MP News: मध्य प्रदेश में तबादला तारीख बढ़ी, मोहन यादव सरकार ने क्यों लिया 10 जून तक विस्तार का फैसला?
MP News: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों की समय सीमा को बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने शुक्रवार, 30 मई 2025 को आदेश जारी कर तबादला आदेशों की अंतिम तारीख 30 मई से बढ़ाकर 10 जून 2025 कर दी है।
इस नए आदेश के तहत अब अगले 11 दिनों तक ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से तबादला आदेश जारी किए जा सकेंगे। यह फैसला मंत्रियों की मांग और भारी संख्या में प्राप्त आवेदनों के कारण लिया गया है।

क्यों बढ़ाई गई तबादला तारीख?मोहन कैबिनेट की हालिया बैठक में मंत्रियों ने तबादला आदेशों की समय सीमा बढ़ाने की मांग रखी थी। मंत्रियों का तर्क था कि जिला कलेक्टरों ने अपने प्रभार वाले जिलों में तबादला सूचियां अभी तक उनके कार्यालयों को नहीं भेजी हैं।
साथ ही, राज्य स्तर पर विभागीय तबादलों की सूची तैयार करने में भी समय लग रहा है, क्योंकि कर्मचारियों और अधिकारियों से बड़ी संख्या में तबादला आवेदन प्राप्त हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, लगभग डेढ़ लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसके कारण सूचियों को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है।
बैठक में कुछ मंत्रियों ने समय सीमा को 15 दिन तक बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुरू में इस मांग को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था। हालांकि, उन्होंने संकेत दिए थे कि समय सीमा में कुछ वृद्धि की जा सकती है। अंततः, सीएम के निर्देश पर GAD ने 10 जून तक का विस्तार कर दिया।
तबादला नीति 2025: प्रमुख बिंदुमोहन कैबिनेट ने 29 अप्रैल 2025 को तबादला नीति 2025 को मंजूरी दी थी, जिसे GAD ने 4 मई को लागू किया। इस नीति के तहत निम्नलिखित प्रावधान हैं:
- तबादला सीमा: प्रत्येक विभाग में 10% कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश में 6 लाख से अधिक नियमित कर्मचारी और अधिकारी हैं, जिसके हिसाब से लगभग 60,000 तबादले संभव हैं।
- समयावधि: तबादले 1 मई से 30 मई 2025 तक किए जाने थे, जिसे अब 10 जून तक बढ़ाया गया है।
- प्रक्रिया: सभी तबादला आदेश ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से जारी किए जाएंगे, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल हो।
- विशेष शर्तें: एक ही स्थान पर 3 साल पूरे करने वाले कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य है। पिछले एक साल में तबादले हुए कर्मचारियों को सामान्यतः दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, सिवाय विशेष परिस्थितियों में मुख्यमंत्री की मंजूरी के।
मंत्रियों की भूमिका और पारदर्शितानीति के तहत विभागीय मंत्रियों को तबादलों में विशेष परिस्थितियों में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे तबादला सूचियों में जनप्रतिनिधियों की भावनाओं का सम्मान करें और किसी भी तरह की अनियमितता से बचें। तबादला प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस सिस्टम का उपयोग अनिवार्य किया गया है, जिससे आवेदनों और आदेशों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहे।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने?इस समय विस्तार से उन कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिलेगी, जो अपनी पसंद के स्थान पर तबादले के लिए आवेदन कर चुके हैं। खासकर स्कूल शिक्षा विभाग में अतिशेष शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक और प्रशासकीय तबादलों की प्रक्रिया को 20 मई तक ऑनलाइन आदेश जनरेट करने और 1 जून से नई पोस्टिंग पर जॉइन करने का प्रावधान है। इसके अलावा, पुलिस विभाग में डीएसपी से नीचे के कर्मियों के तबादले पुलिस स्थापना बोर्ड की सिफारिश पर ही होंगे।
विपक्ष का आरोपकांग्रेस ने मोहन यादव सरकार पर तबादलों को "उद्योग" बनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने दावा किया कि तबादलों में "मध्यस्थ" सक्रिय हैं और रात में तबादला सूचियां जारी होने से प्रशासनिक अराजकता का माहौल है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तबादला प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नीति के अनुसार हो रही है।
आगे की राहतबादला तारीख बढ़ने से कर्मचारियों को अपनी पसंद के स्थान पर तबादले का अतिरिक्त समय मिलेगा। सरकार का दावा है कि यह फैसला प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और कर्मचारियों की सुविधा के लिए लिया गया है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होगी कि तबादला प्रक्रिया में कोई अनियमितता न हो और जनप्रतिनिधियों की भावनाओं का सम्मान हो।












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