MP News: मेरा काम टोंटी ठीक करना नहीं, अफसर सुनिश्चित करें हर घर तक पानी पहुंचे: शिवराज सिंह चौहान
Shivraj Singh Chauhan news: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने गृह क्षेत्र बुधनी विधानसभा के चकल्दी गांव में पेयजल संकट को लेकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। गुरुवार को चकल्दी और सेमलपानी गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने शिवराज के सामने नल-जल योजना की खामियों को उजागर किया।
ग्रामीणों की शिकायत थी कि नल-जल योजना के तहत उन्हें सिर्फ 10 मिनट पानी मिलता है, और कई बार तो पानी आता ही नहीं। इस गंभीर स्थिति पर शिवराज ने अधिकारियों से कहा, "मेरा काम टोंटी और नल ठीक करना नहीं है। सरकार ने नहर और डैम बनाए, नर्मदा का जल उपलब्ध कराया। अब हर घर तक पर्याप्त पानी पहुंचे, यह अफसरों की जिम्मेदारी है।" इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शिवराज का सख्त रवैया साफ नजर आता है।

चकल्दी में पेयजल संकट की शिकायत
शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को बुधनी विधानसभा के चकल्दी और सेमलपानी गांव के दौरे पर थे। चकल्दी में ग्रामीणों ने उनके सामने पेयजल की भयावह स्थिति का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के बावजूद गांव में पानी की आपूर्ति बेहद अनियमित है। एक ग्रामीणी ने कहा, "हमें सिर्फ 10 मिनट पानी मिलता है, और कई बार तो नल सूखे रहते हैं। पीने के पानी के लिए हमें दूर जाना पड़ता है।" महिलाओं ने भी बताया कि पानी की कमी के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, और बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत हो रही है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि गांव में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए एक अतिरिक्त पानी की टंकी बनाई जाए। उनकी शिकायत थी कि मौजूदा व्यवस्था उनकी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में नाकाम है।
Shivraj Singh Chauhan News: : शिवराज का अधिकारियों को कड़ा निर्देश
ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर मौजूद जिला कलेक्टर बालागुरु के, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग, और जल निगम के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "यह गंभीर स्थिति है। सरकार का काम पानी उपलब्ध कराना है। नर्मदा का जल लाकर हमने डैम और नहरें बनाई हैं। अब घर-घर तक पानी पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। अगर पानी नहीं पहुंच रहा, तो यह आपकी नाकामी है।"
अधिकारियों ने सफाई में कहा कि पेयजल आपूर्ति में तकनीकी खराबी के कारण दिक्कत आ रही है। इस पर शिवराज ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि इस समस्या का स्थायी समाधान हो। तकनीकी खराबी का बहाना नहीं चलेगा। एक हफ्ते में मुझे बताइए कि समस्या क्या है और इसे कैसे ठीक किया जाएगा।"
अतिरिक्त पानी की टंकी की मांग
ग्रामीणों ने पेयजल संकट के समाधान के लिए एक अतिरिक्त पानी की टंकी की मांग भी रखी। उनका कहना था कि गांव की आबादी बढ़ रही है, और मौजूदा टंकी पर्याप्त नहीं है। शिवराज ने इस मांग को गंभीरता से लिया और अधिकारियों को इसकी व्यवहार्यता की जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया, "आपकी हर समस्या का समाधान होगा। हमारी सरकार जनता की सेवा के लिए है, और कोई भी परेशान नहीं रहेगा।"
सेमलपानी में आगजनी पीड़ितों को राहत
चकल्दी के बाद शिवराज सेमलपानी गांव पहुंचे, जहां हाल ही में आगजनी की घटना में कई परिवार प्रभावित हुए थे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें राहत राशि वितरित की। शिवराज ने कहा, "आपदा की इस घड़ी में सरकार आपके साथ है। हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको हर संभव मदद मिले। किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों की पूरी सहायता की जाए और उनके पुनर्वास के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।
शिवराज का जनता से गहरा नाता
शिवराज सिंह चौहान का बुधनी विधानसभा से गहरा जुड़ाव रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र में विकास के कई काम किए। नर्मदा नदी से जल उपलब्ध कराने की परियोजनाएं उनकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक हैं। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी वह नियमित रूप से अपने क्षेत्र का दौरा करते हैं और जनता की समस्याएं सुनते हैं। चकल्दी में उनकी यह सख्ती और ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता उनके "मामा" वाले अंदाज को दर्शाती है, जिसके लिए वह मध्य प्रदेश में लोकप्रिय हैं।
Shivraj Singh Chauhan: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
शिवराज के इस दौरे और अधिकारियों को फटकार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने उनकी सख्ती की तारीफ की है, तो कुछ ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी का सबूत बताया। एक यूजर ने लिखा, "शிவराज जी आज भी जनता के लिए उतने ही संवेदनशील हैं। लेकिन अफसरों की लापरवाही कब खत्म होगी?" एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "नल-जल योजना को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी बातें, लेकिन गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा। यह शर्मनाक है।"
नल-जल योजना और चुनौतियां
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजना का लक्ष्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत लाखों घरों में नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में अनियमित आपूर्ति और तकनीकी खराबी की शिकायतें आम हैं। चकल्दी जैसे गांवों में पानी की कमी न केवल योजना की खामियों को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।
शिवराज ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में भी पेयजल संकट को लेकर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी थी। 2021 में एक वायरल वीडियो में उन्होंने कहा था, "अब एक-एक टोंटी मैं चेक करूं क्या?" उस समय भी उन्होंने अधिकारियों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
सरकार और प्रशासन के लिए सवाल
चकल्दी और सेमलपानी जैसे गांवों की स्थिति ग्रामीण भारत में पेयजल संकट की गंभीरता को उजागर करती है। नर्मदा जैसी बड़ी जल परियोजनाओं के बावजूद अगर गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और योजना के अमल में कमी को दर्शाता है। शिवराज सिंह चौहान का यह बयान कि "मेरा काम टोंटी ठीक करना नहीं है" न केवल उनकी झुंझलाहट को दिखाता है, बल्कि अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है।मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने गृह क्षेत्र बुधनी विधानसभा के चकल्दी गांव में पेयजल संकट को लेकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। गुरुवार को चकल्दी और सेमलपानी गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने शिवराज के सामने नल-जल योजना की खामियों को उजागर किया। ग्रामीणों की शिकायत थी कि नल-जल योजना के तहत उन्हें सिर्फ 10 मिनट पानी मिलता है, और कई बार तो पानी आता ही नहीं। इस गंभीर स्थिति पर शिवराज ने अधिकारियों से कहा, "मेरा काम टोंटी और नल ठीक करना नहीं है। सरकार ने नहर और डैम बनाए, नर्मदा का जल उपलब्ध कराया। अब हर घर तक पर्याप्त पानी पहुंचे, यह अफसरों की जिम्मेदारी है।" इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शिवराज का सख्त रवैया साफ नजर आता है।
चकल्दी में पेयजल संकट की शिकायत
शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को बुधनी विधानसभा के चकल्दी और सेमलपानी गांव के दौरे पर थे। चकल्दी में ग्रामीणों ने उनके सामने पेयजल की भयावह स्थिति का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के बावजूद गांव में पानी की आपूर्ति बेहद अनियमित है। एक ग्रामीणी ने कहा, "हमें सिर्फ 10 मिनट पानी मिलता है, और कई बार तो नल सूखे रहते हैं। पीने के पानी के लिए हमें दूर जाना पड़ता है।" महिलाओं ने भी बताया कि पानी की कमी के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, और बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत हो रही है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि गांव में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए एक अतिरिक्त पानी की टंकी बनाई जाए। उनकी शिकायत थी कि मौजूदा व्यवस्था उनकी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में नाकाम है।
शिवराज का अधिकारियों को कड़ा निर्देश
ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर मौजूद जिला कलेक्टर बालागुरु के, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग, और जल निगम के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "यह गंभीर स्थिति है। सरकार का काम पानी उपलब्ध कराना है। नर्मदा का जल लाकर हमने डैम और नहरें बनाई हैं। अब घर-घर तक पानी पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। अगर पानी नहीं पहुंच रहा, तो यह आपकी नाकामी है।"
अधिकारियों ने सफाई में कहा कि पेयजल आपूर्ति में तकनीकी खराबी के कारण दिक्कत आ रही है। इस पर शिवराज ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि इस समस्या का स्थायी समाधान हो। तकनीकी खराबी का बहाना नहीं चलेगा। एक हफ्ते में मुझे बताइए कि समस्या क्या है और इसे कैसे ठीक किया जाएगा।"
अतिरिक्त पानी की टंकी की मांग
ग्रामीणों ने पेयजल संकट के समाधान के लिए एक अतिरिक्त पानी की टंकी की मांग भी रखी। उनका कहना था कि गांव की आबादी बढ़ रही है, और मौजूदा टंकी पर्याप्त नहीं है। शिवराज ने इस मांग को गंभीरता से लिया और अधिकारियों को इसकी व्यवहार्यता की जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया, "आपकी हर समस्या का समाधान होगा। हमारी सरकार जनता की सेवा के लिए है, और कोई भी परेशान नहीं रहेगा।"
सेमलपानी में आगजनी पीड़ितों को राहत
चकल्दी के बाद शिवराज सेमलपानी गांव पहुंचे, जहां हाल ही में आगजनी की घटना में कई परिवार प्रभावित हुए थे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें राहत राशि वितरित की। शिवराज ने कहा, "आपदा की इस घड़ी में सरकार आपके साथ है। हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको हर संभव मदद मिले। किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों की पूरी सहायता की जाए और उनके पुनर्वास के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।
शिवराज का जनता से गहरा नाता
शिवराज सिंह चौहान का बुधनी विधानसभा से गहरा जुड़ाव रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र में विकास के कई काम किए। नर्मदा नदी से जल उपलब्ध कराने की परियोजनाएं उनकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक हैं। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी वह नियमित रूप से अपने क्षेत्र का दौरा करते हैं और जनता की समस्याएं सुनते हैं। चकल्दी में उनकी यह सख्ती और ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता उनके "मामा" वाले अंदाज को दर्शाती है, जिसके लिए वह मध्य प्रदेश में लोकप्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
शिवराज के इस दौरे और अधिकारियों को फटकार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने उनकी सख्ती की तारीफ की है, तो कुछ ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी का सबूत बताया। एक यूजर ने लिखा, "शிவराज जी आज भी जनता के लिए उतने ही संवेदनशील हैं। लेकिन अफसरों की लापरवाही कब खत्म होगी?" एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "नल-जल योजना को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी बातें, लेकिन गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा। यह शर्मनाक है।"
नल-जल योजना और चुनौतियां
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजना का लक्ष्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत लाखों घरों में नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में अनियमित आपूर्ति और तकनीकी खराबी की शिकायतें आम हैं। चकल्दी जैसे गांवों में पानी की कमी न केवल योजना की खामियों को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।
शिवराज ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में भी पेयजल संकट को लेकर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी थी। 2021 में एक वायरल वीडियो में उन्होंने कहा था, "अब एक-एक टोंटी मैं चेक करूं क्या?" उस समय भी उन्होंने अधिकारियों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
सरकार और प्रशासन के लिए सवाल
चकल्दी और सेमलपानी जैसे गांवों की स्थिति ग्रामीण भारत में पेयजल संकट की गंभीरता को उजागर करती है। नर्मदा जैसी बड़ी जल परियोजनाओं के बावजूद अगर गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और योजना के अमल में कमी को दर्शाता है। शिवराज सिंह चौहान का यह बयान कि "मेरा काम टोंटी ठीक करना नहीं है" न केवल उनकी झुंझलाहट को दिखाता है, बल्कि अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है।












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