MP News: अक्षय तृतीया पर बजी शहनाइयां, एक ही दिन में हजारों जोड़ों ने रचाई शादी, CM मोहन यादव ने दिया आशीर्वाद
MP News: मध्य प्रदेश में अक्षय तृतीया का पर्व इस बार हजारों परिवारों के लिए जीवनभर यादगार बन गया। शनिवार, 27 अप्रैल को प्रदेशभर में सामूहिक विवाह सम्मेलनों की शृंखला चली, जिसमें हजारों जोड़े विवाह बंधन में बंधे। यह दृश्य न केवल भावनात्मक रूप से मार्मिक था, बल्कि सामाजिक एकता, सादगी और सहयोग की मिसाल भी पेश करता नजर आया।
शाजापुर के कालापीपल में रिकॉर्ड: 1247 जोड़ों ने रचाई शादी
प्रदेश का सबसे बड़ा आयोजन शाजापुर जिले के कालापीपल में हुआ, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उपस्थित होकर 1247 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने पहुंचे। उनके साथ प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी मौजूद थे, जिन्होंने संस्कार और धर्म पर आधारित प्रेरणादायक बातें साझा करते हुए नवदंपतियों को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "अक्षय तृतीया जैसे पावन पर्व पर ये विवाह समारोह सामाजिक सौहार्द का प्रतीक हैं। इससे समाज में समरसता और सहयोग की भावना बढ़ती है।" समारोह के दौरान दूल्हा-दुल्हन को उपहार भी दिए गए और भव्य मंडपों में शादी की रस्में पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न कराई गईं।
छिंदवाड़ा में 928, धार में 2100 शादियां
सामूहिक विवाह आयोजनों की यह शृंखला पूरे प्रदेश में फैली रही। छिंदवाड़ा में 928 जोड़ों ने जीवन भर के साथ के लिए सात फेरे लिए। वहां भी सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन ने मिलकर शानदार इंतजाम किए थे।
धार जिले में जिला स्तरीय सम्मेलन में 2100 से अधिक जोड़ों ने शादी की। यह आयोजन न केवल संख्या के लिहाज से बड़ा था, बल्कि भावनात्मक रूप से भी प्रभावशाली रहा। यहां दिव्यांग जोड़े व्हीलचेयर पर बैठकर विवाह मंडप तक पहुंचे और सभी रस्मों में भाग लिया। यह दृश्य लोगों की आंखें नम कर गया और समानता व समावेशिता का अद्भुत उदाहरण बन गया।
ग्वालियर में गर्मी भी नहीं रोक सकी शहनाइयों की गूंज
ग्वालियर में तेज धूप और 40 डिग्री तापमान के बावजूद विवाह समारोह पूरे उत्साह से संपन्न हुए। यहां चार अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक विवाह हुए, जिनमें कुल 172 जोड़ों ने शादी की। गर्मी की तपिश से बचने के लिए दूल्हे छाता लेकर बारात में पहुंचे, वहीं दुल्हनें पारंपरिक परिधान में सजी हुई थीं। यह शादी समारोह अद्भुत जीवटता और संस्कृति की झलक लिए हुए था।
MP News: भोपाल में 151 जोड़ों को मिला श्रीमद्भागवत उपहार
राजधानी भोपाल भी इस आयोजन की साक्षी बनी। यहां 151 जोड़ों का विवाह समारोह संपन्न हुआ। खास बात यह रही कि प्रत्येक जोड़े को विवाह उपहार के रूप में 'श्रीमद्भागवत गीता' भेंट की गई। आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य नवविवाहितों को जीवन मूल्यों और आध्यात्मिकता से जोड़ना है।
MP News: उज्जैन और रतलाम में भी गूंजीं शहनाइयां
सीएम मोहन यादव ने इस दिन की शुरुआत उज्जैन के दाऊदखेड़ी में सामूहिक विवाह कार्यक्रम से की थी। यहां उन्होंने 70 नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर विवाह की रस्मों में भाग लिया और उपहार भी वितरित किए।
वहीं रतलाम में भी कई स्थानों पर सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित हुए। यहां बैंड-बाजों की धुन पर बारात निकाली गई और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न हुए। परिजनों और रिश्तेदारों की उपस्थिति में इन शादियों में कोई कमी नहीं रही।
सामूहिक विवाह, आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत पहल
इन आयोजनों के जरिए न केवल जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल मिला, बल्कि सामाजिक समरसता का संदेश भी गया। बिना दिखावे, खर्च और कर्ज के, समाज के सहयोग से हुए ये विवाह समारोह उन परिवारों के लिए राहत बनकर आए, जिनके लिए विवाह करना आर्थिक रूप से बोझ बन चुका था।
राज्य सरकार और सामाजिक संगठनों की यह संयुक्त पहल प्रदेशभर में प्रशंसा का विषय बनी हुई है। सीएम मोहन यादव ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में इस प्रकार के आयोजनों को और मजबूती से बढ़ाया जाएगा।
नवविवाहितों के लिए नई शुरुआत
अक्षय तृतीया को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी इस दिन बिना पंचांग देखे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन विवाह का आयोजन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सुखमय और समृद्ध भविष्य का संकेत देता है।
इन हजारों जोड़ों की यह नई शुरुआत केवल व्यक्तिगत जीवन की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और परस्पर सहयोग की भी शुरुआत है। इन विवाहों में कोई जाति, वर्ग या भेदभाव नहीं देखा गया-सिर्फ प्रेम, परंपरा और सहभागिता थी।












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