'वत्सला' पन्ना टाइगर रिजर्व में दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी, गिनीज बुक में दर्ज होगा नाम
'Vatsala' the oldest elephant in Panna पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) में दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी 'वत्सला' मौजूद है। उसके जन्म का सही-सही रिकॉर्ड न होने से अब तक उसका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाया। अब उसके दांतों की कार्बन डेटिंग जांच के माध्यम से उम्र का पता लगाया जाएगा। उसके दांतों का सैंपल हैदराबाद फॉरेंसिंक लैब भेजे जा रहे हैं।

पन्ना टाइगर रिजर्व में कभी पर्यटकों को टाइगर सफारी कराने वाली वत्सला अब रिटायर हो चुकी है। उसकी परिवार के बुजुर्ग की तरह ही देखभाल की जा रही है। 'वत्सला' की उम्र करीब 102 साल है, जो दुनिया में एक रिकॉर्ड है। उसे दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी होने का गौरव प्राप्त है, हालांकि इसके लिखित दस्तावेज नहीं है। उसका जन्म केरल में हुआ था। वहां से उसे करीब 50 साल की उम्र में मप्र के होशंगाबाद और फिर पन्ना लाया गया था। अब उसका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का दाव पीटीआर प्रबंधन करने जा रहा है। इसके लिए उसकी सही उम्र की जानकारी लगाना है। वैज्ञानिक तरीके से उसकी उम्र का पता करने के लिए उसके दाढ़ का सैंपल हैदराबाद की फॉरेसिक लैब भेजा जा रहा ह।
फील्ड डायरेक्टर बोले: दाढ़ का सैंपल हैदराबाद भेज रहे हैं
पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डारेक्टर बृजेन्द्र झा ने स्थानीय मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हमारे यहां 'वत्सला' नाम की सबसे बुजुर्ग हथिनी मौजूद है। उसका नाम गिनीज बुक में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसकी उम्र का सही-सही पता लगाने दाढ़ का सैंपल हैदराबाद भेज रहे हैं। वत्सला जब केरल से लाई गई थी, उसकी उम्र करीब 50 साल के आसपास थी, जबकि उसे मप्र में ही 50 से अधिक साल हो गए हैं। इस लिहाज से उसकी उम्र 102 साल बताई जाती है। लेकिन उसके जन्म का कोई पुख्ता दस्तावेज न होने से जांच करा रहे हैं। विभाग ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी है।
वत्सला के साथ उसी समय महावत रमजान खान व चारा कटर मनीराम भी आए थे। पन्ना टाइगर रिजर्व मौजूद हथिनी वत्सला की उम्र 102 से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। कई बार इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने की मांग भी की गई है। फिलहाल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सबसे ज्यादा उम्र के हाथी के रूप में सिन वांग का नाम दर्ज है। 86 वर्ष की उम्र में 26 फरवरी 2020 को उसकी मौत हो गई थी।
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केरल के नीलाम्बुर फॉरेस्ट से लाई गइ थी
वत्सला का जन्म केरल के नीलाम्बुर फॉरेस्ट डिवीजन के जंगलों में हुआ था। वहीं पर वह पली-बढ़ी थी। उसे साल 1971-72 में केरल से होशंगाबाद के बोरी वन्य प्राणी अभयारण्य लाई गई थी। उस समय उसके साथ महावत रमजान व एक चारा काटने वाला मनीराम भी आया था। ये लोग उसकी उम्र 50 साल बताते थे। बाद में 1993 में वत्सला को पन्ना टाइगर रिजर्व लाया गया था। यहां टाइगर सफारी के लिए वत्सला का उपयोग किया जाता था। उम्रदराज होने व बीच में वत्सला पर एक मदमस्त नर हाथी द्वारा हमला कर गंभीर घायल करने के बाद उसे रिटायर कर दिया गया था। जब से वत्सला आराम की जिंदगी जी रही है। हालांकि उसका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। हल्का और संतुलित व आराम से पचने वाला भोजन दिया जाता है।












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