MP News: गोदौलीपुरा में दर्दनाक हादसा, एक की मौत, कांग्रेस विधायक कुशवाह ने BJP सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप
MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले बैराड़ नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15, गैदोली गांव के बहुप्रतीक्षित पुल निर्माण में देरी ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्रीय विधायक कैलाश कुशवाहा का भी सब्र तोड़ दिया है। ग्राम गोदौलीपुरा में मुकेश शाक्य का नदी में डूबने से मौत हो गई।
कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाहा ने इस मामले को लेकर कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी से फोन पर तल्ख बातचीत की और निर्माण कार्य की सुस्ती पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मोहन यादव सरकार उनके विधानसभा क्षेत्र के साथ भेदभाव कर रही है, जिसके चलते गैदोली गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।

विधायक की नाराजगी: "एक साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर"
वन इंडिया हिंदी के रिपोर्टर लक्ष्मी नारायण मालवीय से बातचीत में विधायक कैलाश कुशवाहा ने अपनी पीड़ा बयान की। उन्होंने कहा, "मुझे विधायक चुने हुए एक साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन मेरे क्षेत्र में वह काम नहीं हो पाया, जो मैंने प्रशासन और सरकार को बार-बार अवगत कराया। गैदोली गांव में पुल निर्माण की मांग वर्षों पुरानी है, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।"

कुशवाहा ने दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार जिला प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष उठाया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। "मैंने कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी से फोन पर बात की और साफ कहा कि यह देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी। गैदोली के लोग बरसात में नदी पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। यह स्थिति शर्मनाक है," उन्होंने गुस्से में कहा।

भेदभाव का आरोप: "कांग्रेस विधायक होने की सजा भुगत रहा क्षेत्र"
कैलाश कुशवाहा ने मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है। "मैं कांग्रेस का विधायक हूं, शायद यही वजह है कि मेरे क्षेत्र की जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। भाजपा सरकार की प्राथमिकताएं साफ दिखती हैं-उनके अपने क्षेत्रों में सड़कें, पुल, और अन्य परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं, लेकिन पोहरी-शिवपुरी जैसे क्षेत्रों को अनदेखा किया जा रहा है," उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, "गैदोली गांव का पुल न केवल स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का जरिया है, बल्कि यह आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता भी है। बरसात में नदी का उफान बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने, और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में बाधा बनता है। यह मानवाधिकार का उल्लंघन है।"
हादसे ने उजागर की वर्षों पुरानी मांग
गोदौलीपुरा गांव में नदी पर पुल का अभाव लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। बरसात के मौसम में नदी का उफान गांव को बाहरी दुनिया से काट देता है, जिसके कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। मुकेश शाक्य की दुखद मृत्यु इसी समस्या का एक दर्दनाक उदाहरण है। इस हादसे ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया, और उन्होंने सड़क पर चक्का जाम कर प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
स्थानीय निवासी रमेश पाल ने गुस्से में कहा, "हम पिछले कई सालों से पुल की मांग कर रहे हैं। हर बरसात में हमें अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करनी पड़ती है। अब एक और हादसा हो गया, लेकिन प्रशासन अभी भी चुप है।" एक अन्य ग्रामीण, सुनीता बाई, ने बताया, "हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। यह कोई छोटी समस्या नहीं है, यह हमारी जिंदगी का सवाल है।"
विधायक का त्वरित कदम: मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाहा ने इस त्रासदी के बाद तत्काल गोदौलीपुरा पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, "मुकेश शाक्य का असमय निधन अत्यंत दुखद है। मैंने उनके परिवार से मिलकर सांत्वना दी और यह वचन दिया कि उनकी आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।"
चक्का जाम के दौरान गुस्साई भीड़ को शांत करते हुए कुशवाहा ने प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। "यह केवल एक दुर्घटना नहीं है, यह प्रशासन और शासन की उदासीनता का परिणाम है। गोदौलीपुरा में पुल निर्माण की मांग को वर्षों से टाला जा रहा है। अब और देरी बर्दाश्त नहीं होगी," उन्होंने दृढ़ता से कहा।
प्राथमिक सुधार कार्य शुरू, DPR तैयार
हादसे के बाद विधायक की सक्रियता से तत्काल कार्रवाई शुरू हो गई है। कुशवाहा ने बताया कि गोदौलीपुरा में नदी पर प्राथमिक सुधार कार्य आज से ही शुरू करवा दिया गया है। इसके साथ ही, उन्होंने कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी और एसडीएम के माध्यम से पुल निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करवाकर शासन को भेज दी है। "मैंने स्पष्ट मांग की है कि गोदौलीपुरा में पुल का निर्माण अविलंब शुरू हो, ताकि भविष्य में ऐसी कोई और जनहानि न हो," उन्होंने जोर देकर कहा।
कुशवाहा ने यह भी बताया कि उन्होंने कलेक्टर से फोन पर तल्ख बातचीत की थी और इस मुद्दे को लेकर बार-बार प्रशासन को अवगत कराया। "मैंने कलेक्टर को साफ कहा कि अगर अब भी कार्रवाई में देरी हुई, तो जनता के साथ मिलकर हम बड़ा आंदोलन करेंगे। यह मेरी जनता का हक है, और मैं इसे हर हाल में पूरा करवाऊंगा," उन्होंने कहा।
कलेक्टर से चर्चा: "जल्द कार्रवाई का आश्वासन"
कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी के साथ फोन पर हुई बातचीत में विधायक ने स्पष्ट शब्दों में अपनी नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि गैदोली गांव में पुल निर्माण के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, विधायक का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। "मैंने प्रशासन को साफ कह दिया है कि अगर जल्द ही निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो हम जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेंगे। यह हमारा हक है," कुशवाहा ने चेतावनी दी।
क्षेत्रीय विकास में बाधा: एक साल में कितना काम?
कैलाश कुशवाहा ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कई अन्य परियोजनाएं भी लंबित हैं। "सड़कें, पुलियां, स्कूल भवन, और स्वास्थ्य सुविधाएं-हर जगह कमी है। मैंने हर मंच पर इन मुद्दों को उठाया, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया उदासीन है। मुझे लगता है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, ताकि मेरे क्षेत्र की जनता को परेशान किया जाए और मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जाए," उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बनाएंगे। "मैं अपनी जनता के लिए हर संभव लड़ाई लड़ूंगा। यह केवल एक पुल की बात नहीं है, यह मेरे क्षेत्र की जनता के सम्मान और उनके अधिकारों की बात है," कुशवाहा ने जोर देकर कहा।
जनता का गुस्सा: "कब तक इंतजार?"
गैदोली गांव के लोग भी अब धैर्य खोते जा रहे हैं। स्थानीय निवासी रमेश कुशवाह ने कहा, "हमने हर बार वोट देकर अपने प्रतिनिधियों को चुना, लेकिन हर बार हमें केवल वादे मिले। अब विधायक जी हमारे लिए लड़ रहे हैं, लेकिन अगर सरकार नहीं सुन रही, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे।"
भविष्य की राह: क्या होगा समाधान?
गैदोली गांव में पुल निर्माण का मुद्दा अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विधायक कैलाश कुशवाहा का आरोप है कि भाजपा सरकार की नीतियां उनके क्षेत्र के विकास में बाधा डाल रही हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि वह इस मामले में गंभीर है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, गैदोली के लोग उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब उनका गांव नदी के उफान से मुक्त होकर बाहरी दुनिया से पूरी तरह जुड़ सके। यह पुल न केवल आवागमन की सुविधा देगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक अवसरों के लिए भी एक नया रास्ता खोलेगा।
क्या विधायक कैलाश कुशवाहा की यह लड़ाई गैदोली के लोगों के लिए एक नई सुबह लाएगी, या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी में उलझकर रह जाएगा? यह सवाल अब समय के गर्भ में है। लेकिन एक बात तय है-गैदोली गांव की जनता और उनके विधायक अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं।
रिपोर्टर: लक्ष्मी नारायण मालवीय | वन इंडिया हिंदी |












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