Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP News: सांची और अमूल की डबल मार, 10 महीने बाद 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी, क्यों बार-बार महंगा हो रहा है दूध?

MP News: मध्य प्रदेश में आम आदमी की सुबह की चाय अब और महंगी होने वाली है! सांची दूध ने 10 महीने के अंतराल के बाद, 7 मई 2025 से अपने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह ठीक छह दिन बाद की बात है, जब अमूल ने भी 1 मई 2025 से अपने सभी दूध वेरिएंट्स के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे।

इस साल यह दूसरी बार है जब दूध की कीमतों में उछाल आया है, और इससे पहले जुलाई 2024 में भी सांची और अमूल ने 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर मध्य प्रदेश में दूध क्यों बार-बार महंगा हो रहा है? क्या यह सिर्फ उत्पादन लागत की बात है, या इसके पीछे और भी गहरे कारण हैं? आइए, इस रोचक और जेब जलाने वाली कहानी को टटोलते हैं, जहां दूध की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम आदमी का बजट डगमगा रहा है!

MP Sanchi and Amul milk prices increased by Rs 2 per liter after 10 months why is it so expensive

MP News milk: सांची और अमूल की ताजा बढ़ोतरी: नए रेट्स का लेखा-जोखा

सांची दुग्ध संघ ने 7 मई 2025 से अपने सभी प्रमुख वेरिएंट्स-फुल क्रीम, गोल्ड, शक्ति, टोंड, और चाय स्पेशल-के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू की है। अब भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, और अन्य दुग्ध संघों में सांची के नए रेट्स इस प्रकार हैं

  • सांची गोल्ड (फुल क्रीम): 66 रुपये/लीटर (पहले 64 रुपये)
  • सांची शक्ति (स्टैंडर्ड): 60 रुपये/लीटर (पहले 58 रुपये)
  • सांची ताजा (टोंड): 54 रुपये/लीटर (पहले 52 रुपये)
  • सांची चाय स्पेशल: 58 रुपये/लीटर (पहले 56 रुपये)

अमूल ने भी 1 मई 2025 से अपने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद नए रेट्स इस तरह हैं:

  • अमूल गोल्ड (फुल क्रीम): 69 रुपये/लीटर (पहले 67 रुपये)
  • अमूल ताजा (टोंड): 57 रुपये/लीटर (पहले 55 रुपये)
  • अमूल टी स्पेशल: 63 रुपये/लीटर (पहले 61 रुपये)

इन बढ़ोतरी के साथ, मध्य प्रदेश में दूध की खपत करने वाले परिवारों का मासिक बजट अब और दबाव में है। भोपाल में एक औसत परिवार, जो रोजाना 2 लीटर सांची गोल्ड दूध खरीदता है, अब महीने में 120 रुपये अतिरिक्त खर्च करेगा। अगर अमूल यूजर्स की बात करें, तो यह बोझ और भारी है।

MP News milk: मध्य प्रदेश में दूध की खपत: सांची का दबदबा, अमूल की पैठ

मध्य प्रदेश में दूध की खपत का पैटर्न समझना जरूरी है ताकि इस बढ़ोतरी का असर समझा जा सके। भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में खुले दूध की खपत सबसे ज्यादा है, जो रोजाना 6-8 लाख लीटर के बीच है। इसके बाद सांची का नंबर आता है, जिसकी खपत करीब 3 लाख लीटर प्रतिदिन है। अमूल की खपत लगभग 80,000 लीटर प्रतिदिन है, जबकि मदर डेयरी, सौरभ, और श्रीधी जैसे अन्य ब्रांड्स मिलकर 1 लाख लीटर की खपत करते हैं।

सांची का मध्य प्रदेश में खास दबदबा है, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में, जहां यह सबसे भरोसेमंद ब्रांड माना जाता है। इंदौर में सांची की खपत 1.35 लाख लीटर प्रतिदिन है, और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। अमूल, जो शहरी इलाकों में लोकप्रिय है, अपनी बढ़ोतरी के साथ सांची को फॉलो करता रहा है, जिससे दोनों ब्रांड्स की कीमतें लगभग समान स्तर पर पहुंच गई हैं।

दूध के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? कंपनियों के तर्क

दूध खरीद की लागत में बढ़ोतरी: सांची दुग्ध संघ के प्रवक्ता मोती पटेल ने बताया कि पिछले 10 महीनों में दूध उत्पादकों से खरीद मूल्य 680 रुपये प्रति वसा से बढ़कर 770 रुपये प्रति वसा हो गया है। इसका मतलब है कि किसानों को अब ज्यादा दाम दिए जा रहे हैं, जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। अमूल ने भी कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम देने के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

चारे की कीमतों में उछाल: पशुओं के चारे की कीमतें पिछले कुछ सालों में 20% तक बढ़ी हैं। 2021 की तुलना में चारा अब महंगा है, और बारिश या सूखे जैसी मौसमी परिस्थितियों ने चारे की उपलब्धता को प्रभावित किया है। इंदौर मिल्क वेंडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत मधुरावाला ने कहा कि अति वर्षा या बाढ़ से खेतों में पानी भरने के कारण चारे की कमी हुई, जिसने दूध उत्पादन को प्रभावित किया।

उत्पादन और परिवहन लागत: अमूल और सांची दोनों ने उत्पादन, पैकेजिंग, और परिवहन की लागत में बढ़ोतरी का हवाला दिया है। डीजल की कीमतें, जो परिवहन का बड़ा हिस्सा हैं, समय-समय पर बढ़ती रही हैं। इसके अलावा, बिजली और श्रम लागत भी बढ़ी है, जिसका असर दूध की कीमतों पर पड़ता है।

मौसमी प्रभाव और आपूर्ति में कमी: गर्मी और लू के कारण दूध का उत्पादन कम हो जाता है, क्योंकि पशु कम दूध देते हैं। मध्य प्रदेश में मार्च-अप्रैल 2025 में भीषण गर्मी और लू की स्थिति ने दूध की आपूर्ति को प्रभावित किया, जिसके कारण कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं।

उच्च फैट प्रोडक्ट्स की मांग: दूध से बने हाई-फैट प्रोडक्ट्स जैसे घी, पनीर, और मक्खन की मांग बढ़ रही है, लेकिन फैट की आपूर्ति सीमित है। इसका असर फुल क्रीम दूध की कीमतों पर ज्यादा पड़ता है, जैसा कि सांची गोल्ड और अमूल गोल्ड में देखा गया।

आम आदमी पर असर, जेब ढीली, बजट टाइट

दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी मध्य और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बड़ा झटका है। भोपाल की गृहिणी राधा शर्मा ने कहा, "पहले ही सब्जी, दाल, और तेल महंगा है। अब दूध भी 66 रुपये लीटर हो गया। महीने में 300-400 रुपये सिर्फ दूध पर अतिरिक्त खर्च होंगे।" इंदौर के एक चाय विक्रेता रमेश यादव ने बताया, "चाय का धंधा दूध पर टिका है। दाम बढ़ने से या तो हमें चाय महंगी करनी पड़ेगी, या मुनाफा कम करना पड़ेगा।"

दूध की बढ़ोतरी का असर सिर्फ चाय या दूध पीने तक सीमित नहीं है। दही, पनीर, घी, मक्खन, और मिठाइयों की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इंदौर में मिठाई विक्रेता संजय जैन ने कहा, "दूध महंगा होने से मिठाई के दाम 10-15% बढ़ाने पड़ सकते हैं। त्योहारी सीजन में यह ग्राहकों के लिए परेशानी बढ़ाएगा।"

सांची और अमूल की रणनीति, एक-दूसरे को फॉलो करना

मध्य प्रदेश में एक ट्रेंड देखा गया है-अमूल के दाम बढ़ने के कुछ ही दिनों बाद सांची भी कीमतें बढ़ा देती है। जुलाई 2024 में अमूल ने 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, और कुछ ही हफ्तों बाद सांची ने भी ऐसा किया। इस बार भी अमूल की 1 मई की बढ़ोतरी के छह दिन बाद सांची ने 7 मई से दाम बढ़ाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाजार में प्रतिस्पर्धा को संतुलित करने की रणनीति है। अगर सांची दाम न बढ़ाए, तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि किसानों को ज्यादा दाम देने का दबाव दोनों ब्रांड्स पर है।

क्या है असली वजह? गहरी पड़ताल

पशुपालन की चुनौतियां: मध्य प्रदेश में पशुपालकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान पशुओं को पर्याप्त चारा न मिलने से उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित हुई। इसके अलावा, पशु रोगों और चिकित्सा लागत में बढ़ोतरी ने भी उत्पादन को प्रभावित किया।

निर्यात का दबाव: भारत ने 2021-22 में 33,000 टन घी, बटर, और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स का निर्यात किया, जिसकी कीमत 1,281 करोड़ रुपये थी। उच्च फैट प्रोडक्ट्स की वैश्विक मांग ने घरेलू आपूर्ति पर दबाव डाला, जिससे फुल क्रीम दूध की कीमतें बढ़ीं।

खाद्य मुद्रास्फीति: देश में खाद्य मुद्रास्फीति पहले से ही उच्च स्तर पर है। दूध, जो हर घर की जरूरत है, इस मुद्रास्फीति का सबसे आसान शिकार बनता है। डेयरी कंपनियां लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालकर अपने मुनाफे को सुरक्षित रखती हैं।

किसानों की स्थिति: हालांकि कंपनियां कहती हैं कि किसानों को ज्यादा दाम देने के लिए कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन कई पशुपालक शिकायत करते हैं कि उन्हें मिलने वाला दाम लागत की तुलना में कम है। मध्य प्रदेश के एक पशुपालक रामू प्रजापति ने कहा, "हमें 40-45 रुपये प्रति लीटर मिलता है, लेकिन चारे और दवाइयों का खर्च इतना है कि बचत कुछ नहीं होती।"

सरकार की भूमिका, क्या है राहत की उम्मीद?

मध्य प्रदेश सरकार ने दूध की कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में कहा कि दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई नीति की घोषणा नहीं की। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि दूध की बढ़ती कीमतें आम आदमी को परेशान कर रही हैं, और सरकार सिर्फ मूकदर्शक बनी है।

कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को पशुपालकों के लिए सब्सिडी बढ़ानी चाहिए, जैसे चारे पर छूट या मुफ्त पशु चिकित्सा सेवाएं। इससे दूध की लागत कम हो सकती है। इसके अलावा, डेयरी कंपनियों के मुनाफे की जांच और कीमतों पर नियंत्रण के लिए एक नियामक संस्था की जरूरत है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+