MP News: सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों के होंगे तबादले

MP News: मध्य प्रदेश में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के लिए अब तबादला अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

यह निर्णय प्रदेश के विभिन्न सरकारी महकमों में स्थानांतरण नीति को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का यह कदम उन कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों पर भी लागू होगा जो वर्षों से "छूट" का लाभ लेते हुए एक ही स्थान पर जमे हुए थे।

MP News Employees organization officials who have been stuck at one place for 4 years will be transferred

क्या है आदेश का मूल स्वरूप?

सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार: राज्य, संभाग, जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को दो पदावधियों तक स्थानांतरण से छूट दी जा सकती है। छूट का लाभ पूरे सेवा काल में अधिकतम दो बार ही दिया जा सकेगा।

यदि कोई संगठन पदाधिकारी पहले ही चार साल तक एक स्थान पर छूट का लाभ ले चुका है, तो उसे अब छूट नहीं मिलेगी और उसे आवश्यकतानुसार स्थानांतरित किया जा सकेगा। जिन पदाधिकारियों की एक ही स्थान पर स्थापना अवधि चार साल से अधिक हो चुकी है, उन्हें अब "शासकीय आवश्यकता" के आधार पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा।

MP News: सरकार का तर्क, निष्पक्षता और पारदर्शिता

राज्य शासन का कहना है कि यह निर्णय स्थानांतरण नीति को प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।विभिन्न विभागों से यह शिकायतें आ रही थीं कि कुछ कर्मचारी संगठन पदाधिकारी संगठनात्मक पद का उपयोग कर वर्षों तक एक ही स्थान पर बने रहते हैं और प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। यह न केवल अन्य कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन को भी प्रभावित करता है।

MP News: कर्मचारी संगठन की छूट बनी समस्या

मध्य प्रदेश में कई मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन अपने पदाधिकारियों को स्थानांतरण से स्थाई छूट दिलवाने की कोशिश करते रहे हैं। इन संगठनों के अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर रहते हुए कई कर्मचारी 10 से 15 साल तक एक ही स्थान पर बने रहते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन पर उनका अनावश्यक दबाव बना रहता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया:"कुछ कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी हर साल पदाधिकारी बनते जाते हैं और तबादला नीति की छूट का दुरुपयोग करते हैं। यह अब रोका जाना जरूरी हो गया था।"

अब क्या होगा? प्रक्रिया कैसी चलेगी?

विभागाध्यक्ष, कलेक्टर और कमिश्नर अपने-अपने स्तर पर ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाएंगे जो 4 साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। छूट ले चुके पदाधिकारियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा। सूची बनने के बाद शासकीय आवश्यकता के अनुसार उनका स्थानांतरण किया जाएगा। छूट की नई स्वीकृति दो पदावधियों से अधिक नहीं दी जाएगी, भले ही कर्मचारी संगठन में चुनाव हों या कार्यकाल बढ़ाया गया हो।

आदेश का सार: तबादलों से छूट अब सीमित

सामान्य प्रशासन विभाग ने 16 मई 2025 को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को तबादलों से छूट की सुविधा अब सख्त नियमों के तहत दी जाएगी। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • दो पदावधि की छूट: राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को उनके पद पर नियुक्ति से दो पदावधि (आमतौर पर चार साल) तक तबादलों से छूट मिलेगी।
  • जीवनकाल में एक बार लाभ: यह छूट पूरे सेवा काल में केवल दो पदावधि के लिए ही दी जाएगी। यानी, कोई पदाधिकारी बार-बार इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकेगा।
  • चार साल से अधिक तैनाती: यदि कोई पदाधिकारी चार साल से अधिक समय से एक स्थान पर तैनात है, तो उसे शासकीय आवश्यकतानुसार स्थानांतरित किया जाएगा।
  • पहले लाभ ले चुके पदाधिकारी: जिन पदाधिकारियों ने पहले चार साल की छूट का लाभ ले लिया है, उन्हें अब यह सुविधा नहीं मिलेगी।

कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया: विरोध के सुर

कर्मचारी संगठनों ने इस आदेश का तीखा विरोध शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने कहा, "यह आदेश कर्मचारी संगठनों की स्वायत्तता पर हमला है। पदाधिकारियों को तबादलों से छूट जरूरी है, ताकि वे कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर सकें।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के सचिव संजय मिश्रा ने इसे "तानाशाही" करार दिया। उन्होंने कहा, "चार साल की सीमा मनमानी है। कई पदाधिकारी अपने क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। उन्हें हटाना अन्याय है।

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