विध्वंसकारी संगठन'
उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे पर भी गंभीर हमले किए हैं। उनके मुताबिक, 'राहुल गांधी अब कांग्रेसी नहीं रहे। कम्युनिस्ट से वह कट्टर-वामपंथी विचारधारा वाले बन चुके हैं। वह लाल कवर वाली संविधान की कॉपी दिखाते हैं, पारंपरिक ब्लू वाली नहीं। वे अराजकतावादियों और अर्बन नक्सलियों से घिर चुके हैं, वही उनकी नीतियां तय करते हैं और कहानियां गढ़ते हैं....'

उन्होंने दावा किया है, '(राहुल गांधी की) भारत जोड़ो यात्रा में भाग लेने वाले 180 संगठन विध्वंसकारी तत्व थे...एक हाथ में राहुल संविधान पकड़ते हैं और अपने कर्मों से अराजकता फैलाते हैं। संविधान व्यवस्था है, अराजकता अव्यवस्था है और इसलिए उनकी कॉपी लाल रंग की होती है।...वे लोकतंत्र की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन संविधान पर बैठक में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) को बाहर रखते हैं।'

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