MPPSC 2023: प्री एग्जाम में आखिर ऐसे कौन से सवाल पूछ लिए? जिससे प्रतिभागियों का चकरा गया दिमाग
MPPSC 2023: मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के हाल ही में हुए प्री एग्जाम के कुछ 'सवाल', सवालों के घेरे में हैं। एग्जाम में सम्मिलित हुए कुछ प्रतिभागियों ने आपत्ति जताई हैं। एग्जाम के बाद सवालों के उत्तर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई।
दरअसल परीक्षा में पूछे गए दो सवालों को लेकर डाउट है कि वह परीक्षा के लिहाज से सही थे या नहीं? स्टूडेंट्स ने जहां कोचिंग की उनके मेंटर तक का माथा ठनक गया हैं। फैसला ही नहीं ले पा रहे कि सवाल पूरी तरह से सही हैं भी या नहीं।

इस प्रश्नों पर चकराया दिमाग
पीएससी एग्जाम की तैयारी कराने वाले प्रवीण मिश्रा कहते है कि पीएससी के प्री एग्जाम में पूछे गए राज्य के नीति निर्देशक तत्वों संबंधी सवाल पर संशय की स्थिति है। सवाल पूछा गया है कि राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की व्याख्या भारत के संविधान के पार्ट 4-क में की गई है। यह व्यवस्था किस देश से ली गई। विकल्पों में ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका और आयरलैंड शामिल हैं। प्रवीण का कहना है कि राज्य के नीति निर्देशक तत्व तो आयरलैंड से लिए गए थे लेकिन संविधान का पार्ट 4-क रशिया से लिया गया था। इसलिए इस सवाल में संदेह की स्थिति है।
इसी तरह अन्य एक संस्थान में प्रतिभागियों को पीएससी की तैयारी कराने वाली मोनाली कुंगानी का कहना है कि उन्हें दो सवालों में संदेह है। पहला सवाल तो पटल विरुपण प्रक्रिया संबंधी है। जिसमें संदेह की स्थिति है। वहीं दूसरा सवाल भारत सरकार के राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम से संबंधित है जिस पर संदेह है। मेंटर्स का मानना है कि सवाल के अनुसार दो विकल्प सही पाए जा रहे हैं।
Answer Key का इंतजार
इन संशयों के बीच सभी प्रतिभागी अब एमपीपीएससी की ओर से जारी होने वाली आंसरकी का इंतजार कर रहे हैं। जिससे यह पता लगेगा कि आयोग इन सवालों का सही जवाब किसे मानता है। माना जा रहा है कि जल्द ही आंसर की जारी कर दी जाएगी।
गलत सवाल को लेकर पहले भी उठे सवाल
आपको बता दें कि एमपीपीएससी द्वारा परीक्षा में गलत सवाल पूछे जाना कोई नई बात नहीं है। बीते कई सालों में पीएससी के प्री एग्जाम में पेपर सेटर की योग्यता पर सवाल भी खड़े हो चुके हैं। हालांकि जब तक आयोग की आंसर की जारी नहीं हो जाती तब तक इस संबंध में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन परीक्षा में बैठे प्रतिभागी और कोचिंग संस्थानों के मेंटर्स साफ इशारा कर रहे हैं कि पेपर देखने के बाद पूरी संभावना है कि कुछ सवाल डिलीट किए जा सकते हैं।












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