MP Police News: रीवा पुलिस की वर्दी में वायरल रील्स से मचा बवाल, महिला पुलिसकर्मियों पर जांच के आदेश
MP Police Viral: रीवा जिले में पुलिस की वर्दी एक बार फिर विवादों में है। इस बार वजह है महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान बनाए गए सोशल मीडिया रील्स, जो वायरल होते ही सुर्खियों में आ गए।
वर्दी में फिल्मी और भोजपुरी गानों पर लिप-सिंक और डांस करतीं महिला पुलिसकर्मियों के वीडियो ने पुलिस की पेशेवर छवि पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विवेक सिंह ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं।

वर्दी में 'वायरल' पुलिस, थाना, कोर्ट और पुलिस वाहन में शूट हुई रील्स
रीवा की सिटी कोतवाली में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक संध्या वर्मा और सगरा थाना प्रभारी अंकिता मिश्रा के इंस्टाग्राम अकाउंट से ऐसी रील्स पोस्ट की गईं, जिनमें वे वर्दी में भोजपुरी गानों पर अभिनय करती नजर आ रही हैं। ये रील्स थाना परिसर, न्यायालय परिसर और पुलिस वाहन जैसी संवेदनशील जगहों पर शूट की गई थीं।
वीडियो वायरल होने के बाद आलोचना का दौर शुरू हुआ और संध्या वर्मा ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट 'संध्या वर्मा 790' डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक वीडियो तमाम प्लेटफॉर्म्स पर फैल चुके थे।
MP Police: कानूनी हलकों में नाराजगी, अधिवक्ता बीके माला ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
रीवा की वरिष्ठ अधिवक्ता बीके माला ने इस घटना को "अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा" बताते हुए कहा: "जहां अपराध बढ़ रहे हैं, वहां पुलिस ड्यूटी के समय रील्स बना रही है। यह कानून और जनता दोनों के साथ मज़ाक है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्दी में इस तरह की गतिविधियां पुलिस की गरिमा को धूमिल करती हैं और जनता में अविश्वास पैदा करती हैं।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
रील्स के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने इसे शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया। एक यूजर ने X पर लिखा, "रीवा पुलिस को अपराध रोकने के बजाय भोजपुरी गानों पर रील्स बनाने की फुर्सत है। यह जनता के साथ मजाक है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "पुलिस की वर्दी सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है, लेकिन इसे मनोरंजन का साधन बनाना गलत है।"
कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा, "रीवा पुलिस अब बॉलीवुड और भोजपुरी सिनेमा में डेब्यू करने की तैयारी में है।" हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि पुलिसकर्मी भी इंसान हैं और उन्हें मनोरंजन का अधिकार है, बशर्ते यह ड्यूटी के समय और वर्दी में न हो। इस बहस ने रीवा पुलिस की प्राथमिकताओं और अनुशासन पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
MP Police: एसपी विवेक सिंह की कार्रवाई, जांच शुरू
पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, "सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच यह तय करेगी कि क्या इन रील्स को बनाने में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती गई और क्या यह पुलिस अनुशासन नियमों का उल्लंघन है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।"
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में शामिल पहलुओं में यह देखा जाएगा कि रील्स कब और कहां बनाई गईं, क्या ये ड्यूटी के समय थीं, और क्या इन गतिविधियों ने पुलिस की कार्यक्षमता को प्रभावित किया। इसके अलावा, संध्या वर्मा और अंकिता मिश्रा सहित अन्य शामिल पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जाएगी।
रीवा पुलिस और पहले के विवाद
रीवा पुलिस का विवादों से पुराना नाता रहा है। मई 2024 में चाकघाट थाना प्रभारी उषा सिंह सोमवंशी का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे एक फरियादी से अभद्र भाषा में बात कर रही थीं। उस घटना ने भी पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई की खबर सामने नहीं आई। 2022 में सिटी कोतवाली के एक ASI का आपत्तिजनक ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था।
2023 में सिविल लाइन थाने में एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी पर गोली चलाने की घटना ने रीवा पुलिस के अनुशासन पर गंभीर सवाल उठाए थे। उस समय एसपी विवेक सिंह ने त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया था। वर्तमान रील्स विवाद ने एक बार फिर रीवा पुलिस की कार्यप्रणाली और अनुशासन को कटघरे में ला खड़ा किया है।
MP Police Viral: कानूनी और विभागीय पहलू
मध्य प्रदेश पुलिस नियमावली के अनुसार, पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान गैर-पेशेवर गतिविधियों में शामिल होने की सख्त मनाही है। वर्दी में ऐसी गतिविधियां, जो पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाएं, अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आती हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि संध्या वर्मा और अंकिता मिश्रा ने ड्यूटी के समय रील्स बनाईं, तो उन्हें निलंबन, चेतावनी, या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं जनता के बीच पुलिस के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं और अपराधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। रीवा बार एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, "पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि सोशल मीडिया पर मनोरंजन प्रदान करना। ऐसी गतिविधियां जनता में गलत संदेश देती हैं।"
रीवा में अपराध और पुलिस की चुनौतियां
रीवा जिला हाल के वर्षों में नशे के अवैध कारोबार, हत्या, और बलात्कार जैसे अपराधों में वृद्धि के लिए चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2024 में एक नवविवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े किए थे। 2023 में एसपी विवेक सिंह ने नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने को अपनी प्राथमिकता बनाया था, लेकिन हाल की घटनाएं पुलिस की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही हैं।
ऐसे में, ड्यूटी के दौरान रील्स बनाना न केवल अनुशासनहीनता का मामला है, बल्कि यह पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों से भटकाव को भी दर्शाता है। अधिवक्ता बीके माला ने कहा, "जब जिले में अपराधी बेखौफ हो रहे हैं, तब पुलिस का रील्स बनाने में समय बर्बाद करना जनता के साथ विश्वासघात है।"
सामाजिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर इस घटना ने व्यापक बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने इसे हल्का-फुल्का मनोरंजन मानकर समर्थन किया, लेकिन अधिकांश ने इसे पुलिस की गैर-जिम्मेदारी करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "पुलिस की वर्दी सम्मान और कर्तव्य का प्रतीक है। इसे रील्स के लिए मजाक बनाना गलत है।" एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, "रीवा पुलिस अब अपराधियों को रील्स दिखाकर डराएगी क्या?"
कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस विभाग को सोशल मीडिया के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि ड्यूटी के दौरान ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके।
जांच और संभावित परिणाम
एसपी विवेक सिंह की ओर से शुरू की गई जांच इस मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद जगाती है। उनकी पिछली कार्रवाइयों, जैसे मऊगंज थाने के कांस्टेबल का निलंबन और थाना प्रभारी को लाइन अटैच करना, उनके सख्त रवैये को दर्शाती हैं। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो संध्या वर्मा और अंकिता मिश्रा को निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, यह घटना पुलिस प्रशिक्षण और सोशल मीडिया नीति पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस विभाग को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाना चाहिए।












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