MP: सागर जिले का हांसलखेड़ी गांव का पठार टोला 96 घंटों से बना टापू, 250 ग्रामीण फंसे
सागर, 25 अगस्त। मप्र के सागर जिले में बेतवा, धसान, बेबस, सुनार नदियों ने चार दिन तक बाढ़ के रुप में कहर बरपा रखा था। बाकी इलाकों से बाढ़ का पानी तो मंगलवार शाम को उतरने लगा था, लेकिन बीना के पास से गुजरी बेतबा नदी का पानी कम नहीं हुआ था। यह इलाका जिले में सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित रहा है। गुरुवार तक यहां के हांसलखेड़ी का पठार टोला गांव बेतवा की बाढ़ से टापू बना हुआ था। जानकारी अनुसार यहां करीब 50 परिवार जिनमें ढाई सौ से अधिक लोग हैं, वे फंसे थे।

बेतवा नदी में आई बाढ़ के कारण हांसलखेड़ी गांव का एक हिस्सा पठार टोला बीते चार दिन से टापू बना हुआ है। इससे लगे निचले हिस्से के मकान पानी में पूरी तरह डूबे थे। बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां के कच्चे मकान तो ठीक पक्के मकान तक नदी के वेग में बह गए। जिनके घर बच गए जो सुरक्षित ऊंचाई हैं वे पल-पल बाढ़ का रौद्ररुप देखकर भयभीत हैं। इनके घरों में चार दिनों से चूल्हा नहीं जला है। ये बाहरी मदद के भरोसे दिन गुजार रहे हैं।

नाव से प्रसूताओं को निकाला, अस्पताल पहुंचाया
हांसलखेड़ी के पठार टोला गांव में कुछ प्रसूताएं भी थीं, जिनके प्रसव का समय चल रहा था। जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इसी जानकारी प्रशासन को दी तो तत्काल एक्शन लिया गया। आशा कार्यकर्ता लाइफ सेविंग जैकेट लेकर घर-घर पहुंचा और प्रसूताओं व उनके परिजन को मनाकर नाव से बाहर निकालकर लाए और एंबूलेंस से अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया। हांसलखेड़ी सहित अन्य प्रभावित गांवों में प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड नाव से भोजन पहुंचा रहे।
बीना इलाके ये गांव प्रभावित हुए थे
बीना इलाके में बाढ़ से जो इलाके और गांव प्रभावित हुए थे उनमें बेतवा किनारे के बसे गांव लखाहार, पठार टोला, ढिमरोली, ढाना, सिरचैपी, गोंची, बगसपुर, हांसलखेड़ी और कंजिया भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी अनुसार बेतवा किनारे का ढाई किलोमीटर से अधिक का इलाका पानी-पानी हो गया था। बुधवार रात तक दो किलोमीटर तक को इलाका जलमग्न बनाया जा रहा था। यहां फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। हालांकि गुरुवार को पानी उतरना शुरु हो गया है। बीना के कुल 41 गांव बाढ़ प्रभावित हुए हैं।












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