एमपी हाईकोर्ट ने थानों में निर्माणाधीन मंदिरों पर लगाई रोक: सरकार से पूछा, किसके आदेश पर बन रहे?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने प्रदेश के थानों में निर्माणाधीन मंदिरों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि ये मंदिर किसके आदेश पर बन रहे हैं। इस मामले में मुख्य सचिव अनुराग जैन और डीजीपी सुधीर सक्सेना को नोटिस जारी किया गया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए थानों में निर्माणाधीन मंदिरों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल पूछा है कि कैसे शासकीय जमीन पर मंदिर बन रहे हैं।

इस मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव अनुराग जैन और डीजीपी सुधीर सक्सेना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही गृह विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग को भी नोटिस दिए गए हैं।
यह सुनवाई जबलपुर के ओपी यादव द्वारा दायर याचिका पर हुई, जिसमें उन्होंने थानों में बन रहे धार्मिक स्थलों की शिकायत की थी। अगली सुनवाई की तारीख 19 नवंबर तय की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील सतीश वर्मा ने अदालत में बताया कि "थानेदार धार्मिक स्थल बना रहे हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।" उन्होंने 2003 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सार्वजनिक स्थानों, विशेषकर सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक स्थलों का निर्माण नहीं होना चाहिए।
याचिका में जबलपुर शहर के सिविल लाइन, लार्डगंज, मदनमहल और विजय नगर थानों में बने मंदिरों की तस्वीरें भी संलग्न की गई थीं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं, जोकि इस मामले में गंभीर चिंता का विषय है।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने सार्वजनिक भूमि के उपयोग को लेकर अपनी संजीदगी दिखाई है और धार्मिक स्थलों के निर्माण पर रोक लगाकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।












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