MP News: सीएम मोहन यादव बोले, सबके लिए त्वरित न्याय की अवधारणा पर आधारित हैं नये आपराधिक कानून

MP News: मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने सोमवार को अपने लिखित बयान में कहा कि भारत में आपराधिक कानूनों में परिवर्तन और सुधार एक महत्वपूर्ण विषय है, जो समाज की बदलती आवश्यकताओं और न्याय की आवश्यकता को पूरा करने के लिए समय-समय पर किया जाता है। हाल ही में, भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे आपराधिक कानूनों को संसद में पारित किया गया। अब एक जुलाई 2024 से पूरे देश में यह लागू हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, अमित शाह ने संसद में कानून को पेश करते हुए कहा है कि खत्म होने वाले ये तीनों कानून अंग्रेज़ी शासन को मज़बूत करने और उसकी रक्षा करने के लिए बनाए गए थे । इनका उद्देश्य दंड देने का था, न की न्याय देने का। तीन नए कानून की आत्मा भारतीय नागरिकों को संविधान में दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा करना, इनका उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि न्याय देना होगा। भारतीय आत्मा के साथ बनाए गए इन तीन कानूनों से हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

mp

मोहन यादव ने कहा कि पुराने कानूनों में गुलामी की बू आती थी। ये तीनों पुराने कानून गुलामी की निशानियों से भरे हुए थे क्योंकि इन्हें ब्रिटेन की संसद ने पारित किया था और हमने सिर्फ इन्हें अपनाया था। इन कानूनों में पार्लियामेंट ऑफ यूनाइटेड किंगडम, प्रोविंशियल एक्ट, नोटिफिकेशन बाई द क्राउन रिप्रेज़ेन्टेटिव, लंदन गैज़ेट, ज्यूरी और बैरिस्टर, लाहौर गवर्नमेंट, कॉमनवेल्थ के प्रस्ताव, यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड पार्लियामेंट का ज़िक्र है। इन कानूनों में हर मैजेस्टी और बाइ द प्रिवी काउंसिल के रेफेरेंस दिए गए हैं, कॉपीज़ एंड एक्सट्रैक्ट्स कंटेट इन द लंदन गैज़ेट के आधार पर इन कानूनों को बनाया गया, पज़ेशन ऑफ द ब्रिटिश क्राउन, कोर्ट ऑफ जस्टिस इन इंग्लैंड और हर मैजेस्टी डॉमिनियन्स का भी ज़िक्र इन कानूनों में कई स्थानों पर है। अच्छी बात यह कि गुलामी की निशानियों को पूरी तरह मिटा दिया गया है। जिसके तहत 475 जगह ग़ुलामी की निशानियों को समाप्त कर दिया गया है। हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बहुत समय लगता है, कई बार न्याय इतनी देर से मिलता है कि न्याय का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है, लोगों की श्रद्धा उठ जाती है और अदालत में जाने से डरते हैं।

इन कानूनों को बनाने के पीछे बहुत लंबी प्रक्रिया रही है। इन कानूनों को आज के समय के अनुरूप बनाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अगस्त, 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों, देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और देश के सभी कानून विश्वविद्यालयों को पत्र लिखे थे।

वर्ष 2020 में सभी, महामहिम राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और सांसदों एवं संघ-शासित प्रदेशों के महामहिम प्रशासकों को पत्र लिखे गए। इसके बाद व्यापक परामर्श के बाद ये प्रक्रिया कानून बनने जा रही है। इसके लिए 18 राज्यों, 6 संघशासित प्रदेशों, सुप्रीम कोर्ट, 16 हाई कोर्ट, 5 न्यायिक अकादमी, 22 विधि विश्वविद्यालय, 142 सांसद, लगभग 270 विधायकों और जनता ने इन नए कानूनों पर अपने सुझाव दिए हैं। यह प्रक्रिया सरल नहीं थी, काफी मेहनत की गई बीते 4 सालों में। खूब विचार विमर्श किया गया है। इस संदर्भ में हुई 158 बैठकों में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहे हैं।

यह भी पढ़ें MP News: दूध उत्पादन करने वालों के लिए CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा, बोले- बोनस देगी सरकार

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+