MP News: ED अफसरों पर गंभीर आरोप: मनोज परमार ने सुसाइड नोट में किया दावा, "राहुल गांधी भी मदद नहीं कर पाएंगे"
MP News: सीहोर जिले के आष्टा के कारोबारी मनोज परमार ने अपने सुसाइड नोट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर 2024 को ED ने उनके घर पर तीसरी बार छापा मारा और सर्चिंग के दौरान 10 लाख रुपए और 70 ग्राम सोने की ज्वेलरी जब्त की, लेकिन जब्त की गई रकम और ज्वेलरी का कोई जिक्र पंचनामे में नहीं किया गया।
पंचनामे में रकम और सोने की जब्ती का जिक्र नहीं
मनोज परमार के अनुसार, उन्होंने यह रकम और ज्वेलरी उधार लिए थे। 10 लाख रुपए उनके रिश्तेदार दिनेश परमार (जो शराब ठेकेदार हैं) से लिए गए थे, जो कि उनकी पत्नी नेहा परमार के 2013 से चल रहे बैंक ऑफ बड़ौदा के लोन के OTS (One Time Settlement) के लिए थे।

मनोज ने कहा कि यह रकम ED के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीत कुमार साहू और उनके साथी राधेश्याम विश्नोई ने जब्त की थी। परंतु, जब ED ने पंचनामा दिया, उसमें न तो 10 लाख रुपए और न ही 70 ग्राम सोने की जब्ती का कोई जिक्र किया गया।
राहुल गांधी का नाम और बीजेपी का दबाव
मनोज परमार ने सुसाइड नोट में यह भी दावा किया कि ईडी के अफसर लगातार उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते रहे और बार-बार यह कहते रहे कि अगर वह और उनका परिवार भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ा होता, तो उनके खिलाफ कोई केस नहीं होता। अफसरों ने यह भी कहा कि "तुम्हारे बच्चे राहुल गांधी से मिलते हैं और राहुल गांधी के पास कितनी संपत्ति है, यह तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को पता होगा। राहुल गांधी भी तुम्हारी मदद नहीं कर पाएगा। हम उसे भी जल्दी गिरफ्तार करेंगे।"
मनोज परमार का आरोप
मनोज परमार ने सुसाइड नोट में इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि ED की छापेमारी के दौरान उनके साथ भेदभाव और अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2017 से एक ही घटना की दो FIR में ट्रायल झेला है, जिनमें से एक का जजमेंट फरवरी 2023 में आष्टा कोर्ट से हो चुका था, जबकि दूसरी FIR में सीबीआई कोर्ट भोपाल में ट्रायल चल रहा है।
ईडी की कार्रवाई और मनोवैज्ञानिक दबाव
मनोज परमार ने अपने सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख किया कि उनकी मानसिक स्थिति लगातार खराब हो रही थी, खासकर ईडी की लगातार कार्रवाई के कारण। उनके अनुसार, ईडी के अधिकारियों द्वारा उन पर अत्यधिक मानसिक दबाव डाला गया था, और यह घटनाक्रम उनके आत्महत्या के कदम का कारण बना।

गाली-गलौज और मारपीट का आरोप
मनोज परमार के मुताबिक, ईडी के अफसर संजीत कुमार साहू और उनकी टीम ने पहले तो घर के कैमरे बंद किए, फिर गाली-गलौज करते हुए उनके साथ मारपीट की। उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों के फोन छीन लिए और बच्चों और पत्नी को कमरे में बंद कर दिया। इसके अलावा, जब ईडी की टीम घर में सर्चिंग कर रही थी, तो वे जूतों में सोफे से लेकर बेड तक सर्च करते रहे। यह सभी घटनाएं घर में डर और आतंक का माहौल बनाने के लिए की गईं।
राहुल गांधी से एक भावनात्मक अपील की
मनोज परमार ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से राहुल गांधी से एक भावनात्मक अपील की। उन्होंने लिखा कि उनकी आत्महत्या के कारण उनका परिवार मानसिक उत्पीड़न का शिकार था, खासकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के कारण। मनोज परमार ने राहुल गांधी से निवेदन किया, "मेरे बाद बच्चों की जिम्मेदारी आप और कांग्रेस पार्टी की है, ताकि यह संदेश जाए कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है।"
उनका कहना था कि कांग्रेस पार्टी से जुड़ने और पार्टी का काम करने के कारण ही ईडी द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा था, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बच्चे इस कठिन स्थिति में टूटकर निकलते हैं, तो वे कभी नहीं टूटेंगे। उन्होंने राहुल गांधी से अपनी अपील में कहा, "राहुल जी, बच्चों को अकेला मत छोड़ना।"
मनोज परमार के खिलाफ 5 दिसंबर को ईडी ने छापा मारा था, जिसमें उनके इंदौर और सीहोर स्थित चार ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। इस छापेमारी में कई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज और साढ़े तीन लाख रुपए का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया था। यह मामला पंजाब नेशनल बैंक के 6 करोड़ रुपए के फ्रॉड से संबंधित था, जिसमें मनोज परमार को गिरफ्तार भी किया गया था।












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