पन्ना की धरती से निकले हीरों पर किसका हक? जानिए ₹ 200 में रातों-रात अमीर बनने की पूरी प्रोसेस
पन्ना, 8 दिसम्बर। साल 1973 में आई फिल्म 'हीरा पन्ना' का एक गाना है-'पन्ना की तमन्ना है कि हीरा उसे मिल जाए' यूं तो इस गाने का मध्य प्रदेश में हीरे उगलने वाली धरती पन्ना से कोई लेना-देना नहीं, मगर यहां पर हीरा मिलने की हर किसी की तमन्ना पूरी हो सकती है। उसके लिए बाकायदा एक प्रक्रिया है।

हीरा कार्यालय पन्ना मध्य प्रदेश
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित कार्यालय के अधिकारी, खदान में काम करने वाले मजदूरों ने दो सौ रुपए खर्च करने से लेकर जेब में लाखों रुपए आने तक की पूरी प्रक्रिया कुछ यूं समझाई।

पन्ना में हीरे से जुड़ी जानकारी
इस खबर में पन्ना के हीरों को लेकर आपके जेहन में उठने वाले सभी सवालों के जवाब मिलेंगे। मसलन-पन्ना में हीरा कैसे ढूंढा जाता है? पन्ना में हीरा कहां-कहां पाया जाता है? खदान में मिले हीरे पर किसका हक होता है? कौन व्यक्ति हीरे के तलाश कर सकता है? हीरे की क्वालिटी और कीमत कैसे तय होती है?

पन्ना में हीरा पाने का पहला कदम
पन्ना स्थित हीरा कार्यालय के हीरा पारखी अनुपम सिंह बताते हैं कि पन्ना में हीरा ढूंढने के लिए कहीं का कोई भी व्यक्ति खुदाई कर सकता है। इसके लिए सबसे पहला कदम हीरा कार्यालय से पट्टा (लाइसेंस) लेना होता है, जो तीन फोटो, आधार कार्ड की प्रति और दो सौ रुपए का चालान जमा करवाने पर मिलता है। पट्टा सिर्फ जनवरी से दिसम्बर तक के लिए ही वैध होता है। बाद में नया पट्टा लेना पड़ता है।

पट्टा लेने के बाद कैसे ढूंढें हीरा?
डायमंड ऑफिस कार्यालय पन्ना से पट्टा मिलने का मतलब होता है कि संबंधित व्यक्ति को विभाग की ओर से हीरा खदानों में 8 गुणा 8 मीटर की एक जगह अलॉट कर दी जाती है, जहां पर वह एक साल में कभी भी खुदाई करके हीरा ढूंढ सकता है। पन्ना जिले में हीरे की 25 खदानें हैं, जिनमें सरकारी (NMDC Panna) व निजी दोनों खदान शामिल है।

हीरे पर रॉयल्टी भी लगती है
किसी लाइसेंसधारी व्यक्ति को पन्ना की खदान में हीरा मिलने के बाद उसे डायमंड कार्यालय में वह हीरा जमा करवाना पड़ता है, जहां उसकी गुणवत्ता व कीमत तय होती है। फिर उसे नीलामी के लिए रख दिया जाता है। चाहे 100 रुपए का हो या एक करोड़ का उस पर सरकार साढ़े 12 प्रतिशत की दर से एक प्रतिशत टीडीएस समेत रॉयल्टी वसूलती है। शेष राशि लाइसेंसधारी व्यक्ति को दे दी जाती है।

हीरे की नीलामी कैसे होती है?
हीरा कार्यालय पन्ना मध्य प्रदेश में 200 से 250 हीरे एकत्रित होने पर उन सबको एक साथ ऑफ़लाइन नीलामी में रखा जाता है, जिसमें मुम्बई, भोपाल, सूरत, दिल्ली समेत कई जगहों के हीरा व्यापारी हिस्सा लेते हैं। सरकारी दर से बोली शुरू होती है। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को हीरा सौंप दिया जाता है। पन्ना की धरती में इतने हीरे निकलते हैं कि औसतन हर तीन-चार माह बाद हीरों की नीलामी होती है।

पन्ना में कितने तरह के हीरे मिलते हैं?
पन्ना की धरती मुख्यतय तीन तरह के हीरे उगलती है। उनकी गुणवत्ता की पहचान हीरा कार्यालय के पारखी (डायमंड वैलुअर) अनुपम सिंह करते हैं। यहां पर जेम (व्हाइट कलर), ऑफ कलर (मैला रंग) और इंडस्ट्रियल क्वालिटी (कोकाकोला कलर) के डायमंड पाए जाते हैं। सबसे महंगा जेम डायमंड होता है। ऑफ कलर का डायमंड फैंसी आइटम में काम आता है जबकि इंडस्ट्रियल क्वालिटी के डायमंड से कांच काटे जाते हैं।

2018 में मिला था ढाई करोड़ का एक हीरा
पन्ना में हीरे के कैरेट व उसके कलर से कीमत तय होती है। यहां पर सौ रुपए से लेकर ढाई करोड़ रुपए तक का एक हीरा मिल चुका है। पन्ना में साल 1961 से हीरा कार्यालय शुरू हुआ था। डायमंड कार्यालय पन्ना के 61 साल के इतिहास में साल 2018 में कृष्ण कल्याणपुर के पट्टी क्षेत्र में मोतीलाल लाल प्रजापति 42 कैरेट का हीरा मिला था, जो नीलामी में ढाई करोड़ रुपए का बिका था। हाल ही इसी इलाके के मुलायम सिंह यादव को एक दिन में सात हीरे मिले।

हीरा मिलने के बाद जेब में पैसे कैसे आते हैं?
हीरे पर सिर्फ लाइसेंसधारी व्यक्ति का ही हक होता है। चाहे उसने खुद खुदाई की हो या फिर मजदूर से खुदाई करवाई हो। इसके बाद हीरे को डायमंड कार्यालय में जमा करवा दिया जाता है। कार्यालय उसे नीलामी में रखता है। नीलामी में हीरे पाने वाले को व्यापारी को सम्पूर्ण राशि के भुगतान के लिए एक माह का समय दिया जाता है।
नीलामी के एक महीने में हीरे मालिक की जेब में पैसे आ जाते हैं। व्यापारी द्वारा समय पर भुगतान नहीं करने पर उसकी पांच हजार रुपए की जमानत राशि जब्त करके सरकारी खाते में डाल दी जाती है और हीरा अगली नीलामी में रखा जाता है।

पन्ना में ही क्यों मिलते हैं हीरे?
हीरा पारखी अनुपम सिंह कहते हैं कि भारत में अब तक का सबसे बड़ा हीरा भंडार पन्ना की धरती है। यह कुदरत की देन है। वैसे अधिक ताप वाली भूमि में हीरे पाए जाते हैं, जो पन्ना की भूमि में है। इसके अलावा पड़ोसी जिले छतरपुर में पन्ना टाइगर रिजर्व से लगते बक्सवाहा क्षेत्र में भी हीरे निकलते हैं।

एक सप्ताह में बन गई लखपति
पन्ना जिले में डायमंड खदान में भाग्य आजमाने वालों की किस्मत कभी भी पलट सकती है। इसका उदाहरण सकरिया खदान की वो महिला मजदूर है, जिसके हाथ महज एक सप्ताह खुदाई करने पर ही दस लाख का हीरा लग गया था।

कैसे पता लगता है-'ये ही हीरा है'
पन्ना जिले में छह दशक से हीरे निकाले जा रहे हैं। ऐसे में यहां के खदान मजदूरों को हीरे के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है। वैसे भी खुदाई के दौरान अगर कोई हीरे जैसे वस्तु मिलती है तो लोग खदान पर ही मौजूद हीरा सिपाही से पूछ लेते हैं कि वह हीरा है या नहीं। फिर भी कोई शक होने पर हीरा कार्यालय ले जाकर जांच करवा लेते हैं।

पन्ना में किस जगह मिलता है हीरा?
-पन्ना जिला मुख्यालय से पूर्व दिशा में 40 किलोमीटर तक। पहाड़ीखेरा क्षेत्र में जो सतना जिले से लगता है
-पन्ना जिला मुख्यालय से पश्चिम दिशा में 15 किलोमीटर तक। जरुआपुर गांव के आस-पास के इलाका।
-पन्ना जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में भी 15 किलोमीटर तक। ढलान चौकी के आस-पास का क्षेत्र।
-पन्ना जिला मुख्यालय से उत्तर दिशा में 12 किलोमीटर तक। सतना रोड पर सकरिया के आस-पास का इलाका।

पन्ना में कितने फीट नीचे मिलता है डायमंड?
पन्ना के भूगर्भ में हीरा पाया जाता है। जमीन पर सबसे पहले तीन से लेकर 30 फीट तक की गहराई में ग्रेवल निकलती है। फिर ग्रेवल के बाद की जमीन में हीरे मिलने की संभावना रहती है। इस मिट्टी की खुदाई के साथ-साथ पानी से धुलाई की जाती है, ताकि कोई चमकता हुआ हीरा नजर आ जाए।
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