MP में "पोषण वाटिकाओं" से महिलाओं को मिलेगा स्वास्थ्य और बढ़ेगी समृद्धि
जर्मनी की संस्था के सहयोग से मप्र में स्वयं सेवी संस्थाओं और शासन के साथ मिलकर पोषण वाटिका अभियान चलाया जा रहा है। इसमें चुनिंदा इलाकों में छोटी-छोटी इकाईयों के रुप में पोषण वाटिकाएं तैयार कराई जा रही हैं।

Nutrition Gardens जर्मनी की संस्था के सहयोग से मप्र में स्वयं सेवी संस्थाओं और शासन के साथ मिलकर पोषण वाटिका अभियान चलाया जा रहा है। इसमें चुनिंदा इलाकों में छोटी-छोटी इकाईयों के रुप में पोषण वाटिकाएं तैयार कराई जा रही हैं। इनका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को शुद्ध और ताजी जैविक सब्जियां व पोष्टिक भोजन मिल सके। दो साल पहले छतरपुर जिले के बिजावर में पायलट प्रोजेक्ट के रुप में दो गांवों से प्रारंभ किया गया था। इसकी सफलता के बाद इसे पूरे छतरपुर जिले और अब मप्र में लागू किया जा रहा है।
बुंदेलखंड के छतरपुर में एक अनूठा मिशन चल रहा है। इसमें जर्मन संस्था के सहयोग से महिलाओं के समूह बनाकर पोषण वाटिकाएं तैयार कराई जा रही है। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। इसके लिए जिले के कुछ ब्लॉकों का चयन किया गया है। छतरपुर में जर्मन संस्था के सहयोग से जीआईजेड टीम से सृजन संस्था इसके लिए काम कर रही है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले के कई ब्लाकों में सामुदायिक पोषण वाटिका बनाई जा रही हैं। छतरपुर में जर्मन संस्था के सहयोग से जीआईजेड टीम से सृजन संस्था इसके लिए काम कर रही है।

मप्र के सीहोर व छतरपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट
जानकारी अनुसार सीहोर जिले के इछावर ब्लॉक और छतरपुर जिले के बिजावर ब्लॉक के ग्राम रगौली में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पोषण वाटिका का प्रयोग किया गया था। इसको आशातीत सफलता मिली है। वर्ष 2019 से छतरपुर सहित प्रदेश के दो जिलों में पोषण वाटिका को लेकर जर्मनी की संस्था के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट की कामयाबी से इस साल पोषण वाटिका पूरे मध्य प्रदेश में शुरू कर दी गई हैं। छतरपुर जिले में 75 पोषण वाटिका शुरू करने का लक्ष्य है। फिलहाल जिले के 4 ब्लाकों में काम शुरू हो गया है। छतरपुर ब्लाक में 19 गांवों का चयन किया गया है। इनमे से बनगाएं, सौंरा, बरकौन्हा और खोंप में पोषण वाटिका का काम शुरू कर दिया गया है।
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महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा, जमीन अनुबंध पर दी है
अधिकारियों के अनुसार पोषण वाटिकाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार भी दिलाया जा रहा है। इसके लिए समूह बनाकर उनको शासन की तरफ से ढाइ्र एकड़ जमीन पांच साल के लिए अनुबंध के आधार पर दी गई है। इस जमीन को तैयार कर महिलाएं फल, सब्जी, फूल, भाजी एक साथ खेत में उगाएंगी। इनको घर के लिए पौष्टिक सब्जी और भोजन तो मिलेगा ही उसके साथ उसे बाजार में बेचकर कमाई भी कर सकेंगी।












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