OPINION: 81 लाख से अधिक किसानों के कल्याण में जुटी है मध्य प्रदेश सरकार
MP News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए कई तरह की पहल कर रही है। इन्हीं में से एक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना है, जो किसानों को सीधे वित्तीय राहत मुहैया करवाती है। इस योजना के तहत किसानों के खातों में सालाना 2,000 रुपए की तीन किस्तों में 6,000 रुपए जमा किए जाते हैं। हाल ही में देश के करोड़ों किसानों को ऐसी ही एक किस्त आ भी चुकी है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के बाद अब मध्य प्रदेश के किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत मिलने वाली किस्त की रकम खाते में पहुंचने का बेसब्री से इंतजार है; और माना जा रहा है कि डॉ मोहन यादव सरकार दिवाली से पहले ही प्रदेश के अन्नदाताओं को खुशियों की यह सौगात दे सकती है।

एमपी के किसानों को सालाना मिलती है 12,000 रुपए की मदद
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की तरह ही एमपी सरकार भी मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत राज्य के किसानों के खातों में 2,000-2,000 रुपए की तीन किस्तों में सालाना 6,000 रुपए सीधे ट्रांसफर करती है।
इस तरह से प्रदेश के किसानों को कुल मिलाकर सालाना 12,000 रुपए की सरकारी सहायता मिल जाती है और महीने के हिसाब से 1,000 रुपए की बदौलत उन्हें आर्थिक तौर पर बड़ी राहत मिल जाती है।

रबी की फसल की तैयारी में किसानों को मिलेगी मदद
खरीफ की फसल काटने के बाद किसान अब रबी सीजन की तैयारी कर रहे हैं। किसानों के लिए ऐसे समय पर यह सहायता काफी फायदेमंद साबित हो रही है; और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का पैसा भी आ जाने से उनके हौसले में और चार चांद लगने की संभावना है।

किसानों को दिवाली गिफ्ट दे सकती है एमपी सरकार
एमपी सरकार की ओर से किसानों के खातों में यह धनराशि आमतौर पर पीएम किसान सम्मान निधि योजना के पैसे प्राप्त होने के कुछ ही समय बाद आ जाती है। इसलिए प्रदेश के किसान काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें यकीन है कि दिवाली से पहले ही मोहन यादव सरकार भी उन्हें यह राहत दे सकती है।

81 लाख परिवारों के घर खुशियां बिखेरेगी एमपी सरकार
मध्य प्रदेश में 81 लाख से ज्यादा किसानों को इस योजना का लाभ मिलता है। मतलब, यह धनराशि देखने में बहुत ही मामूली भले ही लगती हो, लेकिन यूं समझ लीजिए कि इससे 81 लाख से अधिक परिवारों को खुश होने का सरकार अवसर देती है।

अन्नदाताओं की जीवन रेखा बन चुकी हैं ये योजनाएं
छोटे और मझोले किसानों को खेती के समय बहुत ही छोटी-छोटी जरूरतों से जूझना पड़ता है। इसमें यह रकम बहुत ही मदद के काम आती है और एक तरह से किसानों के लिए जीवन रेखा की भूमिका निभाती है।












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