MP: गाय के गोबर से बने 'पवित्र दीपक' देंगे चाइना के झालर और दीयों को टक्कर

सागर, 19 सितंबर। दीपावली पर देश भर में चाइनीज दीपकों, झालरों की भरमार होती है। बुंदेलखंड के सागर में विचार समिति और महिला स्व-सहायता समूहों ने चाइना के माल को टक्कर देने और स्वदेशी व गाय के गोबर से निर्मित पवित्र दीपक तैयार किए हैं। गोबर से बने दीपक किफायती व आकर्षक रंग व डिजाइनों में बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुरुआती दौर में ही इनकी डिमांड राजधानी तक से आने लगी है। अभी तक करीब 7 लाख दिये बनाए जा चुके हैं। दीपकों को लेकर सबसे खास बात यह जब तक रोशन होंगे धूप की सुगंध बिखेरेंगे वहीं यह रोशन होने के बावजूद आग नहीं पकड़ते हैं। ये इको फ्रेंडली हैं और बाद में इनको गमलों में खाद के रुप में उपयोग भी किया जा सकता है।

सागर में दो साल से बनाए जा रहे गाय के गोबर से दीपक

सागर में दो साल से बनाए जा रहे गाय के गोबर से दीपक

सागर में विचार संस्था ने स्थानीय महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने के लिए व गो-शाला के गोबर का सद्उपयोग करने के लिए इससे दीपक बनाने का काम प्रारंभ किया था। संस्था ने इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों को ट्रेनिंग दिलाई और उन्हें गोबर, मिट्टी, रंग-ब्रश, सांचे आदि उपल्ब्ध कराए। इसके बाद महिलाएं अपने घरों में दीपक बनाने का काम करने लगी। दो साल में ही स्थानीय स्तर पर लोगों में दीपावली पर गाय के गोबर से बने दीपक को लेकर खासा उत्साह नजर आया और हाथों हाथ इनकी बिक्री हो गई थी। इस साल करीब 7 लाख दीपक तैयार कर लिए गए हैं।

750 महिलाओं को मिला है रोजगार

750 महिलाओं को मिला है रोजगार

गाय के गोबर से दीपक बनाने के लिए शहर के गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूह के माध्मय से जुड़ी हैं। वर्तमान में करीब 750 महिलाएं गाय के गोबर से दीपक बनाने के काम में जुटी हुई हैं। महिलाएं अपने घरों में या समूह में एक जगह एकत्रित होकर गोबर को प्रोसेस कर दीपक बनाने का काम कर रही हैं। गोबर में मिट्टी के साथ सांकल्य का उपयोग भी किया जाता है। ताकि जब तक दीपक जलेगा, वह रोशनी के साथ सुगंध भी देगा और पूजन के दौरान माहौल भी बना रहेगा।

प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाद में गमलों में खाद के रुप में उपयोग

प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाद में गमलों में खाद के रुप में उपयोग

गाय के गोबर से तैयार होने वाले दियों की बाजार में बहुत मांग बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण है कि यह दिए प्राकृतिक होने के साथ.साथ बाद में इनका अपशिष्ट शेष नहीं होता, गमलों में यह खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता हैं। विचार समिति के अध्यक्ष कपिल मलैया बताते हैं कि समिति दो वर्षों से गोमय उत्पाद पर कार्य कर रही है। इस वर्ष के दियों की खासियत यह है कि यह दिया गोबर से बने होने के बावजूद आग नहीं पकड़ते हैं। इसलिए यह पूर्णतः सुरक्षित हैं। यह पानी में तैर सकते हैं औसतन 45 मिनिट से सवा घंटे तक जलते हैं एवं बहुत सुंदर हैं।

वजन में हल्के और कम कीमत में भी मिल रहे दीये

वजन में हल्के और कम कीमत में भी मिल रहे दीये

कपिल मलैया के अनुसार शास्त्रों के मुताबिक माना जाता है कि गोमाता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है। दीवाली पर घरों को रोशन करने के लिए जलाए जाने वाले आर्टीफीसियल दीयों के स्थान पर इस बार गोबर के दियों से घर-आंगन रोशन होंगे। रंग-बिरंगे गोबर के ये दीये पहली बार बाजार में भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस दीपक के जलने से घर में हवन की खुशबू महकेगी। जिससे घर के वातावरण को पटाखों की गैस को कम करने में सहायक होगी।

सागर में वोकल फॉर लोकल का बेहतर उदाहरण, आत्मनिर्भर बनी महिलाएं

सागर में वोकल फॉर लोकल का बेहतर उदाहरण, आत्मनिर्भर बनी महिलाएं

देश भर में वोकल फॉर लोकल को लेकर काफी जोर दिया जा रहा है। सागर में स्व सहायता समूहों की महिलाओं को गो-शाला व गाय के गोबर से बने उत्पादों से जोड़ने के लिए कपिल मलैया विचार संस्था के माध्यम से काम कर रहे हैं। इससे अभी तक अलग-अलग स्व-सहायता समूहों में करीब 750 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। जिले भर में महिलाएं गाय के गोबर से लेकर स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले कपड़े से लेकर अन्य कारोबार में जुड़कर खुद को आत्म निर्भर बना रही हैं।

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