MP News: FIR दर्ज, जनता नाराज व SC की फटकार, फिर भी मंत्री विजय शाह क्यों नहीं छोड़ना चाहते कुर्सी, जानिए
मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक कैबिनेट मंत्री के इस्तीफे की मांग केवल विपक्ष नहीं, बल्कि जनता, महिला संगठन, पूर्व सैनिक और हाईकोर्ट भी कर रहा है - पर मंत्री हैं कि झुकने को तैयार नहीं।आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह ने भारतीय सेना की बहादुर अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपमानजनक बयान देकर देश भर में रोष भड़का दिया है।
FIR दर्ज हो चुकी है, हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है, लेकिन शाह का जवाब है - "इस्तीफा तभी दूंगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से बात हो जाएगी।" यह मामला अब केवल बयानबाजी का नहीं, बल्कि सत्ता, सियासी जिद और संवैधानिक मर्यादाओं के टकराव का बन चुका है।

विवाद की जड़, कर्नल सोफिया पर बयान
विजय शाह का ताजा विवाद 12 मई 2025 को महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम से शुरू हुआ। ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए शाह ने भारतीय सेना की वरिष्ठ महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को "आतंकवादियों की बहन" और "पाकिस्तानियों की बहन" कहकर अपमानित किया। यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कर्नल सोफिया, जिन्होंने 2016 में फोर्स 18 जैसे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारत का नेतृत्व किया और ऑपरेशन सिंदूर में वीरता दिखाई, देश की शान हैं। उनके परिवार की तीन पीढ़ियां सेना की सेवा में रही हैं। शाह का यह बयान न केवल सोफिया, बल्कि सेना और राष्ट्रीय गौरव के लिए अपमानजनक माना गया।
बयान के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। कांग्रेस ने शाह की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की, जबकि सेना के पूर्व अधिकारी और महिला संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज किया।
Minister Vijay Shah: हाईकोर्ट का हथौड़ा, FIR का आदेश
जबलपुर हाईकोर्ट ने 13 मई की देर रात इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकल पीठ ने शाह के बयान को "सेना का अपमान, महिला गरिमा के खिलाफ, और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा" करार दिया। कोर्ट ने मध्यप्रदेश पुलिस को 4 घंटे के भीतर शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। FIR में निम्नलिखित धाराएं शामिल की गईं।
- IPC धारा 499/500: मानहानि।
- IPC धारा 509: महिला की गरिमा का अपमान।
- IPC धारा 153A: धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाना।
- BNS धारा 152, 192: राष्ट्रीय एकता और सम्मान के खिलाफ अपराध।
इंदौर के मानपुर थाने में 14 मई की रात FIR दर्ज हुई। विजय शाह पर मानपुर थाने में BNS की सख्त धाराओं में FIR। पुलिस ने शाह से पूछताछ शुरू कर दी है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी को लेकर अभी असमंजस है। कोर्ट ने पुलिस से अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट मांग ली है।
इस्तीफा इनकार, शाह की जिद
FIR और विपक्ष के दबाव के बावजूद विजय शाह ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मुलाकात में कहा, "मैंने माफी मांग ली है। इस्तीफे का फैसला पीएम नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के बाद ही करूंगा।" शाह ने यह भी तर्क दिया कि उनका बयान "जोश में गलती" था, और इसे राजद्रोह या सेना के अपमान से जोड़ना "विपक्ष की साजिश" है।
शाह ने भोपाल की सियासी हलचल से दूरी बनाते हुए अपनी विधानसभा हरसूद में डेरा डाल लिया है। हरसूद, जो अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट है, शाह का गढ़ माना जाता है। वहां उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं, जिसे सियासी ताकत का प्रदर्शन माना जा रहा है।
शाह क्यों नहीं झुक रहे?
'बाहुबली' छवि और हरसूद का गढ़: विजय शाह हरसूद से लगातार आठ बार विधायक चुने गए हैं। आदिवासी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ और क्षेत्र में विकास कार्यों ने उन्हें 'बाहुबली' की छवि दी है। शाह मानते हैं कि इस्तीफा देने से उनकी इस छवि को धक्का लगेगा। हरसूद में डेरा डालकर वह अपने समर्थकों को यह संदेश दे रहे हैं कि वह किसी दबाव में नहीं झुकेंगे।
Minister Vijay Shah: बीजेपी हाईकमान का समर्थन
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अभी शाह के साथ खड़ा है। पीएम मोदी और अमित शाह से उनकी नजदीकी उनकी ताकत है। शाह ने कई बार केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपनी सियासी वफादारी का हवाला दिया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, "FIR के बाद भी BJP अपने मंत्री के साथ खड़ी है।" शाह को भरोसा है कि केंद्रीय नेतृत्व उनकी बर्खास्तगी की मंजूरी नहीं देगा।
कानूनी रणनीति: शाह ने साफ कर दिया है कि वह कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। उनके वकील सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी कर रहे हैं, जहां वे तर्क देंगे कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया। शाह का मानना है कि इस्तीफा देना उनकी कमजोरी दिखाएगा, जबकि कानूनी लड़ाई उनकी सियासी ताकत को बरकरार रखेगी।
विपक्ष का दबाव 'रिवर्स' प्रभाव: कांग्रेस की आक्रामक मांग और प्रदर्शन शाह के लिए उल्टा पड़ रहे हैं। शाह इसे "विपक्ष की साजिश" बताकर अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। हरसूद में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, "कांग्रेस मुझे बदनाम करना चाहती है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं।" यह रणनीति उनके समर्थकों में जोश भर रही है।
पिछले विवादों से सबक
शाह का विवादों से पुराना नाता है। 2013 में साधना सिंह पर टिप्पणी, 2023 में झाबुआ में छात्राओं पर बयान, और 2024 में "चिकन पार्टी" टिप्पणी ने उन्हें सुर्खियों में रखा। हर बार वह माफी मांगकर या सियासी रसूख से बच निकले। इस बार भी वह उसी रणनीति पर चल रहे हैं।
बीजेपी की मजबूरी
बीजेपी के लिए शाह का मामला दोधारी तलवार है। एक तरफ, शाह की बर्खास्तगी से सेना और जनता का गुस्सा शांत हो सकता है, लेकिन इससे पार्टी की आदिवासी वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। हरसूद और खंडवा क्षेत्र में शाह की मजबूत पकड़ बीजेपी के लिए अहम है। दूसरी तरफ, शाह को बचाने से पार्टी की छवि को नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देर रात भोपाल में हाईकमान के साथ बैठक की, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं निकला। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी शाह को कुछ समय तक "लो प्रोफाइल" रखने की सलाह दे सकती है, ताकि विवाद ठंडा हो।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "BJP की चुप्पी उनकी सहमति है। शाह को बर्खास्त करें, वरना जनता सड़कों पर उतरेगी।" दिग्विजय सिंह ने X पर लिखा, "जब शाह ने पूर्व CM के परिवार पर टिप्पणी की, तो BJP ने इस्तीफा ले लिया। लेकिन सेना की बेटी पर टिप्पणी पर चुप्पी?
हरसूद में शाह का डेरा, सियासी शक्ति प्रदर्शन
शाह का हरसूद में डेरा डालना सियासी मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। वहां वह कार्यकर्ताओं और आदिवासी नेताओं से मिल रहे हैं, स्थानीय मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं, और विकास योजनाओं का जायजा ले रहे हैं। यह कदम न केवल उनके समर्थकों में जोश भर रहा है, बल्कि बीजेपी हाईकमान को यह संदेश भी दे रहा है कि शाह की क्षेत्रीय ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय बीजेपी नेता रमेश ठाकुर ने कहा, "विजय भैया हमारे लिए भगवान हैं। उनका बयान गलत समझा गया। हम उनके साथ हैं।" यह समर्थन शाह की जिद को और बल दे रहा है।
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