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मध्य प्रदेश में बाबाओं की बढ़ी डिमांड, चुनावी साल में सभी दलों को चाहिए 'दैवी कृपा'

मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक दलों के सियासी भविष्य का फैसला मतदाताओं के हाथों में होगा। लेकिन, फिलहाल बाबाओं का दरबार लगना शुरू हो गया है। चुनाव से पहले दैवी कृपा की आस में सभी दलों के नेता धार्मिक संतों का आशीर्वाद पाने की कोशिशों में जुटे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ इन दिनों अपने क्षेत्र में तीन दिवसीय कथा का आयोजन करवा रहे हैं। बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री की यह कथा उनके राजनीतिक गढ़ छिंदवाड़ा में आयोजित की गई है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री इस समय देश के सबसे चर्चित बाबाओं में शामिल हैं।

all parties need divine grace

सबसे ज्यादा डिमांड में चल रहे हैं धीरेंद्र शास्त्री
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक धीरेंद्र शास्त्री उन बाबाओं में शामिल हैं, जो इस समय एमपी में सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। वह काफी समय से पूरे देश में यात्राएं कर रहे हैं और हिंदू राष्ट्र की बात करके सुर्खियों में हैं। इसी साल मई में वह कथा के सिलसिले में पटना पहुंचे थे, तो बीजेपी के बड़े नेताओं की कतार लग गई थी।

भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों के नेता मांग रहे हैं आशीर्वाद
हाल के दिनों में उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है, इसलिए चुनावी राज्य एमपी में उनकी डिमांड बढ़ना स्वाभाविक है। अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में उनकी कथा का आयोजन करना, उनके अनुयायियों से जुड़ने का एक आसान तरीका है। शास्त्री के दरबार में पहुंचने वालों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता शामिल हैं।

बाबाओं ने भी बना रखा है, सभी दलों के साथ संतुलन
इसी साल मई में बीजेपी नेता नीरज निगम ने गुना में उनका तीन-दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करवाया था। इस कार्यक्रम के बाद शास्त्री राघोगढ़ किला भी गए और वहां कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के साथ-साथ उनके बेटे जयवर्धन सिंह भी मिले।

हिंदुत्व पर बीजेपी का एकाधिकार नहीं- कांग्रेस नेता
जयवर्धन के मुताबिक, 'मैं पहली बार पंडित शास्त्री से 2021 की जनवरी में छतरपुर में मिला था, जब वे देश में बड़ा नाम नहीं थे। उस समय मेरे पिता दिग्विजय सिंह ने उन्हें राघोगढ़ बुलाया था। मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता।' उन्होंने कहा कि 'हिंदुत्व पर बीजेपी का एकाधिकार नहीं है। इसका बीजेपी से कहीं विशाल और जीवंत इतिहास है। यह हमारी निजी आस्था है और हम इससे बंधे हुए हैं। इसके साथ ही हम बीजेपी से अलग अन्य धर्मों के लोगों के साथ सह-अस्तित्व की भी बात करते हैं।'

कई और कथा वाचकों की हो रही है मांग
इनके अलावा भी कई कथा वाचक हैं, जिन्हें नेताओं की तरफ से लगातार निमंत्रण मिल रहे हैं। इनमें प्रदीप मिश्रा, जया किशोरी, पंडोखर सरकार,रावतपुरा सरकार, संत रविशंकर और कमल किशोर जैसे संत-महात्मा शामिल हैं। इस साल जून में मध्य प्रदेश के मंत्री तुलसी सिलावट ने अपने चुनाव क्षेत्र इंदौर के सांवेर में पंडोखर सरकार का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान कांग्रेस नेता जीतू पटवारी भी वहां पहुंचे थे। आने वाले चुनावों के लिए पंडोखर ने दोनों ही नेताओं को अपना आशीर्वाद दिया। इसी तरह मई में कांग्रेस नेता सत्यनारायण पटेल ने इंदौर में जया किशोरी से कथा का कार्यक्रम आयोजित कराया था।

सिर्फ वोट के लिए ऐसा कर रहे हैं कांग्रेसी- बीजेपी नेता
राज्य के कृषि मंत्री कमल सिंह पटेल तो पिछले साल ही हरदा में जया किशोरी का कार्यक्रम आयोजित करवा चुके हैं। उन्होंने इसके बारे में बताया, 'यह लोगों के लिए कार्यक्रम था और यह मेरे बेटे की अगुवाई वाले सांस्कृतिक संगठन 'कमल सांस्कृतिक मंच' ने किया था।'

उन्होंने कहा, 'यह अच्छा है कि अब कांग्रेस के नेता हमें फॉलो कर रहे हैं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करवा रहे हैं। यह हमारी विचारधारा की जीत है। लेकिन, एमपी के लोग जानते हैं कि वे सिर्फ वोट के लिए ऐसा कर रहे हैं।'

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