All Party Delegation पर भड़के संजय राउत 'ये तो बारात है', मोदी सरकार पर लगाया सियासत करने का आरोप
All Party Delegation: भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव और "ऑपरेशन सिंदूर" के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अपना पक्ष रखने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सांसदों की सात प्रतिनिधिमंडलों को विदेश भेजने का फैसला लिया है।
केंद्र के इस अभियान को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पहल की तुलना "बारात" से की और आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर भी सियासत कर रही है।

रविवार, 18 मई को मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा, "इस बारात को भेजने की क्या जरूरत थी? प्रधानमंत्री कमजोर हैं, उन्हें इतनी जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए थी। डिप्टी सीएम का बेटा (श्रीकांत शिंदे) विदेशों में जाकर भारत का क्या प्रतिनिधित्व करेगा?" उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस पूरी कवायद को उन्होंने "राजनीतिक नौटंकी" बना दिया है। राउत ने विपक्षी INDIA गठबंधन से इस "बारात" का बहिष्कार करने की भी अपील की।
All Party Delegation: सरकार की रणनीति और प्रतिनिधिमंडल की संरचना
केंद्र सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया कि सात अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल, जिनमें विभिन्न दलों के 51 सांसद, पूर्व मंत्री और नेता शामिल हैं, भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति और "ऑपरेशन सिंदूर" को लेकर वैश्विक स्तर पर भारत का रुख स्पष्ट करने के लिए विश्व के प्रमुख देशों का दौरा करेंगे।
इन प्रतिनिधिमंडलों में शामिल कुछ प्रमुख नामों में कांग्रेस नेता शशि थरूर, AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, एनसीपी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले, डीएमके की कनिमोझी जैसे विपक्षी नेता भी शामिल हैं। साथ ही इनमें बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता भी हैं।
विशेष बात यह है कि 51 सदस्यों में से 31 नेता सत्तारूढ़ एनडीए से आते हैं, जबकि 20 नेता गैर-एनडीए दलों से हैं। हर प्रतिनिधिमंडल में कम से कम एक मुस्लिम चेहरा या तो राजनयिक के रूप में या नेता के रूप में शामिल किया गया है।
All Party Delegation: संजय राउत की सहयोगी प्रियंका चतुर्वेदी भी शामिल
दिलचस्प बात यह है कि शिवसेना (यूबीटी) की ही नेता प्रियंका चतुर्वेदी भी एक प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद के नेतृत्व में यूरोप का दौरा करेगा। इस दल में दग्गुबाती पुरंदेश्वरी (भाजपा), कांग्रेस के अमर सिंह, भाजपा के समिक भट्टाचार्य, एमजे अकबर, और पंकज सरन जैसे नेता भी शामिल हैं। यह टीम ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क का दौरा करेगी।
All Party Delegation: कांग्रेस की नाराजगी और राजनीतिक विवाद
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान जारी कर कहा कि यह पूरी कवायद मोदी सरकार की "पूर्ण असंवेदनशीलता" और "राष्ट्रीय मुद्दों पर सस्ती राजनीति" का परिचायक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कांग्रेस द्वारा सुझाए गए चार नेताओं में से केवल आनंद शर्मा को शामिल किया, जबकि शशि थरूर को सरकार ने स्वतंत्र रूप से चुना।
रमेश ने कहा, "यह दिखाता है कि सरकार विपक्ष के साथ सहयोग करने में गंभीर नहीं है, और वह इस पूरे अभियान को भी राजनीतिक रंग देने से नहीं चूक रही है।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, एमजे अकबर, खुर्शीद अहमद, एसएस आहलूवालिया, गुलाम नबी आज़ाद और वी. मुरलीधरन जैसे कई अनुभवी नेता भी इन प्रतिनिधिमंडलों में शामिल किए गए हैं, हालांकि वे इस समय संसद सदस्य नहीं हैं।
All Party Delegation पर देश में राजनीतिक माहौल गर्म
इस पूरा घटनाक्रम राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बनते जा रहे हैं। एक ओर सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के खिलाफ आतंकवाद पर एकजुट करने की रणनीति मान रही है, वहीं विपक्षी नेता इसे सरकार की राजनीतिक छवि चमकाने की कोशिश करार दे रहे हैं।
जहां कुछ नेता इस विदेश यात्रा को भारत की "कूटनीतिक ताकत" के प्रदर्शन का माध्यम मानते हैं, वहीं संजय राउत जैसे नेता इसे "फिजूलखर्ची और दिखावा" कह रहे हैं। भारत-पाक तनाव, ऑपरेशन सिंदूर और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर भारत में ही राजनीतिक बंटवारा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन विदेशी दौरों का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है और क्या सरकार इस पहल के जरिए अपने कूटनीतिक उद्देश्यों को हासिल कर पाती है या यह विपक्ष के आरोपों की तरह एक "राजनीतिक शो" बनकर रह जाती है।












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