अगर सलमान खान था टारगेट तो बाबा सिद्दीकी को क्यों बनाया निशाना? लॉरेंस गैंग से जुड़ा बड़ा खुलासा

Baba Siddique: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में हर रोज नए-नए खुलासे हो रहा है। इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्त में आए लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने बड़ा खुलासा किया है। जी हां..लॉरेंस गैंग की मानें को बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश 14 अप्रैल को सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग की घटना के 10 दिन बाद रची गई थी।

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर दो बाइक सवार हमलावरों ने फायरिंग की थी, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने खुलासा किया कि फायरिंग की घटना के बाद लॉरेंस गैंग ने सलमान के करीबियों को निशाना बनाने की कोशिश की।

Baba Siddique

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि बाबा सिद्दीकी की हत्या में लॉरेंस गैंग के सदस्यों ने एक-दूसरे से बात करने के लिए डब्बा कॉलिंग (इल्लीगल टेलीफोन एक्सचेंज सिस्टम) का इस्तेमाल किया था। "डब्बा कॉलिंग" शब्द संभवतः धमकी देने के लिए सेकेंडरी फोन (डब्बा) के इस्तेमाल से लिया गया है।

इसी डब्बा कॉलिंग का इस्तेमाल करके अनमोल बिश्नोई ने शूटर शिव कुमार गौतम, जीशान अख्तर, शुभम लोनकर और सुजीत सिंह से कई बार बातचीत की थी। डब्बा कॉलिंग का इस्तेमाल बिश्नोई गैंग इसलिए करता है ताकि जांच एजेंसियां उनको ट्रेस न कर सकें। सूत्रों के मुताबिक, डब्बा कॉलिंग के लिए बिश्नोई गैंग ने खुद का टेली एक्सचेंज स्थापित कर लिया।

इसके जरिए चार-पांच लोग एक साथ जुड़ सकते हैं। बता दें, बाबा सिद्दीकी को 12 अक्टूबर को उनके बेटे और विधायक जीशान सिद्दीकी के बांद्रा स्थित कार्यालय के पास गोली मार दी गई थी। क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने शिव कुमार गौतम को मुख्य शूटर के रूप में पहचाना, जो हमले के बाद 20 मिनट तक घटनास्थल पर रहा।

भीड़ में शामिल होने से पहले उसने अपनी पिस्तौल, शर्ट और आधार कार्ड से भरा बैग फेंक दिया था। अफरा-तफरी और पुलिस की मौजूदगी को देखते हुए, उसने पकड़े जाने से बचने के लिए कई और भी कदम उठाए थे। बाद में, गौतम कथित तौर पर एक ऑटोरिक्शा में सवार होकर सिद्दीकी की मौत की पुष्टि करने के लिए लीलावती अस्पताल की ओर चल पड़ा।

रात 10:47 बजे वह कुर्ला रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुआ और संभावित सबूतों को मिटाने के लिए रास्ते में अपना मोबाइल फोन छोड़ दिया। अधिकारी अभी भी डिवाइस को बरामद करने के लिए काम कर रहे हैं। जांच से पता चला कि शुभम लोनकर ने जुलाई में बिलासपुर के पास छत्तीसगढ़ के जंगलों में हथियारों की ट्रेनिंग ली थी। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को संदेह है कि माओवादियों ने इस AK-47 ट्रेनिंग में मदद की थी, हालांकि इस लिंक की अभी भी जांच की जा रही है।

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