MP: मगरमच्छ का ये कैसा रेस्क्यू? गाड़ी से गिरा, छोड़कर चले गए वन अधिकारी!

सागर, 18 अगस्त। मप्र के दमोह जिले में एक मगरमच्छ का रेस्क्यू करने वाले वन अमले की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। उनकी लापरवाही से कई लोगों की जान खतरे में पड़ते-पड़ते बची। दरअसल बीते रोज अधरौटा में स्कूल के पास से रेस्क्यू किए गए एक मगरमच्छ को सिंगौरगढ़ ले जाते समय वन विभाग के अमले की लापरवाही से मगरमच्छ जबेरा के पास स्टेट हाईवे पर गाड़ी से गिर गया। वन अमला खाली गाड़ी लेकर वन अभयारण्य पहुंच गया। इधर हाईवे पर मगरमच्छ देखकर राहगीरों के होश फाख्ता हो गए।

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    MP: मगरमच्छ का ऐसा कैसा रेस्क्यू, गाड़ी से गिरा, छोड़कर चले गए वन अधिकारी!

    मगरमच्छ दमोह-जबलपुर मार्ग पर जबेरा के पास स्टेट हाईवे पर गिर गया

    मगरमच्छ दमोह-जबलपुर मार्ग पर जबेरा के पास स्टेट हाईवे पर गिर गया

    दमोह वन विभाग में करीब पांच फीट लंबे मगरमच्छ को रेस्क्यु कर तालाब में छोड़ने ले जा रहे वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से मगरमच्छ दमोह-जबलपुर मार्ग पर जबेरा के पास स्टेट हाईवे पर गिर गया। इधर वन अमला पीछे मुडे़ बगैर बातचीत करते हुए गाड़ी लेकर सिंगौरगढ़ पहुंच गया। इधर हाईवे पर जब राहगीरों ने मगरमच्छ को देखा तो लोगों के होश उड़ गए। दोनों तरफ से आवागमन बंद हो गया। बाद में इलाके के कुछ युवाओं ने हिम्मत कर उसे लाठियों के सहारे एक सड़क किनारे खाली जमीन की तरफ कर दिया। मगरमच्छ पर वहीं लोग नजर बनाए रहे। वन विभाग के अमले को सूचना दी गई, तब पता चला कि मगरमच्छ तो रास्ते में ही गाड़ी से कूद गया था।

    बीट गार्ड को बुलाया तब उन्होंने स्थिति संभाली

    बीट गार्ड को बुलाया तब उन्होंने स्थिति संभाली

    स्टेट हाइवे पर मगरमच्छ को देख लोग काफी दहशत में आ गए थे। वह कभी इधर जाए तो कभी उधर उसे भागने को रास्ता तक मिल पा रहा था। गनीमत यह रही कि उसने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। मौके पर मौजूद लोगों के पास बीट गार्ड राजेंद्र चंद्रपुरिया का नंबर था, सो तत्काल फोन कर उन्हें बुला लिया गया। उन्होंने एक लाठी के सहारे मगरमच्छ को खेत में लगी जाली कि तरफ कर दिया। वह भी डरा-सहमा झाड़ियों में दुबका बैठा रहा।

    रेंजर ने टीम से संपर्क किया तो वे बिना मगरमच्छ के सिंगौरगढ़ पहुंच चुके थे

    रेंजर ने टीम से संपर्क किया तो वे बिना मगरमच्छ के सिंगौरगढ़ पहुंच चुके थे

    बीट गार्ड ने रेंजर को सड़क पर जबेरा के पुरानयाऊ के पास मगरमच्छ के होने की सूचना दी तो उन्होंने अधरौटा से मगरमच्छ का रेस्क्यु करने वाली टीम से संपर्क किया था। पता चला कि टीम तो सिंगौरगढ़ तालाब पहुंच चुकी है, लेकिन गाड़ी में मगरमच्छ नहीं था। हास्यापद स्थिति निर्मित होने के बाद उन्हें जानकारी लगी तो वे मगर को रास्ते में गिराते हुए खाली गाड़ी लेकर तालाब पहुंच गए हैं। वापस लौटे और एक बार फिर मगमच्छ का रेस्क्यु आॅपरेशन कर उसे जाली में कैद किया गया।

    तालाब किनारे छोड़ा तो सरपट पानी में उतर गया

    तालाब किनारे छोड़ा तो सरपट पानी में उतर गया

    दो दफा रेस्क्यु के बाद और करीब दिनभर इधर से उधर इंसानों द्वारा खदेडे़ जाने के बाद मगरमच्छ भी परेशान हो चुका था। उसे जैसे ही वन कर्मरियों ने सिंगौरगढ़ ले जाकर तालाब के पास किराने पर जाल से आजाद किया तो वह चंद सेकंट तो रुका, लेकिन जैसे ही उसे पानी का अहसास हुआ तो वह सरपट तालाब की रैलिंग के नीचे से सीधे पानी में उतर गया।

    सिंगौरगढ में आधा दर्जन से अधिक मगरमच्छ हो गए

    सिंगौरगढ में आधा दर्जन से अधिक मगरमच्छ हो गए

    वन विभाग के अधिकारियों के बताए अनुसार वन्य प्राणी अभयारण्य सिंगौरगढ़ के तालाब में वर्तमान में करीब आधा दर्जन मगरमच्छ हो गए हैं। कुछ तो यहां पहले से प्राकृतिक रुप से मौजूद थे, बाद में जिले के अन्य इलाकों से रेस्क्यु कर लाए गए मगरमच्छ को इस तालाब में छोड़ा गया है। यहां का वातावरण मगरमच्छों के लिए प्राकृतिक रुप से आवास है।

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