Indore में कांग्रेस की 'किसान न्याय यात्रा', जीतू पटवारी ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने किसानों के सम्मान में मैदान संभाला। जहां, किसान न्याय यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश के किसानों के हक की आवाज को बुलंद करने, उन्हें फसलों का समर्थन मूल्य दिलाने और सोयाबीन के भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल दिए जाने जैसी मांगों को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा प्रदेश भर में निकाली गई 'किसान न्याय यात्रा' के समापन अवसर पर इंदौर के कलेक्टर कार्यालय पर एक विशाल आम सभा का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के अलावा शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे, जिले के सह प्रभारी द्वय अवनीश भार्गव एवं गजेंद्र सिसोदिया, के के मिश्रा, कृपा शंकर शुक्ला, विपिन वानखेड़े समेत नेतागण उपस्थित थे।
इस आम सभा में पूरे जिले भर के किसान पूरे जोश-खरोश के साथ अपने ट्रैक्टरों से शामिल होने के लिए निकले थे, लेकिन चारों दिशाओं से आ रहे हैं हजारों ट्रैक्टरों को देख, घबराई सरकार ने शहर की सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर, उन ट्रैक्टरों को रोक लिया।
ट्रैक्टर से सभा स्थल पर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि "जब तक किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य और सोयाबीन का भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस पार्टी का संघर्ष यूं ही चलता रहेगा।"
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि "आज की किसान न्याय यात्रा में सम्मिलित होने आ रहे हजारों ट्रैक्टरों को शहर की सीमा में घुसने से रोक कर प्रदेश की अत्याचारी भाजपा सरकार ने अपना तानाशाही चेहरा उजागर कर दिया है, अनुमति के बाद भी ऐसा करना लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ाने के समान है, हमने इस किसान न्याय यात्रा के जरिए भाजपा को किसानों से किया गया उनका वही वादा याद दिलाया है जो उसने 'मोदी की गारंटी' के नाम से अपने घोषणा पत्र में किया था।
पटवारी ने कहा की, अपने वादे से मुकरी प्रदेश सरकार ने, न तो गेहूं का भाव 2700 रुपए क्विंटल दिया और न ही धान का भाव 3100 रुपए प्रति क्विंटल दिया, सोयाबीन का तो लागत मूल्य भी सरकार देने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में हम इस दमनकारी सरकार को यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि जब तक किसानों को उनकी फसलों का समर्थन मूल्य और सोयाबीन का भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल नहीं मिल जाता, किसानों के न्याय की यह लड़ाई यूं ही अनवरत जारी रहेगी। अगर सरकार नहीं मानी तो अगले चरण में मंडियों पर आंदोलन होगा और उसके बाद विधानसभा के घेराव के लिए भी सरकार को तैयार रहना होगा। आंदोलन चाहे कितना भी लंबा क्यों न चले, हम तब तक चैन से बैठने वाले नहीं हैं, जब तक किसानों को उनका वाजिब अधिकार नहीं मिल जाता।"
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