सिंचाई क्षमताओं की CM मोहन यादव ने ली जानकारी, कहा- ओंकारेश्वर में शीघ्र प्रारंभ होगा फ्लोटिंग प्लांट

MP News: जल संसाधन विभाग, नर्मदा नियंत्रण मंडल एवं वृहद परियोजना नियंत्रण मंडल के कार्यों की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में नागरिकों को पेयजल और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं। परियोजनाओं के कार्य समय पर पूरे हों।

सीएम यादव ने समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश का सिंचाई क्षेत्र अगले पांच साल में एक करोड़ हेक्टेयर को पार कर जाएगा। ओंकारेश्वर के फ्लोटिंग प्लांट से ऊर्जा उत्पादन शीघ्र प्रारंभ होगा। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की इस परियोजना से प्रारंभ में 50 मेगावाट उत्पादन होगा।

MP CM Mohan Yadav

सीएम ने प्रदेश की सिंचाई क्षमताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि वृहद,मध्यम और लघु सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचित क्षेत्र में वृद्धि की जाए। शासकीय स्रोतों से सिंचाई प्रतिशत की जिलावार जानकारी प्राप्त करते हुए सीएम ने उन जिलों में सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने के निर्देश दिए, जहां वर्तमान में सिंचाई प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में जल संसाधन विभाग के माध्यम से वर्तमान में 41. 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 8.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है, इस तरह कुल 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है।

प्रदेश में निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने पर सिंचाई क्षेत्र जल संसाधन विभाग का 23.66 लाख हेक्टेयर और नर्मदा घाटी विकास विभाग का 43. 21लाख हेक्टेयर बढ़ जाएगा। इन योजनाओं के आगामी 5 वर्ष में पूर्ण हो जाने पर प्रदेश की सिंचाई क्षमता 93 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो जाएगा।

साल-दर-साल बढ़ेगा सिंचाई क्षेत्र
बैठक में जानकारी दी गई कि जल संसाधन विभाग के कार्यों से प्रदेश में वर्ष दर वर्ष सिंचाई क्षेत्र बढ़ता जाएगा। वर्ष 2024 में 2.75, वर्ष 2025 में 4.21, वर्ष 2026 में 4.62, वर्ष 2027 में 5.74 और वर्ष 2028 में 6.34 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस तरह इन पांच वर्ष में जल संसाधन विभाग द्वारा 23.66 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि के लिए कार्य पूरे हो जाएंगे।

केन बेतवा परियोजना, संशोधित पार्वती सिंध परियोजना और एनवीडीए की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से भी प्रदेश में 19.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी। इस तरह प्रदेश की सिंचाई क्षमता एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक हो जाएगी। किसानों को सिंचाई सहित पेयजल के लिए अधिक सुविधा मिलेगी। उद्योगों के लिए भी जल उपलब्धता बढ़ने से अर्थ व्यवस्था को लाभ पहुंचेगा।

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