मोकलपुर-चैनपुरा में अब महिलाओं की सरकार, सरपंच-पंच सभी माहिलाएं
सागर, 7 जून। मप्र में सागर जिले की मोकलपुर और चैनपुरा ग्राम पंचायत में अब महिलाओं का शासन चलेगा। दोनों पंचायतों के अधीन आने वाले ग्रामीणों ने यह निर्णय लिया है कि उनकी पंचायतों में सरपंच और पंच पदों पर महिलाएं काबिज होंगी, इनके चुनाव के लिए वोटिंग नहीं कराई जाएगी बल्कि सभी निर्विरोध निर्वाचित होंगी, इसके लिए एक पद पर आपसी सहमति से एक-एक नामांकन ही जमा किया गया है।

मप्र के सागर जिले में मोकलपुर और चेनपुरा ग्राम पंचायतों ने अनुकरणीय और समरसता का अनूठा उदाहरण पेश किया है। यहां पर पंचायत चुनाव के दौरान दोनों पंचायतों में पंच-सरपंच के चुनाव निर्विरोध होंगे। इतना ही नहीं मोकलपुर और चैनपुरा में सरपंच और पंच पदों पर सभी महिलाएं चुनी जाएंगी। एक पद पर एक ही नामांकन जमा हुआ है। मोकलपुर में सरपंच पद पर प्रेमरानी चढार को सरपंच बनाने तो चैनपुरा में रागिनी हरीशचंद्र सिंह को सरपंच बनाया गया है। मोकलपुर में 20 वार्ड और चैनपुरा में 12 वार्ड हैं, इन सभी पर भी महिलाएं ही निर्विरोध चुनी गई हैं। मोकलपुर सागर जनपद के अंतर्गत आती है। बीते रोज सोमवार को नामांकन जमा करने का अखिरी दिन था। जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो गई कि इन दोनों पंचायतों में चुनाव की आवश्यकता नहीं पडेगी। मोकलपुर सरपंच का पद अनुसूचित जाति एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
मोकलपुर लगातार दूसरी दफा निर्विरोध, महिला सशक्ति का मॉडल बना
सागर जनपद की मोकलपुर ग्राम पंचायत में बीते चुनाव में भी पूरी पंचायत निर्विरोध चुनी गई थी। सबसे अहम बात कि 2014 में भी यहां सर्वसम्मति से महिलाएं ही निर्विरोध चुनकर आई थीं। इस दफा भी यहां के 20 वार्डो में पंच का एक-एक और सरपंच के लिए एक ही पर्चा भरा गया। सभी महिला प्रतिनधि यहां निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। मोकलपुर में अब फिर महिलाओं की सरकार काबिज होने जा रही है।

इनकी मेहतन रंग लाई, बनाई सहमति
मोकलपुर क्षेत्र में मध्य्प्रदेश खनिज विकास निगम के उपाध्यक्ष और मोकलपुर ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच राजेन्द्र सिंह मोकलपुर खासा प्रभाव रखते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच चुनावों से मोकलपुर ग्राम पंचायत में सिर्फ एक दफा चुनाव हुए है। गांव वालो ने हमेशा चौपाल पर बैठकर निर्विरोध की परम्परा बनाए रखी है। लगातार दूसरी दफा महिलाओं की पूरी पंचायत सौंपने की सफल परम्परा आगे बढ़ रही है। इस दफा उनके बेटे व पूर्व सरपंच पुष्पेंद्र सिंह ने काफी प्रयास करके गांव के लोगों की बैठक बुलाकर सरपंच और पंच महिलाओं को चुनने पर सहमति बनाई थी। जिसके बाद प्रेमरानी चढ़ार को सरपंच बनाने का निर्णय गया था। इसी कारण पंचायत चुनाव में किसी ओर ने नामांकन जमा नहीं किया है।












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