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International Tiger Day: म‍िल‍िए बुंदेलखंड के बाघों से, ज‍िन्‍होंने नौरादेही-पन्‍ना के जंगलों को आबाद क‍िया

सागर, 29 जुलाई। अंतरराष्‍ट्रीय व‍िश्‍व बाघ द‍िवस पर हम आपको म‍िलवाते हैं बुंदेलखंड के उन राजा-रानी से ज‍िन्‍होंने यहां के जंगलों को बाघों से आबाद क‍िया है। महज चंद सालों में इन बाघों ने यहां के जंगलों पर न केवल अपना सामाज्‍य स्‍थाप‍ित किया, बल्‍क‍ि इलाके की पहचान बने और टाइगर स्‍टेट में बुंदेलखंड का सिर गर्व से ऊंचा कर रहे हैं। पन्‍ना में 75 बाघ तो सागर में 10 बाघ मौजूद हैं।

"कान्‍हा" से व‍िछोह हुआ तो बाघ‍िन बन गई "राधा"

सागर के नौरादेही अभयारण्‍य में बाघों की पुर्नस्‍थापना के ल‍िए साल 2018 में कान्‍हा टाइगर र‍िजर्व से बाघ‍िन को नौरादेही अभयारण्‍य में श‍िफ्ट क‍िया गया था। कान्‍हा से आने के कारण उसे सागर में प्‍यार से नाम द‍िया गया "राधा"... साल 2008 के बाद यह पहला मौका था, जब नौरादेही में बाघों की दहाड गूंजी हो।

बांधवगढ के वनराज को

बांधवगढ के वनराज को "राधा" का संग म‍िला तो बने "क‍िशन"

नौरादेही में बाघ‍िन राधा के आने के बाद कुनबा बढाने के ल‍िए शासन ने बांधवगढ के बाडे में बंद बाघ को सागर भेजने का फैसला क‍िया। पूरे प्रोटोकाल के बाद साल 2018 में ही बाघा को नौरादेही लाया गया। जब बाघ को "राधा" का संग म‍िला वह "क‍िशन" बन गया। इन दोनों बाघों को रिकॉर्डों में नंबर द‍िए जाते हैं, लेक‍िन पूरा अभयारण्‍य का अमला इन्‍हें राधा-क‍िशन के नाम से बुलाता है।

चार साल में तीसरी पीढ़ी सह‍ित 10 हुआ कुनबा

चार साल में तीसरी पीढ़ी सह‍ित 10 हुआ कुनबा

नौरादेही अभयारण्‍य में बीते 2018 में राधा क‍िशन के आने के बाद तेजी से कुनबा बढ़ा है। सबसे पहले राधा-क‍िशन ने तीन शावकों को जन्‍म द‍िया था। राधा दो दफा मां बन चुकी है। उनके पहले बच्‍चों से भी शावकों का जन्‍म हो चुका है, ज‍िनको म‍िलाकर अभयारण्‍य में कुल 9 बाघों का इनका पर‍िवार हो गया है, वहीं यहां पर एक मेहमान बाघ भी ट्रेस हुआ है, ज‍िसने नौरादेही को ही अपना बसेरा बना ल‍िया है।

बाघों की नई पीढ़ी के गर्वीले पदचाप

बाघों की नई पीढ़ी के गर्वीले पदचाप

नौरादेही में बाघों की नई पीढ़ी की गुर्राहट गूंज रही हैं। यहां नन्‍हें शावक, क‍िशोर शावक और वयस्‍क के साथ अधेड शावक मौजूद हैं। अभयारण्‍य में नौरादेही गांव के पास जहां टाइगर का कुनबा अपनी टेरेटरी बनाए हुए है, वहां पर ट्रेप कैमरे लगाए गए हैं। इनमें कई दफा नन्‍हें शावकों की गर्वीली पदचाप भी रिकॉर्ड होती रही है।

बाघ पी-111 ने पन्‍ना को

बाघ पी-111 ने पन्‍ना को "बाघों" का "हीरा" बनाया

बुंदेलखंड के पन्‍ना टाइगर र‍िजर्व ने मप्र को टाइगर स्‍टेट का दर्जा द‍िलाने में महत्‍वपूर्ण भूम‍िका अदा की है। यहां वर्तमान में करीब 75 बाघ अलग-अलग इलाकों में धाक जमाए हुए हैं। ये सब बाघ पी-111 की संतानें हैं। पीटीआर साल 2008 के पहले बाघ व‍िहीन हो गया था। तब साल 2009 में यहां अन्‍य अभयारण्‍य से बाघ-बाघ‍िन को लाया गया था। इनका पहला शावक पी-111 ही था। तीन शावकों में सबसे दमदार इस बाघ ने युवा होते-होते जंगल में कब्‍जा जमा ल‍िया था। पन्‍ना टाइगर र‍िजर्व में इसी ने तेजी से बाघ पर‍िवार को आगे बढाया था। बीते जून में उसकी मौत हो गई थी। लेक‍िन पीटीआर के इत‍िहास में उसका नाम अमर हो गया।

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