तिसाला पूजा: स्वर्ण रथयात्रा निकली, तंत्रमंत्र का बिछा जाल, काली शक्तियों, बलाओं का उतारा
सागर, 22 जुलाई। जगत जननी माता के मां शीतला और मरहई माता के स्वरुप को स्वर्णरथ में विराजमान कर शुक्रवार को सागर भ्रमण कराया गया। माता के रथ के आगे परंपरा अनुसार प्रतीक स्वरुप बकरों को लगाया गया था। सबसे खास बात रथयात्रा के प्रारंभ होने से समाप्त होने के दौरान जगह-जगह लोगों ने पंडा-पुजारियों से अपने सिर से बलाओं और नजर दोष का उतारा कराया। सागर में केशरवानी समाज सालाना तिसाला पूजा करता है, जिसे बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

सागर में केशरवानी समाज की सालाना तिसाला पूजा और रथयात्रा शुक्रवार को भीतर बाजार से निकाली गई। मान्यता अनुसार बकरों के प्रतीक बनाकर रथ को शहर भ्रमण कराया गया। लोग माता की आरती कर रथ का स्वागत करते हैं। दूसरी ओर यात्रा के आगे-आगे लोग काली शक्तियों से बचाव, बलाओं और नजर दोष से छुटकारे के लिए नीबू ओर अन्य सामग्री से उतारा करवाते हैं। तंत्र-मंत्र का मायाजाल भी रचा जाता है। उल्लेखनीय है कि मान्यता अनुसार मानव कल्याण और भक्तों की बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए सागर में पिछले 182 सालों से सार्वजनिक तिसाला बड़ी पूजा की जाती है। इसमें रथयात्रा प्रमुख महोत्सव माना जाता है।

सोने से की गई रथ की सजावट
मातारानी के रथ में सोने से सजावट की गई थी, जो श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके पांच दिन पूर्व समाज की महिलाओं ने शहर की चारों दिशाओं की नाकेबंदी की थी। मंदिर कमेटी के अनुसार लोगों की सुख समृद्धि की कामना और बुरी बलाओं से रक्षा करने शीतला माता मंदिर से मां की शोभायात्रा निकाली जाती है।

रथयात्रा में मरहई माता का खप्पर साथ में चलता है
रथयात्रा में पंडा द्वारा श्रद्धालुओं के नारियल एवं नींबू से उतारा कर सभी बलाओं को विसर्जित किया जाता है। रथयात्रा भीतर बाजार स्थित मंदिर से निकाली जाती है, जिसमें करीब 50 हजार लोग सागर सहित देशभर से आकर शामिल होते हैं। शुक्रवार को सागर, मप्र व देशभर में रह रहे सागर के केशरवानी समाज के लोग पूजा के लिए आए थे।












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