MP News: मध्य प्रदेश की राजनीति में दल बदल का अनोखा खेल, BJP नेताओं की घर वापसी का पूरा गणित समझिए
MP News: मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले दो दशकों में दल बदलने का जो सिलसिला चला है, वह प्रदेश की राजनीति में एक नई परिपाटी बन चुका है। यह सिलसिला खास तौर पर उन नेताओं द्वारा देखा गया, जिन्होंने भाजपा से असंतुष्ट होकर अन्य दलों का दामन थामा, लेकिन उन्हें उन दलों में राजनीति करने में सुख-चैन नहीं मिला।
नतीजतन, इनमें से कुछ नेताओं ने भाजपा में वापस लौटकर अपनी राजनीतिक पारी फिर से शुरू की। हाल ही में, पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाश जोशी के बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी का भी नाम इस सूची में जुड़ गया है।

दीपक जोशी, जो पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे, ने अब एक बार फिर भाजपा में घर वापसी की है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। यह वापसी प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संदेश दे रही है, क्योंकि दीपक जोशी पहले भाजपा में ही थे, लेकिन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद हार का सामना करने के बाद उन्होंने फिर से भाजपा का रुख किया।
दीपक जोशी अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने पार्टी बदली और फिर से भाजपा में लौटे। प्रदेश में कई बड़े नेता ऐसे रहे हैं जिन्होंने भाजपा को छोड़कर अन्य पार्टियों में शामिल होने की कोशिश की (खास तौर कांग्रेस) लेकिन उन्हें उन पार्टियों में राजनीतिक संतुष्टि नहीं मिली। इस रिपोर्ट में हम उन नेताओं का जिक्र करेंगे जिन्होंने भाजपा से बाहर जाकर दूसरी पार्टियों में अपने राजनीतिक सपनों को तलाशा, लेकिन अंततः उन्हें भाजपा के पास ही लौटने का रास्ता मिला।
उमा भारती की जनशक्ति पार्टी और भाजपा में वापसी
2005 में भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने पार्टी से बगावत कर भारतीय जनशक्ति पार्टी (BJS) का गठन किया था। उमा के साथ कई अन्य दिग्गज नेताओं ने भी इस पार्टी में शामिल होकर भाजपा से अपनी दूरी बना ली थी। हालांकि, 2011 में उमा भारती ने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। उस वक्त इस विलय के कारण पार्टी के कई नेताओं को कड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी थी। इन नेताओं में प्रहलाद पटेल, डॉ. गौरीशंकर शेजवार, रघुनंदन शर्मा जैसे नेता शामिल थे, जिन्होंने संगठन और सत्ता में अपनी जगह बनाई।
सरताज सिंह और दीपक जोशी की कांग्रेस में शामिल होने की कहानी
पूर्व मंत्री सरताज सिंह, जो शिवराज सरकार के सीनियर मंत्री थे, 2018 में टिकट कटने के कारण नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्होंने होशंगाबाद से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के उम्मीदवार सीताशरण शर्मा से हार गए। वहीं, दीपक जोशी ने भी 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा और खातेगांव सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा, 2018 में पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया ने भी भाजपा से बगावत की और कांग्रेस के साथ जुड़ गए। हालांकि, 2020 में उन्होंने भाजपा में वापसी की और 2023 में उन्हें राज्य पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि जो नेता भाजपा छोड़ते हैं, उनके लिए वापसी का रास्ता हमेशा खुला रहता है, बशर्ते वे अपने फैसले पर पछताएं और पार्टी में विश्वास बहाल करें।
दीपक जोशी का भाजपा में वापसी पर बयान
दीपक जोशी ने भाजपा में अपनी वापसी के दौरान एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि भाजपा उनका घर है। उनका यह बयान उनकी भाजपा के प्रति निष्ठा को दर्शाता है, क्योंकि वे जनसंघ के जमाने से जुड़े हुए परिवार से हैं। जोशी का कहना था, "मैंने गलती की थी और उसे ठीक किया है।" उनके इस बयान से यह स्पष्ट है कि वे कांग्रेस में जाने को एक राजनीतिक गलती मानते हैं और अब उसे सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान का समर्थन
दीपक जोशी की वापसी के मामले में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दीपक जोशी की भाजपा में वापसी के लिए शिवराज सिंह चौहान ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें मनाने की कोशिश की थी। दरअसल, कुछ महीनों पहले जब जोशी ने भाजपा में वापसी के संकेत दिए थे, तो उन्हें मना कर दिया गया था, लेकिन बाद में शिवराज सिंह चौहान की पहल के बाद उनकी वापसी संभव हो पाई।
कांग्रेस से भाजपा में आने वाले नेताओं की सफलता की कहानी
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई नेताओं ने अपनी पहचान बनाए रखी है और सत्ता व संगठन में महत्वपूर्ण जगह बनाई है। उदाहरण के लिए, पूर्व मंत्री संजय पाठक और परिवहन मंत्री उदयप्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने के बाद अपनी सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी तरह, 2020 में भाजपा में शामिल हुए तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, और प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मोहन सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर कार्य किया। इन नेताओं ने भाजपा में अपनी स्थिति को मजबूत किया और वे आज भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में स्थापित हैं।
मध्य प्रदेश की राजनीति में दल बदलने का यह खेल अब एक सामान्य प्रथा बन चुका है। नेताओं का भाजपा से कांग्रेस या कांग्रेस से भाजपा में आना-जाना अब कोई हैरानी की बात नहीं रह गई है। हालांकि, यह साफ दिखता है कि कांग्रेस में आए अधिकांश नेता भाजपा के प्रभाव में वापस लौटे हैं, जबकि भाजपा से कांग्रेस में गए नेताओं के लिए राजनीति आसान नहीं रही। दीपक जोशी की भाजपा में वापसी एक बार फिर से यह साबित करती है कि भाजपा को छोड़कर जाने वाले नेताओं के लिए वापसी के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं, बशर्ते वे अपनी गलतियों से सीखें और पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाएं।












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