MP के पूर्व वित्तमंत्री राघवजी: 10 साल बाद धुला कुकृत्य का कलंक, हाईकोर्ट ने FIR की खारिज

मप्र में साल 2013 में सबसे अधिक चर्चित पूर्व वित्त मंत्री राघवजी का नौकर के साथ कुकर्म के मामले में अब उन्हें राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में एफआईआर को खारिज करने का आदेश दिया है। बता दें कि राघवजी के नौकर ने उन पर अप्राकृतिक कुकत्य का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में एक सीडी भी सामने आई थी, जिसके बाद राघवजी का राजनीतिक कॅरियर समाप्त हो गया था।

ragavji-bha

जबलपुर हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक कृत्य के मामले में विदिशा निवासी व पूर्व वित्तमंत्री राघवजी को बड़ी राहत दी है। उच्च न्यायालय के जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने राघवजी के विरुद्ध दर्ज एफआइआर निरस्त कर दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण पोर्ट फोलियों रखने वाले व्यक्ति की छवि धूमिल करने के लिए विरोधियों के इशारे पर एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। अपराधिक कार्यवाही में स्पष्ट रूप से दुर्भावना के भाव उपस्थित है। एकलपीठ ने एफआईआर को खारिज करने के आदेश दिए हैं।

भोपाल के हबीबगंज थाने में नौकर ने कराई थी एफआईआर
कोर्ट में प्रस्तुत मामले के अनुसार पूर्व वित्त मंत्री राघवजी के भोपाल स्थित सरकारी बंगले के गेस्ट रुम में रहने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने भोपाल के हबीबगंज थाने में उनके विरुद्ध धारा 377, 506 तथा 34 के अंतर्गत 7 जुलाई 2013 को एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता साल 2010 से 2013 तक राघवजी के सरकारी निवास में रहा। इस दौरान उसने कोई शिकायत नहीं की। इसके करीब तीन महीने बाद उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई। जिससे राघवजी भाई के राजनीतिक करियर पर विराम लग गया था। पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने भोपाल में दर्ज एफआईआर निरस्त करने हाईकोर्ट में 2016 में याचिका दायर की थी।

राजनीतिक दुर्भावना व षडयंत्र के तहत कराई एफआईआर
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि अनावेदक ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह उनके गृह जिले विदिशा का रहने वाला है। साल 2010 में वह नौकरी के लिए भोपाल आया था। वह वित्तमंत्री राघवजी के सरकारी बंगले में रहता था। राजनीतिक विरोधियों के इशारे और आपसी रंजिश के कारण शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कराई है। कोर्ट ने आदेश में उल्लेख किया है कि यह याचिका साल 2016 से लंबित है और न्यायालय का अभिमत है कि अपराधिक मामले में अभियुक्त को ट्रायल का सामना करना चाहिए। न्यायालय के आदेश है कि अपराधिक मामला दुर्भावना और निजी रंजिश के कारण दर्ज करवाया जाता है तो एफआईआर निरस्त की जा सकती है। बता दें कि हाईकोर्ट के एफआईआर खारिज करने के बाद भोपाल कोर्ट में चल रहा यह केस स्वत: ही खत्म हो गया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+