MP News: निजी अस्पताल पर सागर के व्यवसायी ने लगाए गंभीर आरोप, इलाज में लापरवाही पर मांगा 1 करोड़ का मुआवजा

MP News: सागर के एक व्यवसायी ने भोपाल स्थित एक नामी निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इलाज और जांच में लापरवाही का मामला उठाया है। व्यवसायी अजय दुबे का कहना है कि अस्पताल ने गलत निदान कर न सिर्फ उन्हें मानसिक तनाव दिया बल्कि उनके व्यवसायिक हितों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

इस मामले में उन्होंने अस्पताल को कानूनी नोटिस भेजते हुए 1 करोड़ 50 हजार रुपए के मुआवजे की मांग की है। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में जवाब न मिलने पर वह अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

Sagar businessman made serious allegations against private hospital compensation of Rs 1 crore

विदेश यात्रा से पहले कराया चेकअप, फिर डराया गया सर्जरी से

व्यवसायी अजय दुबे ने बताया कि वह 14 अप्रैल को मस्कट (ओमान) एक व्यापारिक दौरे पर जाने वाले थे। लेकिन विदेश यात्रा से पहले स्वास्थ्य की जांच के लिए 10 अप्रैल को वह सागर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, भोपाल पहुंचे। वहाँ कार्डिएक सीटी एंजियोग्राफी (CCTA) की गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी मध्य कोरोनरी धमनियों में 100% ब्लॉकेज है।

अस्पताल ने उन्हें यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक हलचल जानलेवा हो सकती है और तत्काल सर्जरी जरूरी है। दुबे के अनुसार, यह सुनकर वह बेहद भयभीत हो गए और उन्होंने अपना व्यापारिक दौरा रद्द कर दिया। इससे न केवल उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि आर्थिक रूप से भी नुकसान हुआ।

दूसरी राय ने खोली पोल, कोई गंभीर खतरा नहीं

सर्जरी की सिफारिश पर संदेह होने पर अजय दुबे ने मुंबई स्थित सुराणा हॉस्पिटल में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश कवार से परामर्श लिया। वहाँ 14 अप्रैल को कराई गई पारंपरिक इनोवेटिव एंजियोग्राफी की रिपोर्ट में सामने आया कि केवल एक धमनी में 40% ब्लॉकेज है, जो न तो खतरनाक है और न ही सर्जरी की आवश्यकता है।

Sagar businessman: डॉ कवार के मुताबिक, यह स्थिति आमतौर पर 60 वर्ष की आयु में देखी जाती है और सामान्य दवाओं से इसका इलाज संभव है। उन्होंने भोपाल अस्पताल की रिपोर्ट को "भ्रामक और डर पैदा करने वाली" बताया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि मरीज को सर्जरी की सलाह देना अप्रासंगिक और अनावश्यक था।

Sagar businessman: लीगल नोटिस भेजा, कोर्ट जाने की तैयारी

अजय दुबे ने इस घटना को न केवल एक चिकित्सा लापरवाही बल्कि मानसिक और व्यवसायिक उत्पीड़न करार दिया है। उनके अधिवक्ता ऋषि मिश्रा ने बताया कि मरीज ने सागर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें ₹1 करोड़ के मानसिक व आर्थिक मुआवजे के साथ ₹50 हजार की नोटिस लागत की मांग की गई है।

उन्होंने बताया कि अगर 15 दिनों के भीतर जवाब नहीं मिला, तो वह अस्पताल के खिलाफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, उपभोक्ता फोरम, और अन्य नागरिक व आपराधिक मंचों पर मुकदमा दर्ज करेंगे।

सवालों के घेरे में निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली

इस पूरे मामले ने भोपाल के निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यवसायी के मुताबिक, उन्हें जानबूझकर डराया गया और गलत रिपोर्ट के आधार पर तत्काल सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक और पेशेवर नुकसान उठाना पड़ा।

अभी तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि यह मामला अदालत तक पहुंचता है, तो यह प्रदेश में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक अहम कानूनी उदाहरण बन सकता है।

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