कर्नाटक में फंसे 40 मजदूरों की शिवपुरी वापसी, नौकरी के लिए हो रहे थे पीड़ित: ज्योतिरादित्य सिंधिया
कर्नाटक राज्य में फंसे 40 से ज्यादा मजदूरों को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा बयान सामने आया है उन्होंने कहा कि 3 माह पहले शिवपुरी के करीब 40 मजदूर भाई कर्नाटक नौकरी के लिए गए थे। 13 जनवरी 2024 को सूचना मिली कि सभी मजदूरों के परिवारजन उनसे बातचीत नहीं कर पा रहे क्योंकि उनका फोन नही लग रहा और सभी के परिवार वाले चिंतित हैं।
स्थिति की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने राज्य सरकार की मदद से स्थानीय पुलिस कर्मियों को कर्नाटक भेज शिवपुरी के 40 भाइयों को सफलता पूर्वक वापस ले आए। 22 जनवरी को अपने प्रवास में एक जन सभा के दौरान सिंधिया ने इस घटना की चर्चा करने हुए मुश्किल में फसे सभी भाइयों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की और मुश्किल की घड़ी में उनका साथ देने का विश्वास दिलाया।

दिनांक 13 जनवरी को, ग्राम घुटारी चक्क पडोरा कोलारस के एक स्वामी राम सिंह भिल्ला ने कर्नाटक राज्य के एक ठेकेदार, अर्जुन खारत, के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इस आवेदन में उन्होंने शिकायत की थी कि ठेकेदार ने उनके स्वजन और अन्य मजदूरों को बंधुआ बनाया और कर्नाटक ले गया है।
शिकायत के बाद कोलारस पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते की और कर्नाटक राज्य में फंसे 40 से ज्यादा मजदूरों को मुक्त कराया और इसके बाद जांच शुरू की। मजदूरों के बयान के अनुसार, डेढ़ महीना पहले ठेकेदार अर्जुन खारत ने गांव घुटारी चक्क पडोरा कोलारस में आकर कहा था कि वह प्रति लेबर के 600 रुपये मजदूरी देगा और खाना मुहैया कराएगा। उन्होंने मजदूरों से कहा कि वे कर्नाटक में गन्ना काटने के काम के लिए तैयार हो जाएं। गांव से कुछ मजदूरों ने उसकी पेशेवरी में तैयारी की और उनके साथ काम करने के लिए रवाना हुए।
इन मजदूरों ने कर्नाटक में गन्ने काटे और इसके बाद ठेकेदार ने उन्हें धमकाकर अपने साथ एक और गांव, ग्राम कोरवर थाना मदबोल, जिला कलबुर्गी, कर्नाटक ले गया। वहां पर भी मजदूरों ने कुछ दिन तक गन्ने काटे। इसके बाद मजदूरों ने इस अत्याचार की सूचना अपने गाँव वालों और ठेकेदार के खिलाफ दूसरों को फोन करके दी।












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