MP की सरकारी अस्पतालें बदहाल क्यों? सरकार से सवाल पूछने यात्रा लेकर निकले डॉक्टर
सरकारी अस्पतालों और यहां काम करने वाले डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ हमेशा से समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकारी दावों के विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकार को इस हकीकत से रूबरू कराने चिकित्सा महासंघ यात्रा निकाल रहा है।

Doctors Rally : मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ चिकित्सक संपर्क यात्रा निकाल रहे हैं। शुक्रवार को ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज से यात्रा प्रारंभ हुई। इसमें मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, मप्र मेडिकल आफिसर्स एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य मिलकर यह यात्रा निकाल रहे हैं। यात्रा को ग्वालियर में हरीझंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके पूर्व चिकित्सा बचाओ, चिकित्सक बचाओ यात्रा की शुरूआत अंकलेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना से की गई। गजराराजा मेडिकल कॉलेज की सभागृह में सभी चिकित्सकों से संवाद किया इसके बाद सभी चिकित्सकों ने विशाल जन रैली के रूप में मेडिकल कालेज से यात्रा निकाल कर फ्लैग प्वाइंट, कटोरा ताल तक पूरी की, इसके पूर्व यात्रा को हरीझंडी डॉ. एएस भल्ला (पूर्व आईएमए अध्यक्ष), डॉ. राहुल सपरा, डॉ. अखिलेश त्रिवेदी, डॉ. माखन माहोर द्वारा दिखाकर रवाना किया गया। सभागृह में 400 की तादात में डॉक्टर्स चिकित्सा शिक्षक, मेडिकल ऑफिसर्स मौजूद रहे।

सागर में 3 फरवरी को पहुंचेगी यात्रा
सागर में चिकित्सा बचाओ, चिकित्सक बचाओ यात्रा के संयोजक व बीएमसी एमटीए के अध्यक्ष डॉ. सर्वेश जैन के अनुसार यह यात्रा 13 मेडिकल कॉलेज व 32 शहरों से गुजरेगी, जो 7 फरवरी को भोपाल पहुंचेगी। इसके पूर्व 3 फरवरी को यह यात्रा सागर पहुंचेगी। यहां पर बस स्टैंड के पास बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा। सागर से विभिन्न शहरों में होते हुए यह यात्रा 7 फरवरी को भोपाल पहुंचेगी जहां गांधी मेडिकल कॉलेज में सभा होगी एवं शासन के अधिकारियों के साथ मीटिंग के दौरान प्रदेश की सरकारी अस्पतालों की वास्तविक स्थिति और हालत को लेकर आडिट रिपोर्ट सौंपी जाएगी। यदि सरकार ने सरकारी अस्पतालों में और चिकित्सा महासंघ की मांगों का समाधान नहीं किया तो फरवरी माह में कामबंद आंदोलन किया जाएगा।
Recommended Video

चिकित्सा महासंघ के यह मुद्दे, जिनका समाधान चाहते हैं डॉक्टर
मप्र में चिकित्सकों का शासकीय चिकित्सालयों/ मेडिकल कॉलेज की नौकरी छोड़ने, हर स्तर (ब्लॉक, तहसील, जिला, मेडिकल कॉलेज) पर विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, जनता उचित इलाज से वंचित, चिकित्सकीय आधारभूत संसाधनों की कमी और डॉक्टरों को करियर में आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिलने तथा चिकित्सा संस्थानों में गैर चिकित्सकीय प्रशासकों का बढ़ता हस्तक्षेप।












Click it and Unblock the Notifications