कौन है मध्य प्रदेश की बेटी शिवानी पवार, जिसने विनेश फोगाट को लेकर किए चौंकाने वाले खुलासे
ओलंपिक में 100 ग्राम अधिक वजन के कारण भारत की पहलवान विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित कर दिया गया। हालांकि विनेश के दर्द को सभी समझते हैं, लेकिन शायद आपको यह नहीं पता कि उनके साथ असली मुकाबला मध्य प्रदेश की महिला पहलवान शिवानी पंवार से था।
वही 50 किलोग्राम वजन वर्ग जिसमें विनेश ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, उसी वर्ग में शिवानी पंवार भी जा सकती थीं। तो फिर शिवानी के साथ ऐसा क्या हुआ कि वे पेरिस ओलंपिक का हिस्सा नहीं बन सकीं? आइए जानते हैं इस अन्याय की पूरी कहानी।

शिवानी का आरोप है कि डेढ़ महीने पहले पटियाला में हुए ट्रायल में नियमों का उल्लंघन करके विनेश को ओलंपिक के लिए भेजा गया। शिवानी ने वन इंडिया को बताया कि विनेश का ट्रायल 50 किलो और 53 किलो दोनों वेट कैटेगरी में हुआ, जबकि नियम के अनुसार ट्रायल केवल एक ही कैटेगरी में होना चाहिए। आईओए (इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन) ने भी स्वीकार किया है कि विनेश के लिए नियम तोड़े गए, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शिवानी ने कहा, "53 किलो कैटेगरी में विनेश और मेरा ट्रायल हुआ, लेकिन 50 किलो कैटेगरी में मुझे मौका नहीं मिला। विनेश को अकेले ही इस कैटेगरी में चयनित कर दिया गया।" फोगाट 53 किलो और शिवानी 50 किलो की कैटेगरी की खिलाड़ी हैं।

तत्या टोपे के कुश्ती कोच एमके वर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों के आर्टिकल-7 के अनुसार, खिलाड़ियों को अपनी वजन कैटेगरी में ही ट्रायल देना होता है। शिवानी ने अपने सिलेक्शन न होने पर कहा कि "यह एक बहुत ही डिप्रेशन वाला समय था। मैं पिछले कई सालों से ओलंपिक के लिए अपने आपको तैयार कर रही थी। नियम के अनुसार, जो खिलाड़ी क्वालिफाई करता है, उसे सेकंड रनर अप के साथ ट्रायल देना होता है। मैं सेकंड रनर अप थी।
शिवानी ने बताया कि 53 किलो वेट कैटेगरी में उनका ट्रायल विनेश के साथ हुआ, लेकिन 50 किलो वेट कैटेगरी में विनेश का ट्रायल अकेले लिया गया। मुझे कहा गया कि बाद में ट्रायल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नियम के मुताबिक ट्रायल होना चाहिए था और फेडरेशन और आईओए के आदेश भी यही थे। अचानक सब कुछ बदल गया। क्यों और कैसे हुआ, इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।"
कौन है शिवानी पंवार
मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र छिंदवाड़ा के गांव उमरेठ की निवासी शिवानी पंवार एक राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन हैं। उनकी उपलब्धियां इतनी उल्लेखनीय हैं कि पिछले तीन वर्षों में देश की कोई अन्य महिला पहलवान उन्हें हराने में सफल नहीं रही। एशियन चैंपियनशिप में शिवानी ने तीन बार की विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता पहलवान को हराया था और भारत के लिए पदक भी जीते। इसके बावजूद, उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वे ओलंपिक में जगह नहीं बना सकीं।












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