MP अजब-गजब: जिसने खुद को वोट नहीं दिया वह बनीं सरपंच, मजदूर की भी खुली किस्मत
सागर,11 जुलाई। त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव में जिले के ग्रामीण अंचलों में जहां मतदाताओं ने दिग्गज नेताओं को धूल चटाई है तो कई जगह अजब-गजब कहानियां भी इन चुनावों में सामने आ रही हैं। एक पंचायत में महिला प्रत्याशी और उनके पति अपना ही वोट नहीं डाल पाए, लेकिन परिणाम सामने आए तो सरपंच बन जीत गईं। ऐसे ही एक पंचायत में निर्वाचित सरपंच निरक्षर हैं तो एक में शिक्षक की तीसरी पास पत्नी सरपंच चुनी गईं हैं।

मप्र में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए हुए निर्वाचन में अजब कहानियां निकलकर सामने आ रही हैं। बीना क्षेत्र के भानगढ़ पंचायत में ऊषा पटेल प्रत्याशी थीं। मतदान के दिन अपने समर्थकों की वोटिंग कराने के फेर में प्रत्याशी ऊषा और उनके पति राजेश पटेल खुद के बूथ पर समय पर वोट डालने नहीं पहुंच सके। बताया जाता है कि उस बूथ पर दो प्रत्याशियों के लिए 182-182 मत मिले थे जो मतगणना में सामने आए। मालूम हो कि सरपंच जैसे चुनाव में एक-एक मत का महत्व समझते हुए प्रत्याशी पति ने निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों से निवेदन किया, लेकिन समय गुजर जाने के कारण उनका वोट नहीं डल सका। हालांकि देर शाम जब परिणाम घोषित हुआ तो मत न दे पाने वाली प्रत्याशी ऊषा पटेल ही सरपंच निर्वाचित हुई हैं। उन्हें पंचायत के दूसरे बूथों पर खासी बढ़त मिली।
निरक्षर रानीबाई अब चलाएंगी पंचायत
ऐसे ही खुरई जनपद के ग्राम पंचायत ढिकुआ में निरक्षर रानी बाई दांगी सरपंच निर्वाचित हुई हैं। हालांकि निरक्षर रानी बाई के पास 22 लाख की संपत्ति है, तो उनके पति 2 करोड़ के आसामी हैं। खुरई के ही ग्राम खोजाखेड़ी में सरपंच निर्वाचित हुईं उर्मिला अहिरवार खुद तो महज तीसरी पास है, लेकिन उनके पति लक्ष्मीनारायण अहिरवार शासकीय शिक्षक हैं तो ग्राम धनौरा में 67 वर्षीय मजदूर लल्लू राय सरपंच निर्वाचित हुए है। चुनाव में उनकी किस्मत चमकी और गांव वालों ने लल्लूराय को अपना सरपंच चुन लिया।












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