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MP News: नर्मदा नदी में डूबे दो युवक, विवेकानंद घाट पर हादसा, छोटा भाई किनारे से देखता रहा, रेस्क्यू जारी

नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद), मध्य प्रदेश में रविवार, 15 जून 2025 की शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब नर्मदा नदी के विवेकानंद घाट (जिसे सेठानी घाट के नाम से भी जाना जाता है) पर दो युवक गहरे पानी में डूब गए। इस हादसे में इटारसी के 20 वर्षीय दिलखुश ठाकुर और 17 वर्षीय यश मेहरा की जान खतरे में पड़ गई, जबकि दिलखुश का छोटा भाई, 17 वर्षीय कृष्णा ठाकुर, किनारे पर नहाते हुए यह त्रासदी देखता रहा।

घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें दोनों युवक नदी में डूबते दिखाई दे रहे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार रात अंधेरे के कारण रोक दिया गया, और अब सोमवार, 16 जून 2025 की सुबह 6 बजे से फिर से सर्च अभियान शुरू किया जाएगा। यह हादसा न केवल परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता की कमी को भी उजागर करता है।

MP Two youths drowned in Narmada river accident at Vivekananda Ghat rescue operation underway

हादसे का विवरण

घटना रविवार शाम करीब 5 बजे नर्मदापुरम के विवेकानंद घाट पर हुई। इटारसी के रहने वाले तीन युवक-दिलखुश ठाकुर (20), यश मेहरा (17), और कृष्णा ठाकुर (17)-नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए आए थे। कोतवाली थाना प्रभारी सौरभ पांडे के अनुसार, तीनों युवक नहाने के दौरान घाट की सुरक्षा चेन को पार कर गहरे पानी की ओर चले गए। दिलखुश और यश गहरे पानी में पहुंच गए, जहां तेज धारा और गहराई के कारण वे डूबने लगे।

कृष्णा ठाकुर, जो किनारे पर नहा रहा था, ने अपने बड़े भाई और दोस्त को डूबते देखकर मदद के लिए चीखा, लेकिन घाट पर मौजूद लोगों ने कोई सहायता नहीं की। घटना का एक वीडियो, जो कथित तौर पर वहां मौजूद लोगों ने बनाया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में दोनों युवक पानी में संघर्ष करते और धीरे-धीरे डूबते नजर आ रहे हैं। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS ने इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है।

रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतियां

घटना की सूचना मिलते ही नर्मदापुरम पुलिस और होम गार्ड्स की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। कोतवाली थाना प्रभारी सौरभ पांडे के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, जो करीब दो घंटे तक चला। नर्मदा नदी की तेज धारा और गहराई के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं। रविवार रात अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा।

थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने बताया, "हमने होम गार्ड्स और स्थानीय गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन अंधेरे के कारण इसे रोकना पड़ा। सोमवार सुबह 6 बजे से स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की एक विशेष टीम के साथ सर्च अभियान फिर से शुरू किया जाएगा।" पुलिस ने उम्मीद जताई है कि सोमवार सुबह दोनों युवकों के शव बरामद कर लिए जाएंगे।

दिलखुश ठाकुर और यश मेहरा इटारसी के निवासी थे। दिलखुश ने इस साल सीएम राइज स्कूल से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की थी और आगे की पढ़ाई के लिए बीए एलएलबी में दाखिला लेने की तैयारी कर रहा था। वह इस साल इंदौर जाने की योजना बना रहा था। यश मेहरा और कृष्णा ठाकुर ने इसी साल गुरुनानक पब्लिक स्कूल, इटारसी से 10वीं कक्षा पास की थी और दोनों ने 11वीं कक्षा में बायोलॉजी विषय चुना था।

दिलखुश के पिता रेलवे के सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन (SNT) विभाग में टेक्नीशियन फर्स्ट के पद पर कार्यरत हैं। हादसे की खबर सुनते ही परिवार के सदस्य और रिश्तेदार कोतवाली थाने पहुंचे। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे प्रशासन से जल्द से जल्द शव बरामद करने की गुहार लगा रहे हैं।

छोटे भाई का दर्द: "किसी ने मदद नहीं की"

कृष्णा ठाकुर, जो इस हादसे का प्रत्यक्षदर्शी है, ने बताया कि वह अपने बड़े भाई दिलखुश और दोस्त यश के साथ नर्मदापुरम घूमने आया था। उन्होंने कहा, "यश मेरे घर आया था, और फिर हम तीनों घूमने के लिए नर्मदापुरम आए। मैं किनारे पर नहा रहा था, जबकि भैया और यश सुरक्षा चेन पार कर आगे चले गए। अचानक वे डूबने लगे। मैंने घाट पर मौजूद लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने हमारी मदद नहीं की।"

कृष्णा ने यह भी बताया कि दिलखुश और यश दोनों पढ़ाई में अच्छे थे और भविष्य में कुछ बड़ा करना चाहते थे। इस हादसे ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे इटारसी समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह हादसा नर्मदा नदी के घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता की कमी को उजागर करता है। विवेकानंद घाट पर सुरक्षा चेन लगाई गई थी, लेकिन दिलखुश और यश ने इसे पार कर गहरे पानी में प्रवेश किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर न तो लाइफगार्ड मौजूद थे और न ही पर्याप्त चेतावनी बोर्ड।

नर्मदापुरम के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शर्मा ने कहा, "विवेकानंद घाट और सेठानी घाट पर हर साल सैकड़ों लोग स्नान करने आते हैं, लेकिन प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए। लाइफगार्ड, लाइफ जैकेट्स, और गोताखोरों की नियमित तैनाती होनी चाहिए।" उन्होंने मांग की कि इस हादसे की जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

नर्मदापुरम में डूबने की पिछली घटनाएं

  • नर्मदापुरम में नर्मदा और तवा नदी में डूबने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। उदाहरण के लिए:
  • अक्टूबर 2024: तवा नदी में मछली पकड़ने गए दो युवक, इकराम अली (22) और इरशान कुरेशी (25), डूब गए। उनके शव अगले दिन SDRF ने बरामद किए थे।
  • मई 2023: जबलपुर के दadda घाट पर नर्मदा नदी में स्नान करते समय दो युवक, अतुल पटेल और अनुराग लोधी, डूब गए।

इन घटनाओं ने बार-बार नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नर्मदा नदी की गहराई और तेज धारा को कम आंकना अक्सर ऐसी त्रासदियों का कारण बनता है।

यह हादसा नर्मदा नदी के घाटों पर सुरक्षा और जागरूकता की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। निम्नलिखित उपाय भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकते हैं:

  • लाइफगार्ड की तैनाती: सभी प्रमुख घाटों पर प्रशिक्षित लाइफगार्ड और गोताखोरों की नियमित तैनाती।
  • चेतावनी बोर्ड: गहरे पानी और तेज धारा वाले क्षेत्रों में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा चेन।
  • जागरूकता अभियान: स्थानीय समुदाय और पर्यटकों के लिए नदी स्नान के दौरान सावधानी बरतने के लिए जागरूकता कार्यक्रम।
  • SDRF की तैनाती: नर्मदा जैसे प्रमुख नदियों के घाटों पर SDRF की स्थायी उपस्थिति।
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