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MP News: करोड़ों के मालिक सौरभ शर्मा ने मध्य प्रदेश सरकार से मांगी जान की सुरक्षा, जानिए क्या है पूरा मामला

MP Saurabh Sharma News: ग्वालियर के चर्चित मामले में सौरभ शर्मा ने मध्य प्रदेश सरकार से अपनी और अपने परिवार की जान की सुरक्षा की गारंटी मांगी है। सौरभ ने एक पत्र के जरिए प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें और उनके परिवार को खतरे से बचाने के लिए सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी जान की सुरक्षा की गारंटी देती है, तो वह जांच एजेंसियों के सामने आकर हर जांच का खुलासा करने के लिए तैयार हैं।

Saurabh Sharma sought protection from MP government property worth crores and gold cash recovered

वकील का बयान: संपत्ति और धन का कनेक्शन राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स से

सौरभ के वकील ने प्रेस में बयान देते हुए कहा कि जब्त किया गया सोना, नगद राशि और अकूत संपत्ति सीधे तौर पर राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स से जुड़ी हुई है। वकील का कहना है कि सौरभ को जानबूझकर एक आसान निशाना बना दिया गया है और सारी जिम्मेदारी उसी पर डाली गई है, जबकि असल अपराधी राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र के बड़े लोग हैं।

सौरभ की जान को खतरा, सरकार से सुरक्षा की मांग

सौरभ ने पत्र में यह भी कहा कि अगर सरकार उनकी जान की सुरक्षा का आश्वासन देती है, तो वह बिना किसी डर के आगे आकर सभी तथ्यों और सबूतों का खुलासा करने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि वह अब तक इस मामले में सिर्फ इसलिए चुप रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा था।

वकील का स्पष्ट बयान: लोकायुक्त को करनी चाहिए प्रेस कांफ्रेंस

सौरभ के वकील ने यह भी कहा कि अगर लोकायुक्त को यह लगता है कि सौरभ को कोई खतरा नहीं है, तो वह एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर इस बात को स्पष्ट करें और यह भी बताएं कि वे सौरभ को सुरक्षा मुहैया कराएंगे। वकील का यह भी कहना था कि जांच एजेंसियों ने पहले ही यह मान लिया था कि सौरभ ही आरोपी है, जबकि असल अपराधी राजनीतिक और ब्यूरोक्रेट्स के लोग हैं, जो इस सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसियों का माइंड सेटअप और सौरभ की स्थिति

सौरभ के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों ने अपना माइंड सेटअप बना लिया था कि सौरभ ही इस मामले का मुख्य आरोपी है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह पुराना सिंडिकेट है और इसमें सौरभ का कोई दोष नहीं है। उनका कहना है कि जब्त की गई संपत्ति, सोना और नगद राशि सभी राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के हैं, और यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ा रैकेट है जो पिछले सात सालों से चल रहा है।

सौरभ के वकील का कहना था कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं हो सकता, क्योंकि इसमें एक सात साल का कांस्टेबल शामिल नहीं हो सकता। यह एक संगठित अपराध है, जिसका संबंध राजनीतिक और प्रशासनिक ताकतों से है।

आगे की कार्रवाई और सौरभ का रुख

सौरभ के पत्र और वकील के बयान से यह स्पष्ट होता है कि वह इस मामले में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अगर सरकार उनकी सुरक्षा का आश्वासन देती है, तो वह बिना किसी डर के इस मामले की पूरी जांच में सहयोग करेंगे और हर चीज का खुलासा करेंगे।

सौरभ शर्मा के ठिकानों से भारी संपत्ति और अनैतिक गतिविधियों का खुलासा

बता दे लोकायुक्त और आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने आरटीओ विभाग के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें अब तक 7.98 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई थी। सौरभ शर्मा भोपाल के शाहपुरा इलाके में जयपुरिया स्कूल की फ्रेंचाइजी खोलने वाला था, जिसमें चेतन सिंह गौर भी साझेदार थे। इस छापेमारी के दौरान कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिनमें सौरभ की संदिग्ध संपत्ति और अनैतिक गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ है।

चेतन सिंह गौर और सौरभ के नाम पर रजिस्टर्ड कार से भारी सोना और नकद बरामद

जांच के दौरान आयकर विभाग ने चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड एक कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए। यह बहुत बड़ी रकम और सोने की मात्रा थी, जो इस मामले को और अधिक गंभीर बना देती है। ये संपत्ति सौरभ और उसके सहयोगियों के संबंधों और गतिविधियों पर सवाल उठा रही है।

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