MP News: कोरोना की रफ्तार बढ़ी, इंदौर में केसों का उछाल, फिर भी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी: कोई गाइडलाइन नहीं
MP News: देशभर में कोविड-19 के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं, और मध्य प्रदेश भी इस नई लहर से अछूता नहीं है। कोविड-19 डैशबोर्ड के अनुसार, देश में एक्टिव केसों की संख्या 3,758 तक पहुंच गई है, जबकि मध्य प्रदेश में 3 नए मामलों के साथ एक्टिव मरीजों की संख्या 19 हो गई है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में केसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर केरल की तरह बड़े पैमाने पर जांच शुरू की गई, तो मध्य प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो सकती है।

इंदौर में बढ़ते केस, जांच की कमी चिंता का विषय
मध्य प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है, खासकर इंदौर में, जहां 22 मई को निजी लैब में दो मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इंदौर में अब तक 16 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 9 एक्टिव केस हैं।
इनमें से 5 मरीज स्थानीय निवासी हैं, जबकि अन्य बाहर से यात्रा कर लौटे लोग हैं। हाल ही में सामने आए मरीजों में एक 43 वर्षीय महिला शामिल है, जो यूनाइटेड किंगडम से लौटी थी, और एक 30 वर्षीय महिला, जो केरल से आई थी। सभी मरीज होम आइसोलेशन में हैं और उनमें हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं।
प्रदेश में जांच की सुस्त रफ्तार चिंता का प्रमुख कारण है। भोपाल में केवल एम्स में ही RT-PCR टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है। निजी लैब में RT-PCR टेस्ट की लागत 1,200 से 1,500 रुपये तक है, जो आम लोगों के लिए महंगी साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केरल की तरह बड़े पैमाने पर RT-PCR जांच शुरू की जाए, तो मध्य प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। केरल में लक्षण दिखते ही तत्काल जांच की जा रही है, जिसके कारण वहां 1,400 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं।
JN.1 वैरिएंट: तेजी से फैलता, लेकिन कम खतरनाक
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि वर्तमान में फैल रहा JN.1 वैरिएंट "वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट" की श्रेणी में है, जिस पर नजर रखी जा रही है। यह वैरिएंट ज्यादा घातक नहीं है, लेकिन इसकी संक्रामकता अधिक है। मरीजों में हल्के लक्षण जैसे गले में खराश, बुखार, और थकान देखे जा रहे हैं, जो 3 से 5 दिनों में ठीक हो रहे हैं। डॉ. तिवारी ने लोगों से मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने और कोविड नियमों का पालन करने की अपील की।
गांधी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा ने चेतावनी दी कि वायरस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा, "जितने ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित होंगे, उतनी ही इसकी ताकत बढ़ेगी और यह नए रूपों में बदल सकता है। अभी से सतर्कता और रोकथाम के उपाय जरूरी हैं।" उन्होंने मास्क के उपयोग, भीड़भाड़ से बचने और नियमित हाथ धोने की सलाह दी।
MP News: यात्रा और ट्रैवल हिस्ट्री पर नजर
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। समर वेकेशन के दौरान मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग केरल, महाराष्ट्र और अन्य प्रभावित राज्यों में घूमने गए थे। इंदौर में हाल ही में पॉजिटिव पाए गए मरीजों में कई ऐसे हैं, जो केरल और मुंबई से लौटे थे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मरीजों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भोपाल भेजे हैं, ताकि वायरस के वैरिएंट की पहचान की जा सके। साथ ही, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग भी शुरू की गई है।
MP News: स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती पर सवाल
प्रदेश में बढ़ते केसों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई नई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिसे लेकर विशेषज्ञों और आम लोगों में नाराजगी है। भोपाल सहित कई बड़े शहरों में सरकारी अस्पतालों में RT-PCR जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, और निजी लैब पर निर्भरता बढ़ रही है। इंदौर के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस सेतिया ने लोगों से अपील की है कि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और सतर्कता बरतें।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने दावा किया है कि प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है और स्वास्थ्य अमला पूरी तरह सतर्क है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बिना व्यापक जांच और गाइडलाइंस के यह दावा अधूरा है। डॉ. धीरज शुक्ला ने सुझाव दिया कि लोग बाहर जाते समय मास्क पहनें और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
देश में स्थिति: केरल, महाराष्ट्र सबसे प्रभावित
कोविड-19 डैशबोर्ड के अनुसार, देश में एक्टिव केसों की संख्या 3,758 तक पहुंच गई है, जो 19 मई को केवल 257 थी। केरल में 1,400, महाराष्ट्र में 200 से अधिक, और दिल्ली में 104 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, NB.1.8.1 वैरिएंट के केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जो मई 2025 तक वैश्विक जीनोमिक सीक्वेंसिंग का 10.7% हिस्सा बन चुका है। भारत में JN.1 वैरिएंट सबसे प्रमुख है, जो 53% नमूनों में पाया गया है।
क्या हैं सावधानियां?
- मास्क का उपयोग: भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- हाथों की स्वच्छता: नियमित रूप से साबुन या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर से हाथ धोएं।
- लक्षणों पर नजर: बुखार, खांसी, या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत जांच कराएं।
- भीड़ से बचें: अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
- वैक्सीनेशन: बूस्टर डोज की स्थिति की जांच करें और जरूरत हो तो लगवाएं।












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