रमाबाई आंबेडकर की पुण्यतिथि पर CM मोहन यादव दी श्रद्धांजलि, कहा- आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा
MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने माता रमाबाई आंबेडकर जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सीएम यादव ने कहा कि आपने महिलाओं को सम्मान, स्वाभिमान एवं अधिकारों के लिए समाज की कुरीतियों से मुक्ति की प्रेरणा दी। नारी सशक्तिकरण के लिए आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार 27 मई को अपने 'X' हैंडल पर रमाबाई आंबेडकर जी की एक तस्वीर पोस्ट की। साथ ही, सीएम यादव ने लिखा, त्याग एवं समर्पण की प्रतिमूर्ति, माता रमाबाई आंबेडकर जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आपने महिलाओं को सम्मान, स्वाभिमान एवं अधिकारों के लिए समाज की कुरीतियों से मुक्ति की प्रेरणा दी।

इतना ही नहीं, सीएम यादव ने आगे कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। आपको बता दें कि संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर की पत्नी रमाबाई अंबेडकर का जन्म 7 फरवरी 1989 को एक गरीब दलित परिवार में हुआ था। उन्हें रमाई या मां रमा के भी नाम से जाना जाता है।
साल 1906 में डॉक्टर अंबेडर की रमाबाई के साथ शादी हुई थी, आपको जानकर अचरज होगा कि वो उम्र में भीमराव से बड़ी थीं, कहते हैं कि इनकी शादी सब्जी बाजार में कराई गई थी। रमाबाई का जन्म 1989 में महाराष्ट्र में हुआ था, उनके पिता का नाम भीकू और माता का नाम रुक्मणि था, उनके पिता मछली बेचने का काम करते थे।
भीमराव अंबेडकर अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे क्योंकि, वो हमेशा उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती थीं। इस शादी से दोनों को पांच बच्चे हुए थे, भीमराव अंबेडकर और रमाबाई का वैवाहिक जीवन 29 साल रहा था। उनका मानना था कि बिना शिक्षा के समाज और देश का भला नहीं हो सकता है और इसी वजह से वो चाहती थीं कि बाबा साहेब शिक्षा पर फोकस करें।
यहां तक कि जब बाबा साहेब विदेश में थे तो रमाबाई को काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था। लेकिन, उन्होंने अपनी परेशानियों को बाबा साहेब से शेयर नहीं किया। क्योंकि वो नहीं चाहती थीं कि उनकी परेशानियां बाबा साहेब की प्रगति में बाधा बने और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो।
हालांकि, 26 मई 1935 में उनका निधन हो गया था। डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी किताब "थॉट्स ऑफ पाकिस्तान" में , जो कि 1940 में प्रकाशित हुई थी, में जिक्र किया है उनके जीवन पर उनकी पत्नी का गहरा असर रहा है। उन्होंने अपनी किताब अपनी पत्नी को समर्पित करते हुए लिखा है कि 'भीमा से डॉ. अंबेडकर बनाने का श्रेय' रमाबाई को जाता है।












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