NCP Vs NCP: शरद पवार से अलग होते ही अजीत पवार ने पार्टी के नाम और चिन्ह पर फिर से ठोंका दावा
अजीत पवार ने शरद पवार से अलग होते ही पार्टी के नाम और चिन्ह पर अपना दावा ठोका है। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग में याचिका दायर की है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजीत पवार गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा करने के लिए शुक्रवार को एक बार फिर चुनाव आयोग से संपर्क किया। एनसीपी के 8 अन्य विधायकों के साथ पार्टी तोड़ने वाले अजीत पवार ने पहली बार 30 जून को पार्टी चुनाव चिह्न पर दावा करने के लिए चुनाव आयोग में याचिका दायर की थी। 30 जून को अजीत ने पोल पैनल को यह भी सूचित किया था कि उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है।
अपने दावे के समर्थन में उन्होंने 5 जुलाई को पार्टी के 40 विधायकों के हलफनामे चुनाव आयोग को सौंपे। ये 2 जुलाई को उनके विद्रोह के सामने आने से दो दिन पहले था जब वो और अन्य एनसीपी विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में शामिल हुए थे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अलग हो चुके भतीजे की दायर याचिका का विवरण मांगा। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल जो विद्रोही गुट के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने दावा किया कि शरद पवार द्वारा बुलाई गई बैठक को कानूनी मंजूरी नहीं थी और पार्टी में बहुमत अजीत पवार का समर्थन कर रहा था। प्रफुल्ल पटेल ने दोहराया कि अजीत पवार को 30 जून को विधायक दल और संगठनात्मक विंग की सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
30 जून को देवगिरी (मुंबई में अजीत पवार का आधिकारिक निवास) पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जहां विधायक पदाधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने सर्वसम्मति से अजित पवार को अपना नेता चुना।
प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि नियुक्ति के तुरंत बाद अजीत पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को बताया कि प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा, अजित पवार को खुद राकांपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया।पटेल ने आगे बताया कि कौन निर्धारित करेगा (कौन सा) (असली) राजनीतिक दल है? ये अधिकार भारत के चुनाव आयोग के पास में है, जबकि विधायकों की कार्रवाई स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में है।
शरद पवार ने गुरुवार को पार्टी में अपने भतीजे के दावे को खारिज कर दिया था और कहा कि किसी को भी उनके बयान को महत्व नहीं देना चाहिए। शरद पवार गुट ने 3 जुलाई को चुनाव आयोग के समक्ष एक याचिका दायर की थी जिसमें चुनाव आयोग से पार्टी के प्रतीक पर कोई भी निर्णय लेने से पहले उन्हें सुनने का आग्रह किया गया था। अनुभवी राजनेता ने वापस लड़ने और पार्टी को एक बार फिर से खड़ा करने की कसम खाई है।












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