हरदा में पुलिस लाठीचार्ज नया वीडियो आया सामने, राजपूत छात्रावास में बर्बरता, दिग्विजय सिंह की न्यायिक जांच की
मध्य प्रदेश के हरदा में 13 जुलाई 2025 को करणी सेना के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज ने पूरे प्रदेश में बवाल मचा दिया है। राजपूत छात्रावास में पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई, जिसमें महिलाओं, बच्चों, और पुरुषों पर लाठियां बरसाने के आरोप लगे हैं, ने राजपूत समाज और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है, जबकि राजपूत समाज ने मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर तत्काल जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि लोग पुलिस की मार से बचने के लिए छतों और टीनशेड पर चढ़ गए, कुछ बालकनी से कूदे।

क्या हुआ हरदा में?
13 जुलाई 2025 को हरदा में करणी सेना के कार्यकर्ता एक धोखाधड़ी मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्वदेश न्यूज़ के अनुसार, करणी सेना के पदाधिकारी आशीष राजपूत के साथ 18 लाख रुपये की हीरा खरीद धोखाधड़ी हुई थी। इस मामले में विकास लोधी और मोहित वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 12 जुलाई को जब पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट ले जा रही थी, तब करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि राजपूत छात्रावास में पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे लोग छतों पर चढ़ गए। कुछ लोग बालकनी से कूदते और टीनशेड पर छिपते नजर आए। युवाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जाति पूछकर राजपूतों को निशाना बनाया। एक युवा ने कहा, "पुलिस ने कश्मीर में आतंकवादियों की तरह हमारा नाम पूछकर लाठियां बरसाईं।"
दिग्विजय सिंह का हस्तक्षेप और न्यायिक जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और 14 जुलाई को हरदा पहुंचे। उन्होंने राजपूत छात्रावास में एक छात्रा से बातचीत की, जिसका वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया। छात्रा ने बताया कि बड़े-बड़े दादा जी लोग पुलिस अधिकारियों से बात कर रहे थे। जैसे ही वे बाहर गए, पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
"एक आदमी को घुटनों और पीठ पर बेरहमी से मारा गया। कई लोगों को अंदर घुसने की जगह नहीं मिली।" पुलिस ने पैरों से कई कमरों के गेट तोड़ दिए।"
मानव अधिकार आयोग को ज्ञापन
- राजपूत समाज और करणी सेना ने इस मामले को मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के समक्ष उठाया। आयोग के अध्यक्ष राजीव टंडन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया:
- "हरदा के राजपूत छात्रावास में महिलाओं, मासूम बच्चों, और पुरुषों पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया।"
- "पुलिस ने जाति पूछकर राजपूतों को निशाना बनाया, जो मानव अधिकारों का उल्लंघन है।"
- "आयोग की टीम तुरंत हरदा जाकर पीड़ितों से मिले और मामले की जांच करे।"
करणी सेना अध्यक्ष का बयान
करणी सेना के अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर, जिन्हें 14 जुलाई को हरदा जेल से रिहा किया गया, ने कहा, "हमने प्रशासन का अन्याय सहा है। छात्रावास में घुसकर मारपीट की गई। मैं अपील करता हूं कि जब तक सभी लोग रिहा नहीं हो जाते, कोई हरदा न आए। हम जल्द नई तारीख निकालकर आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे।"
पुलिस और प्रशासन का पक्ष
हरदा पुलिस ने दावा किया कि लाठीचार्ज स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किया गया। कलेक्टर ने कहा, प्रदर्शनकारियों को तीन बार चेतावनी दी गई थी। जब भीड़ उग्र हुई, तो मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा












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