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"पहलगाम" पाकिस्तान बॉर्डर से बहुत दूर, फिर कैसे आतंकी आकर चले भी गए, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा सवाल

Pahalgam news: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने केंद्र सरकार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान सीमा से दूर बसे पहलगाम में आतंकियों का पहुंचना और फिर आसानी से सुरक्षित लौट जाना, यह दर्शाता है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था के भीतर ही कोई 'भितरघाती' मौजूद हैं, जो इन घटनाओं को अंजाम दिलवा रहे हैं।

मुरैना के अल्प प्रवास पर आए शंकराचार्य शुक्रवार को शासकीय गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उनके साथ जौरा विधायक पंकज उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा और ग्रामीण जिलाध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर भी मौजूद थे।

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"पहले भीतरघातियों की पहचान जरूरी"

अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने तीखे स्वर में कहा,"पहलगाम पाकिस्तान बॉर्डर से बहुत दूर है। फिर आतंकी वहां कैसे पहुंचे और पर्यटकों को मारकर वापस भी चले गए? इसका सीधा मतलब है कि हमारे सिस्टम के भीतर ही कुछ लोग इन आतंकियों के मददगार हैं।"

उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब हमारे गृह मंत्री ने खुद कश्मीर जाकर यह भरोसा दिलाया था कि अब राज्य आतंकवाद से मुक्त है, तो फिर ऐसे हमले कैसे हो रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि हमले के दौरान लगभग 40 से 50 मिनट तक फायरिंग होती रही, और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार वहां कोई प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं था।

"Pahalgam के बाद भी कोई जिम्मेदार नहीं ठहराया गया"

शंकराचार्य ने पुलवामा हमले को याद दिलाते हुए कहा कि, "उस वक्त भी यही सरकार थी। लेकिन आज तक किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। अगर घर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो ऐसे हमले आगे भी होते रहेंगे।"

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को चाहिए कि सबसे पहले घर के भीतर बैठे 'आस्तीन के सांपों' को कुचला जाए, उसके बाद ही बाहरी दुश्मनों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

Pahalgam News:"पीएम मोदी पर भरोसा डगमगाया है"- Shankaracharya

अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद दिलाया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के पास इतने संसाधन होते हैं कि वह आतंकी हमलों को रोक सकता है।

"अब जब आप पिछले 11 सालों से प्रधानमंत्री हैं, तो फिर आप क्यों नहीं रोक पाए? हमलावर कौन थे, कहां से आए - यह तो हमले के बाद पता चल जाता है, लेकिन हमले से पहले क्यों नहीं?" उन्होंने कहा कि इस सवाल से जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।

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Pahalgam News: "बागेश्वर धाम भी राष्ट्रहित में निकाले पर्ची"

जब मीडियाकर्मियों ने बागेश्वरधाम सरकार पर तंज कसते हुए पूछा कि "वे हर किसी की पर्ची निकालते हैं, तो इस हमले के पीछे कौन है, यह क्यों नहीं बताया?", तो शंकराचार्य ने कहा, "राष्ट्रहित में बागेश्वरधाम के महाराज को भी कभी-कभी इस प्रकार की पर्चियां निकालनी चाहिए।"

पहलगाम हमले कैसे हुआ

22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2:45 बजे, पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। हमलावरों ने कथित तौर पर पर्यटकों की धार्मिक पहचान पूछी और हिंदुओं को निशाना बनाया। इस हमले में उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, नेपाल, और यूएई के पर्यटक मारे गए। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली। सुरक्षा एजेंसियों ने तीन संदिग्ध आतंकियों-आसिफ फौजी, सुलेमान शाह, और अबु तल्हा-के स्केच जारी किए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच के लिए पहलगाम पहुंच चुकी है।

पहलगाम की भौगोलिक स्थिति

पहलगाम, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो श्रीनगर से लगभग 70 किलोमीटर और पाकिस्तान की सीमा (लाइन ऑफ कंट्रोल) से करीब 200 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र अमरनाथ यात्रा का आधार शिविर भी है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि इतनी दूरी होने और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद आतंकी पहलगाम जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में घुस आए। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, "पहलगाम कोई पीओके बॉर्डर से लगा इलाका नहीं है। देश में सबसे ज्यादा सुरक्षा बल कश्मीर में तैनात हैं, फिर भी आतंकी कत्लेआम कर चले गए।"

तीखे तेवर, कड़े सवाल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का यह बयान एक ओर जहां देश की सुरक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल उठाता है, वहीं उन्होंने सरकार से यह अपेक्षा भी जताई कि वह सिर्फ राजनीति न करे, बल्कि घटनाओं की ज़िम्मेदारी तय कर कार्रवाई करे।

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