MP News: "गद्दार कौन?", दिग्विजय सिंह के खिलाफ पोस्टर विवाद सिंधिया के पुराने बयान ने गरमाई सियासत
MP News: मध्य प्रदेश में वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को लेकर सियासी जंग अपने चरम पर है। एक ओर भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) द्वारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को 'गद्दार' बताने वाले पोस्टर प्रदेश भर में लगाए गए, तो दूसरी ओर दिग्विजय सिंह ने करारा पलटवार करते हुए बीजेपी और बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप जड़ दिए।
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को लेकर शुरू हुआ सियासी घमासान अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुराने बयानों तक पहुंच गया है। 11 अप्रैल 2025 को भोपाल, रतलाम, गुना, और इंदौर में दिग्विजय सिंह के खिलाफ 'वतन, धर्म और पूर्वजों का गद्दार' बताने वाले पोस्टर लगाए गए, जिसके बाद उन्होंने एक्स पर बीजेपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर ISI के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया।

इस बीच, दिग्विजय ने 12 अप्रैल 2025 को एक पुराना बयान उजागर कर सियासी तूफान खड़ा कर दिया, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कथित तौर पर बीजेपी को 'ISI से प्रमाणित पार्टी' कहा था। दिग्विजय ने सवाल उठाया कि क्या BJP और BJYM ने इस बयान पर कभी ध्यान दिया, और 'गद्दार' की परिभाषा में कौन लोग आते हैं। इस विवाद ने मध्य प्रदेश की सियासत में नया रंग भर दिया है, और कांग्रेस व बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी तेज हो गई है।
पोस्टर विवाद की शुरुआत: "धर्म, वतन और पूर्वजों का गद्दार"
11 अप्रैल की रात प्रदेश के भोपाल, रतलाम, इंदौर, गुना सहित कई जिलों में ऐसे पोस्टर लगे, जिनमें दिग्विजय सिंह को वक्फ बिल का विरोध करने के लिए देश, धर्म और पूर्वजों का गद्दार बताया गया। पोस्टरों में साफ-साफ लिखा गया-"वक्फ बिल का विरोध करने वाले दिग्विजय सिंह, वतन के, धर्म के, पूर्वजों के गद्दार।"
रतलाम और गुना में इन पोस्टरों पर BJYM का नाम दर्ज था, वहीं इंदौर और भोपाल में पोस्टर गुपचुप तरीके से लगाए गए। रतलाम BJYM अध्यक्ष विप्लव जैन ने पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी स्वीकारते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। गुना के BJYM जिला अध्यक्ष वीरेंद्र धाकड़ ने कहा कि दिग्विजय सिंह 'हिंदू विरोधी' मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं।
कांग्रेस का तीखा प्रतिरोध: "यह लोकतंत्र पर हमला है"
पोस्टरों की खबर फैलते ही कांग्रेस आक्रामक हो गई। रतलाम, इंदौर और गुना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थानों पर प्रदर्शन किए और FIR दर्ज करने की मांग की। रतलाम में कांग्रेस नेता महेंद्र कटारिया ने इसे दिग्विजय सिंह की छवि धूमिल करने की "राजनीतिक साजिश" करार दिया।
इंदौर में सुरजीत सिंह चड्ढा और भोपाल में अन्य नेताओं ने भी थानों में शिकायत दर्ज की और कहा कि यह सीधा लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पोस्टरबाजों के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग करते हुए कहा, "सांसद को अपनी बात कहने का अधिकार है। उन्हें गद्दार कहना संविधान का अपमान है।"
दिग्विजय का पलटवार: "गद्दारों को पहचानो", ISI से जोड़े BJP कार्यकर्ताओं के नाम
12 अप्रैल को ग्वालियर में पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा,
"गद्दारों को पहचानो। जो संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करते हैं, वही असली गद्दार हैं।"
लेकिन बवाल तब बढ़ा जब 13 अप्रैल को उन्होंने X पर बीजेपी और बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं के नाम सार्वजनिक कर उन्हें ISI के लिए जासूसी करने का आरोपी बताया। उनकी पोस्ट में जिन नामों का ज़िक्र है, उनमें शामिल हैं:
- बलराम सिंह (सतना, बजरंग दल प्रमुख)
- ध्रुव सक्सेना (भोपाल, BJP IT सेल)
- मनीष गांधी, त्रिलोक सिंह, मोहित अग्रवाल, मोहन भारती, संदीप गुप्ता, रितेश खुल्लर, कुश पंडित, जितेंद्र ठाकुर, रज्जन तिवारी
दिग्विजय ने लिखा कि "RSS और BJP देशभक्ति का ढोंग करते हैं, लेकिन उनके कार्यकर्ता ISI के लिए जासूसी करते पकड़े गए हैं। असली गद्दार वही हैं।" उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल गया और BJP ने इसे "देश को बदनाम करने वाली बयानबाजी" कहा।
BJP का जवाब: "गद्दार कौन है, देश जानता है"
BJP प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने तीखा पलटवार करते हुए कहा: "गद्दार कौन है, यह देश जानता है। दिग्विजय सिंह ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है। वक्फ बिल गरीब मुस्लिमों के लिए है, पर वे इसे वोटबैंक के चश्मे से देख रहे हैं।"
विधायक रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का हर बयान सिर्फ मुस्लिमों को खुश करने के लिए होता है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "दिग्विजय सिंह का इतिहास संविधान विरोधी बयानों से भरा है। उन्होंने हमेशा सनातन धर्म का अपमान किया है।"
वक्फ संशोधन बिल- क्या है विवाद की जड़?
वक्फ संशोधन बिल 2025 हाल ही में संसद से पास हुआ है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया है। सरकार का कहना है कि इस बिल का मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और लाभ गरीब मुस्लिमों तक पहुंचाना है। लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।
राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने इस बिल का पुरजोर विरोध करते हुए कहा था:
"यह संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। यह सरकार हिंदू-मुस्लिम विभाजन को बढ़ावा दे रही है।"
जासूसी का पुराना इतिहास, आरोप बनाम जवाब
दिग्विजय सिंह ने जिन नामों का जिक्र किया है, वे कोई नई बात नहीं है। 2017 में भोपाल में ध्रुव सक्सेना सहित 11 लोगों को ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में ATS ने गिरफ्तार किया था। बलराम सिंह को भी सतना से पकड़ा गया था।
दिग्विजय पहले भी कह चुके हैं
"जितने ISI एजेंट पकड़े गए, वे सब बजरंग दल और BJP से जुड़े थे।" हालांकि BJP इन आरोपों को खारिज करती आई है और कहती है कि ये व्यक्ति संगठन से औपचारिक रूप से जुड़े नहीं थे।
प्रशासन की भूमिका और पुलिसिया जांच
- रतलाम: पोस्टर लगते ही हटाए गए, SP राकेश खाखा ने जांच का भरोसा दिया।
- इंदौर: कांग्रेस की शिकायत पर DCP अभिनय विश्वकर्मा ने प्रारंभिक जांच शुरू की।
- गुना और भोपाल: पोस्टर हटवाए गए, तनाव की स्थिति नहीं बनने दी गई।
जन प्रतिक्रिया और सियासी असर
- सोशल मीडिया पर इस विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। जहां कांग्रेस समर्थकों ने इसे 'संवैधानिक अधिकारों की रक्षा' की लड़ाई बताया, वहीं बीजेपी समर्थक इसे 'देशविरोधी बयानों' का जवाब करार दे रहे हैं।
- कांग्रेस के केके मिश्रा ने कहा, "दिग्विजय सिंह वैचारिक योद्धा हैं। उनका कद पोस्टरों से कम नहीं किया जा सकता।"
- वहीं BJYM के सौगात मिश्रा ने तंज कसते हुए लिखा, "दिग्विजय सिंह को देश अब गंभीरता से नहीं लेता। वे सिर्फ विवादों के सहारे जीवित हैं।"
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