MP News: महाराष्ट्र के पुणे हिट एंड रन केस में पुलिस की कार्रवाई जारी, उमरिया-जबलपुर के इंजीनियर की हुई थी मौत
Pune Car Accident: महाराष्ट्र के पुणे में रविवार को कल्याणी नगर इलाके में एक तेज रफ्तार पोर्शे कार ने एक बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर के बाद बाइक सवार कई मीटर तक घिसटते चले गए। इस हादसे में बाइक पर सवार दो युवाओं, अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा, की मौत हो गई।
दोनों आईटी इंजीनियर थे और मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, लेकिन वर्तमान में पुणे में रह रहे थे। अनीश के दोस्त अकिब मुल्ला ने येरवडा पुलिस स्टेशन में इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई।

पुणे हिट एंड रन केस में मारे गए मध्य प्रदेश के दोनों इंजीनियरों का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। अश्विनी कोष्टा का शव जबलपुर और अनीश अवधिया का शव उमरिया में सोमवार देर शाम पहुंचे। दोनों की उम्र 25 साल थी और उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
हादसा 18 मई की रात 2:15 बजे हुआ था, जब अश्विनी और अनीश एक रेस्टोरेंट से निकलकर बाइक से जा रहे थे। कल्याणी नगर के पास हाई स्पीड पोर्शे कार ने उन्हें कुचल दिया। अश्विनी और अनीश की मौके पर ही मौत हो गई थी। कार पुणे के एक बिल्डर के नाबालिग बेटे द्वारा चलाई जा रही थी, जो नशे में था।
किशोर न्याय बोर्ड ने घटना के 15 घंटे के भीतर ही नाबालिग को जमानत दे दी और उसे दुर्घटनाओं पर निबंध लिखने का आदेश दिया। वहीं, मंगलवार सुबह पुलिस ने नाबालिग के पिता और बिल्डर विशाल अग्रवाल को संभाजीनगर से गिरफ्तार किया। जिस बार में नाबालिग ने शराब पी थी, उसके मालिक और मैनेजर को भी गिरफ्तार किया गया है।

सबकी लाड़ली थी अश्विनी
अश्विनी की फैमिली जबलपुर के साकार हिल्स में रहती है। परिवार में सबसे छोटी होने के कारण वह सबकी लाड़ली थी और घरवाले उन्हें प्यार से आशी बुलाते थे। उनके बड़े भाई सम्प्रित बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पिता सुरेश कोष्टा जबलपुर में बिजली विभाग में कार्यालय सहायक के रूप में कार्यरत हैं। अश्विनी के माता-पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है।
अश्विनी पिछले 2 साल से पुणे में रह रही थीं। इससे पहले वह अमेजन कंपनी में काम करती थीं और हाल ही में जॉनसन कंट्रोल कंपनी में स्विच किया था। 14 जनवरी को उन्होंने अपना जन्मदिन जबलपुर में परिवार के साथ मनाया था।
भाई देवेश अवधिया ने नम आंखों से बड़े भाई अनीश को दी मुखाग्नि
अनीश उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली के निवासी थे। उनकी मौत के बाद उनकी मां और दादी बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। अनीश एक माह पहले ही घर आए थे और कंपनी से फोन आने के बाद वापस पुणे लौट गए थे। उन्होंने पुणे से ही ग्रेजुएशन किया और यहीं नौकरी मिल गई थी।
अनीश के छोटे भाई देवेश अवधिया ने नम आंखों से बड़े भाई को मुखाग्नि दी। देवेश पुणे में अनीश के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसने बताया कि अनीश ने घर में अपने लिए कमरे का रीनोवेशन कराया था।
परिजनों ने की मांग
पिता सुरेश कोष्टा ने कहा, "बच्चे को कार देना गलत है। हमने अपने बच्चों को बालिग होने तक गाड़ी नहीं दी।" अश्विनी के भाई सम्प्रित ने बताया, "अश्विनी ने पुणे से ही पढ़ाई की थी और वहीं नौकरी करने लगी थी। आखिरी बार उन्होंने पापा से बात की थी और बताया था कि पार्टी में जा रही हैं। उसी रात हादसे की खबर आई।"
अश्विनी के बड़े पापा जुगल किशोर कोष्टा ने कहा, "वह बहुत प्रतिभाशाली बच्ची थी। हम सदमे में हैं और अपने दुख को शब्दों में बयान नहीं कर सकते। कार ड्राइवर पर कार्रवाई होनी ही चाहिए, साथ ही उसके पेरेंट्स पर भी एक्शन लिया जाना चाहिए। बिल्डर पुणे का नामी व्यक्ति है, इसलिए शायद उसके बेटे को 15 घंटे में बेल मिल गई।"












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